PTI Protest: कंटेनरों से किलाबंदी, इस्लामाबाद-रावलपिंडी में लॉकडाउन! किस बात से डर रहे असीम मुनीर

Pakistan News : पाकिस्तान के इस्लामाबाद और रावलपिंडी में कंटेनरों से घेराबंदी की गई है. JI और PTI के प्रदर्शनों को लेकर सुरक्षा बढ़ी है, जिससे आम जनता और कारोबार पर असर पड़ रहा है.

1,000 से ज्यादा कंटेनरों की किलेबंदी, कई इलाकों में लॉकडाउन जैसा माहौल और सड़कों पर पसरा सन्नाटा...ये तस्वीर है पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और रावलपिंडी की. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो देखकर आपके मन में भी यह सवाल जरूर आएगा कि आखिर पाकिस्तान में ऐसा क्या होने वाला है कि सड़कों को कंटेनरों और लोहे के नुकीले कीलों से घेर दिया गया है?

दरअसल, पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी (JI) और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के लगातार प्रदर्शन होने वाले हैं. इन प्रदर्शनों को देखते हुए शहबाज शरीफ सरकार ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. पाकिस्तान सरकार ने धारा 144 लागू करने के साथ ही कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट और मेट्रो सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई हैं. जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं.

सड़कों पर कंटेनरों की किलेबंदी, कई रास्ते बंद

  • पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और उससे सटे रावलपिंडी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. प्रशासन ने संभावित प्रदर्शनों को देखते हुए शहर के कई प्रमुख रास्तों पर बड़े कंटेनर खड़े किए हैं. खास तौर पर फैजाबाद इंटरचेंज, डी-चौक और राजधानी के रेड जोन की तरफ जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है.
  • पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग मौकों पर राजधानी में सैकड़ों कंटेनरों का इस्तेमाल रास्ते बंद करने के लिए किया गया है.
  • इस्लामाबाद और रावलपिंडी के बीच फैजाबाद इंटरचेंज बेहद अहम रास्ता है, यहां कंटेनर लगाए जाने का सीधा असर दोनों शहरों के बीच आने-जाने वाले लोगों पर पड़ता है. प्रदर्शन के दौरान फैजाबाद से गुजरने वाली दूसरी सड़कों को भी बंद किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी.

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सुरक्षा बलों की तैनाती, कर्मचारियों की छुट्टी रद्द

  • डी-चौक संवेदनशील इलाका है क्योंकि इसके आसपास पाकिस्तान की संसद, प्रधानमंत्री कार्यालय और दूसरे प्रमुख सरकारी संस्थान मौजूद हैं. इसलिए भी इस इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है.
  • प्रदर्शन की आशंका के बीच इस इलाके में पुलिस के साथ रेंजर्स और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ाई गई है. दर्जनों स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की रिपोर्ट सामने आई थी.
  • रिपोर्ट के अनुसार इस्लामाबाद पुलिस ने इमरजेंसी छुट्टी को छोड़कर 5 अक्टूबर तक अपने सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी है. कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि जो कर्मचारी पहले से छुट्टी पर हैं वो जल्द रिपोर्ट करें.

आम लोगों और कारोबार पर पड़ रहा असर

  • सड़कों की इस तरह की घेराबंदी का असर आम लोगों पर पड़ रहा है. आम यात्रियों, कारोबारी वाहनों और रोजाना इस्लामाबाद-रावलपिंडी के बीच सफर करने वाले लोगों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है.
  • सड़कों पर कंटेनरों की किलेबंदी के लिए कमर्शियल कंटेनरों का इस्तेमाल किया गया है. जिसको लेकर 'ऑल पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्ट ओनर्स एसोसिएशन' ने आपत्ति जताई है.

पाकिस्तान में प्रदर्शन और सड़क बंद करने का सिलसिला

  • इस्लामाबाद में राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान कंटेनरों से रास्ते बंद करना कोई नया तरीका नहीं है. इससे पहले जमात-ए-इस्लामी और पीटीआई के प्रदर्शनों के दौरान भी प्रशासन ने डी-चौक, फैजाबाद और रेड जोन की ओर जाने वाले रास्तों को बंद किया था. जुलाई 2024 में जमात-ए-इस्लामी के धरने से पहले डी-चौक के आसपास कंटेनर लगाए गए थे और धारा 144 लागू की गई थी.

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  • हालांकि, सुरक्षा के नाम पर की जा रही किलेबंदी ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी की सामान्य आवाजाही को प्रभावित किया है. प्रशासन का जोर प्रदर्शनकारियों को संवेदनशील सरकारी इलाकों तक पहुंचने से रोकने पर है, जबकि दूसरी ओर सड़क बंद होने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं.

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By गौतम कुमार

गौतम कुमार वर्तमान में प्रभात खबर से जुड़े पत्रकार और लेखक हैं. वे राजनीति, इतिहास, साहित्य, खेल, कानून, लोक संस्कृति और मनोरंजन जैसे विविध विषयों पर लिखते हैं. इसके साथ-साथ  ट्रेंडिंग, यूटिलिटी और वायरल हो रहे जरूरी विषयों पर भी लेखन करते हैं. रिपोर्टिंग या लेखन के दौरान उनका जोर केवल घटनाओं की जानकारी देने पर नहीं, बल्कि उसके पीछे की पृष्ठभूमि, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ और उसके प्रभाव को समझाने पर रहता है.

अपने पत्रकारिता करियर में गौतम कुमार ने RealisticMedia और दैनिक भास्कर जैसे मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर 2 साल से अधिक समय तक काम किया है. पत्रकारिता के अलावा उन्हें डिजिटल कंटेंट लेखन, वीडियो स्क्रिप्टिंग और डिजिटल प्रोडक्शन का अनुभव है.

किताबों, फिल्मों और कहानियों में उनकी विशेष रुचि है. वे मानते हैं कि अच्छी किताब या अच्छी फिल्म मिलने के बाद बाकी दुनिया कुछ देर इंतजार कर सकती है. यही रुचि उनके लेखन में भी दिखाई देती है, जहां वे खबर और घटनाओं के पीछे छिपी कहानी को समझने और पाठकों के सामने उसे सरल और संदर्भपूर्ण तरीके से रखने की कोशिश करते हैं.

गौतम मानते हैं कि किसी विषय पर लोगों की राय और उनका विचार अलग हो सकता है, संभव है नजरिया भी अलग हो, लेकिन सार्थक संवाद की शुरुआत इन्हीं अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने से होती है. इसलिए पाठक अपनी राय, सुझाव और विचार रखने के लिए उनसे सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़ सकते हैं.

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