पाकिस्तानी राष्ट्रपति बोले- हम ऐसे मुसलमान, जो 3-4% हिंदुओं को बर्दाश्त कर रहे; भड़के जावेद अख्तर ने लगाई क्लास

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के हिंदू अल्पसंख्यकों पर दिए गए बयान ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी मुसलमान हिंदुओं को 'सहन' करते हैं, जिससे विवाद खड़ा हो गया है. जावेद अख्तर ने जरदारी के बयान की लानत-मलानत की है.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश के हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसकी खूब चर्चा हो रही है. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं को मुसलमान बर्दाश्त कर रहे हैं.  उन्होंने यह भी कहा कि वे उतने ही स्वतंत्र हैं, जितने वे कहीं और होते. इसी सांस में जरदारी ने यह भी कहा कि वे भारत की तुलना में पाकिस्तान में रहना ज्यादा पसंद करेंगे. उन्होंने पाकिस्तान के मुसलमानों को सहिष्णु बताया, जबकि भारत के हिंदुओं को अलग माइंडसेट वाला कहा. 

यौमे आजादी के कार्यक्रम में दिया बयान

आसिफ अली जरदारी ने यह बात इस्लामाबाद में 14 अगस्त को आयोजित यादगार-ए-फतह विजय स्मारक समारोह को संबोधित करते हुए की. यह कार्यक्रम पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित किया गया था. पाकिस्तान ने इस स्मारक को 2025 में भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष में अपनी बताई गई जीत की याद में बनाया है. पाकिस्तान इस संघर्ष को ‘मरका-ए-हक’ यानी ‘सत्य की लड़ाई’ के नाम से बुलाता है.

अपने भाषण के दौरान जरदारी ने भारत और पाकिस्तान की राष्ट्रीय पहचान को लेकर दोनों देशों के नजरिए की तुलना की. उन्होंने भारत की विचारधारा का जिक्र करते हुए कहा, 'भारतीयों का नजरिया अलग है. उनके दिमाग में अपना एजेंडा है. वे अखंड भारत में विश्वास करते हैं. लेकिन बीच में बहुत कुछ ऐसा है जिसे वे भूल चुके हैं.' जरदारी ने आगे कहा,  'हम मुसलमान हैं. वे नहीं हैं. लेकिन हम ऐसे मुसलमान हैं, जिनकी सोच सहन करने वाली है.'

‘हम ऐसे मुसलमान हैं जो बर्दाश्त करते हैं’- जरदारी

पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पर बात करते हुए जरदारी ने कहा, हम ऐसे मुसलमान हैं, जिनकी सोच सहन करने वाली है.' इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान में तीन से चार प्रतिशत हिंदू आबादी है. और वे उतने ही स्वतंत्र हैं, उतने ही अच्छे हैं, जितने वे कहीं और थे. जरदारी ने यहीं अपनी बात नहीं रोकी. उन्होंने पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की रिहायश पसंदी को लेकर कहा कि वे उनके साथ रहने के बजाय हमारे साथ रहना पसंद करेंगे.'

जरदारी के मुताबिक, पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है, लेकिन उसकी सोच ऐसी है जिसमें हिंदू आबादी को सहन किया जाता है. सहन किया जाता है, वाले शब्द चुनाव पर लोगों ने सवाल उठाए हैं. यह कैसी सहनशीलता है? जिस स्थान पर सैकड़ों सालों से रह रहे लोगों को सत्ता बदलाव के बाद सहन किया जाता है. शनिवार को अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बयान की आलोचना की.

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जावेद अख्तर ने जरदारी को लताड़ा

अख्तर ने ने जरदारी की टिप्पणी को असंवेदनशील बताते हुए कहा कि किसी देश के अल्पसंख्यक समुदाय को ‘सहन करने’ की बात करना उचित नहीं है. उन्होंने लिखा, 'पाकिस्तान के मिस्टर जरदारी, जो बेनजीर भुट्टो से शादी करने के बाद सुर्खियों में आए थे, कहते हैं कि वे अपने देश की 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को सहन करते हैं. मिस्टर जरदारी, मैं समझता हूं कि आप हमेशा से ही उन सभी लोगों के प्रति असंवेदनशील रहे हैं, जिनकी संख्या 10 प्रतिशत से कम है.'


पाकिस्तान में हिंदू आबादी 3-4 प्रतिशत है!

राष्ट्रपति जरदारी ने पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी तीन से चार प्रतिशत बताई. लेकिन पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स यानी पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो की 2023 की आधिकारिक जनगणना में अलग आंकड़े दर्ज हैं.

जनगणना के मुताबिक, पाकिस्तान में 38,67,729 हिंदू दर्ज किए गए हैं. यह देश की कुल 24,04,58,089 आबादी का 1.61 प्रतिशत है. वहीं, जनगणना में 13,49,487 लोगों को अनुसूचित जाति के तहत अलग से दर्ज किया गया है, जो कुल आबादी का 0.56 प्रतिशत है.

जरदारी के दावे पर आंकड़ों की गवाही है अलग

अगर हिंदू और अनुसूचित जाति के इन दोनों आंकड़ों को एक साथ देखा जाए तो संख्या 52,17,216 हो जाती है. यह पाकिस्तान की कुल जनगणना आबादी का करीब 2.17 प्रतिशत बैठता है. यानी आधिकारिक जनगणना के आंकड़े भी हिंदू आबादी के लिए जरदारी के बताए 3 से 4 प्रतिशत के आंकड़े की पुष्टि नहीं करते.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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