Pakistan Video : एक बिहारी पाकिस्तान पर भारी, वीडियो देखकर आप भी कहेंगे वाह क्या बात है

Pakistan Video : पाकिस्तान की सिंध प्रांत की असेंबली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें बिहार शब्द पर संग्राम होता नजर आ रहा है.

Pakistan Video : पाकिस्तान की सिंध प्रांत की असेंबली में ‘बिहारी’ शब्द की गूंज सुनाई दी. इस शब्द को लेकर संग्राम छिड़ गया. इसका वीडियो सामने आया है. इसमें दिख रहा है कि एक शख्स असेंबली में दहाड़ रहा है. यह शख्स सिंध प्रांत के विधानसभा सदस्य सैयद एजाज उल हक है. वे कहते नजर आ रहे हैं, ‘बिहारी वो लोग हैं जिन्होंने पाकिस्तान बनाने में अहम भूमिका निभाई. नारा लगाया था… बंट के रहेगा हिंदुस्तान, बनकर रहेगा पाकिस्तान…ये वो बिहारी हैं, पाकिस्तान उन बिहारियों की वजह से वजूद में आया है.”

सैयद एजाज उल हक वायरल वीडियो में आगे कहते दिख रहे हैं, ”आज 50 साल गुजारने के बावजूद बांग्लादेश में, जो पाकिस्तान का नारा लगा रहे हैं, पाकिस्तान जिंदाबाद का ये वो बिहारी हैं. आज आप गाली समझ रहे हैं बिहारी को? आज आप बिहारियों को गैरकानूनी तारिक-ए-वतन कह रहे हैं? आज आप बिहार को, बिहारी लब्ज को गाली बता रहे हैं. आप भूल गए कि ये बिहारी कौन हैं?”

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बंटवारे के वक्त भारत छोड़ कर पाकिस्तान गए पठान की संख्या अच्छी खासी थी. ये काफी संपन्न थे. पाकिस्तान पहुंचकर वो अचानक प्रवासी वो गए. पहचान की संकट उनपर हावी हो गई. यही टीस आजतक इनके औलादों को सताती रहती है. इनमें यूपी और बिहार के पठानों (खां) की संख्या ज्यादा थी.

पाकिस्तान में ‘बिहारी’ मुसलमान हैं कौन?

भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, साल था 1947…बंटवारे के वक्त भारत से पाकिस्तान (पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान दोनों) गए सभी उर्दू या हिन्दी भाषी लोगों को ‘बिहारी’ कहकर पुकारा गया. ये आगे चलकर एक कटाक्ष के रूप में फैल गया. बांग्लादेश बनने के बाद जिन्होंने वहां से पाकिस्तान का रुख किया, उन्हें भी ‘बिहारी‘ कह कर ही संबोधित किया गया.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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