Pak Population Crisis : पाकिस्तान की बढ़ती तेजी से बढ़ती आबादी शरीफ सरकार के लिए मुसीबत बनती जा रही है. इस पाक सरकार की ओर से जनसंख्या को नियंत्रित के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, इस समिति में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब और योजना मंत्री अहसान इकबाल को भी समिति में शामिल किया गया है. इस फैसले को पाकिस्तान में सेना की बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है.
सरकार ने बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता
पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री सैयद मुस्तफा कमाल ने सीनेट की बैठक में कहा कि जनसंख्या विस्फोट सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. उन्होंने बताया कि पीएम शरीफ इस मुद्दे पर कई उच्चस्तरीय बैठकें कर चुके हैं और अब महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेने की तैयारी की जा रही है. सरकार का लक्ष्य जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार को कम करना है.
हर साल 67 लाख जन्म, बढ़ रही चिंता
साल 2023 की डिजिटल जनगणना के मुताबिक, पाकिस्तान की कुल जनसंख्या करीब 24.15 करोड़ है और वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दर 2.55 प्रतिशत है. स्वास्थ्य मंत्री कमाल ने बताया कि देश में हर साल लगभग 67 लाख बच्चों का जन्म होता है. उन्होंने कहा कि यदि परिवार नियोजन सेवाओं का विस्तार किया जाए तो हर वर्ष करीब 15 लाख जन्म दर कम किए जा सकते हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि मौजूदा रफ्तार जारी रही तो दशक के अंत तक पाकिस्तान दुनिया का चौथा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन सकता है.
NFC फॉर्मूले में बदलाव का सुझाव
स्वास्थ्य मंत्री कमाल ने राष्ट्रीय वित्त आयोग (NFC) के मौजूदा फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राज्यों को मिलने वाले संसाधनों का 82 प्रतिशत हिस्सा जनसंख्या के आधार पर तय होता है, जिससे अधिक आबादी बनाए रखने की प्रवृत्ति बढ़ती है. उन्होंने इस हिस्सेदारी को घटाकर 50 प्रतिशत करने का सुझाव दिया. इसके साथ ही गर्भनिरोधक साधनों पर टैक्स छूट और उनकी उपलब्धता बढ़ाने की बात भी कही गई.
आसिम मुनीर का बढ़ता प्रभाव
पाक फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पहले ही पाकिस्तान की कई अहम संस्थाओं और आर्थिक फैसलों से जुड़ी परिषदों का हिस्सा हैं. अब जनसंख्या प्रबंधन समिति में उनकी नियुक्ति से साफ संकेत मिल रहे हैं कि देश की नीतियों में सेना की भूमिका लगातार बढ़ रही है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का भी मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान के शासन तंत्र में सेना का प्रभाव पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह समिति अपनी सिफारिशें कब तक सरकार को सौंपेगी.
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