भारत एक सिग्नेचर से रिलीज कर सकता है, लेकिन हम नहीं… पाकिस्तानी मंत्री ने तेल संकट पर खोली अपने देश की पोल

Pakistan Oil Crisis: होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी ने पाकिस्तान के ऊर्जा प्रबंधन पर बड़ा संकट पैदा कर दिया है. पेट्रोल और डीजल की शॉर्टेज के अलावा बढ़ती कीमतों की वजह से देश में मुश्किल हालात पैदा हो गए. पाकिस्तान के पेट्रोलियम मिनिस्टर ने इन हालातों पर अपने देश की तुलना भारत से करते हुए बड़ा बयान दिया है.

Pakistan Oil Crisis: 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध ने सभी देशों की स्ट्रेटजिक पॉलिसी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. खासकर तेल और गैस जैसे ऊर्जा संसाधनों को लेकर. 4 मार्च के बाद से शुरू हुई होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी ने भारत जैसे बड़े देश के सामने बड़ी मुश्किल पैदा कर दी. हालांकि, भारत ने अब तक इस परिस्थिति को बखूबी संभाला है, लेकिन पाकिस्तान को ऑयल शॉर्टेज सिचुएशन को संभालने के लिए तेल की कीमतें बढ़ाने के अलावा और भी कई उपाय अपनाने पड़े हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच इन हालातों को संभालने को लेकर पाकिस्तान के मंत्री ने बड़ा बयान देते हुए अपने देश के बारे में बड़ा खुलासा किया है. 

पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने ईरान युद्ध के बाद बढ़े ईंधन संकट को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बड़ा अंतर बताया है. एक टीवी चैनल पर टॉक शो के दौरान मलिक ने कहा, ‘पाकिस्तान के पास रणनीतिक तेल भंडार नहीं है. हमारे पास सिर्फ कमर्शियल रिजर्व हैं. हमारे पास 5 से 7 दिन का कच्चा तेल है, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के पास मौजूद रिफाइंड उत्पाद 20-21 दिन तक ही चल सकते हैं. हम भारत जैसे नहीं हैं, जिसके पास 60-70 दिन का भंडार है और जिसे पेन की सिग्नेचर से रिलीज कर सकता है.’

ईरान युद्ध के चलते तेल की कीमतें बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है. मलिक के अनुसार, भारत इस संकट के मुकाबले अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति में है, क्योंकि उसके पास स्ट्रेटजिक ऑयल रिजर्व और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार हैं. इनकी मदद से भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकाबंदी के कारण हुए तेल संकट के प्रभाव को काफी हद तक संभाल लिया.

पाकिस्तान ने कैसे संभाला तेल संकट?

पाकिस्तान ने मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए तेल की कीमतें बढ़ाई, ऑफिस ऑवर्स भी घटाए. इसके साथ ही मलिक ने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सख्त शर्तों को भी जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि बजट के दौरान पाकिस्तान ने IMF और अन्य कर्ज-दाताओं के साथ मिलकर पेट्रोल और डीजल पर लेवी लगाने का फैसला किया ताकि नुकसान को नियंत्रित किया जा सके.

मंत्री के अनुसार, डीजल की कीमतें 3-4 गुना तक बढ़ गईं, तो पाकिस्तान ने डीजल पर लेवी को शून्य करने और पूरा बोझ पेट्रोल पर डालने का फैसला किया. साथ ही मोटरसाइकिल चालकों को टार्गेटेड सब्सिडी देकर उन्हें राहत दी. बाद में IMF के साथ बैकचैनल बातचीत की और उन्हें 80 रुपये प्रति लीटर लेवी घटाने के लिए राजी किया. पाकिस्तान ने पेट्रोल की कीमत में 80 रुपये प्रति लीटर की कटौती करते हुए इसे 378 रुपये प्रति लीटर कर दिया, जो एक समय 458 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई थी. 

भारत सरकार ने कैसे संभाला तेल संकट?

वहीं, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर हैं. भारत ने दोनों ईंधनों पर एक्साइज ड्यूटी में करीब 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर कीमतों को नियंत्रित रखा है. इससे तेल कंपनियों को भी राहत मिली, जो बढ़ती कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं. इसके अलावा, भारत ने अपने बड़े विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल किया, कई देशों से कच्चा तेल आयात किया और अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार व टैक्स नीति के जरिए वैश्विक तेल संकट के असर को कम किया.

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भारत के पास सिर्फ 600 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार ही नहीं हैं, बल्कि तेल के रणनीतिक भंडार भी बनाया है. इससे भारत को अब तक इस संकट से निपटने में मदद मिली है. भारत किसी भी IMF कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, इस वजह से नई दिल्ली को तेल की कीमतें बढ़ने पर टैक्स कम करके खुद को सुरक्षित किया, क्योंकि भारत के पास ऐसा करने के लिए वित्तीय गुंजाइश थी.

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By Anant narayan shukla

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