Pakistan Mediating US-Iran Deal: वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच ‘बिचौलिये’ (मीडिएशन) की भूमिका निभा रहा है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर बुधवार को एक हाई-लेवल डेलिगेशन के साथ तेहरान पहुंचे. वहां उन्होंने ईरानी लीडरशिप को वाशिंगटन (अमेरिका) का खास मैसेज दिया. इस दौरे का असली मकसद अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करवाना है.
अब्बास अराघची ने किया स्वागत
ईरान के सरकारी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आर्मी चीफ मुनीर का स्वागत किया. अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि पाकिस्तान इस बातचीत में बहुत मददगार साबित हो रहा है. उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर इस इलाके में शांति और स्थिरता लाना चाहते हैं. अल जजीरा की रिपोर्ट बताती है कि इस्लामाबाद में हुई पिछली बातचीत बेनतीजा रहने के बाद अब दूसरे राउंड की तैयारी की जा रही है.
यूरेनियम फ्रीज पर फंसा पेच: 5 साल या 20 साल?
इस पूरी डील में सबसे बड़ी चुनौती ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को लेकर है. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच इस बात पर बहस चल रही है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) को कितने समय के लिए रोकेगा. जहां एक पक्ष इसे 5 साल के लिए रोकने की बात कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे 20 साल तक खींचना चाहता है. यही वह पॉइंट है जहां अभी तक सहमति नहीं बन पाई है.
440 किलो यूरेनियम का क्या होगा?
एक और बड़ा मुद्दा ईरान के पास मौजूद करीब 440 किलोग्राम ‘अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम’ का है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्टॉक को संभालने के लिए कई ऑप्शन पर चर्चा हो रही है. या तो इस पूरे स्टॉक को किसी तीसरे देश को सौंप दिया जाए या फिर इसकी संवर्धन क्षमता () को कम कर दिया जाए. इन टेक्निकल मुद्दों को सुलझाने के लिए पाकिस्तान बैक-चैनल के जरिए दोनों देशों के संपर्क में है.
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तेहरान के बाद अब वॉशिंगटन जाएंगे आर्मी चीफ मुनीर
पाकिस्तान के सुरक्षा सूत्रों ने अल जजीरा को बताया है कि ईरान का दौरा खत्म करने के बाद आर्मी चीफ आसिम मुनीर सीधे अमेरिका (वाशिंगटन) जा सकते हैं. इस दौरे को ‘डेडलॉक’ तोड़ने की आखिरी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. पाकिस्तानी अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि इस बार न्यूक्लियर मुद्दे पर कोई बड़ा “ब्रेकथ्रू” यानी ठोस नतीजा निकल सकता है, जिससे वेस्ट एशिया में जारी युद्ध जैसे हालात शांत हो सकें.
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