पाकिस्तान निर्वाचन आयोग ने इमरान खान को कर दिया डिस्क्वालिफाई, तोशखाने से उपहार बेचने का आरोप

पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) ने तोशाखाना मामले में अपने फैसले में शुक्रवार को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ प्रमुख और पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान को अयोग्य घोषित कर दिया और फैसला सुनाया कि वह अब नेशनल असेंबली के सदस्य नहीं हैं.

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को तोशखाना मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अयोग्य करार दिया. सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के सांसदों ने अगस्त में खान के खिलाफ पाकिस्तान निर्वाचन आयोग (ईसीपी) में शिकायत दी थी. इस शिकायत में तोशखाना (देश का भंडार गृह) से रियायती मूल्य पर खरीदे गए उपहारों की बिक्री से हुई आय का खुलासा न करने को लेकर खान को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी. मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सिकंदर सुल्तान राजा की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय पीठ ने इस्लामाबाद स्थित ईसीपी सचिवालय में खान के खिलाफ फैसला सुनाया.

इमरान खान ने तोशखाने से बचे दिया उपहार

पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) ने तोशाखाना मामले में अपने फैसले में शुक्रवार को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ प्रमुख और पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान को अयोग्य घोषित कर दिया और फैसला सुनाया कि वह अब नेशनल असेंबली के सदस्य नहीं हैं. ईसीपी ने कहा कि इमरान खान ने एक झूठा हलफनामा प्रस्तुत किया और भ्रष्ट आचरण में शामिल पाया गया. जियो न्यूज ने बताया कि इससे पहले 19 सितंबर को तोशाखाना मामले की सुनवाई में इमरान खान के वकील अली जफर ने स्वीकार किया था कि उनके मुवक्किल ने 2018-19 के दौरान उन्हें प्राप्त कम से कम चार उपहार बेचे थे. उपहारों को 58 मिलियन रुपये में बेचा गया था और उनकी रसीदें मेरे मुवक्किल द्वारा दाखिल आयकर रिटर्न के साथ संलग्न थीं.

बयानों में छुपाई जानकारी

इस बीच, अगस्त में पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) ने यह दावा करते हुए हलफनामा दायर किया कि खान ने केवल कुछ वस्तुओं के लिए भुगतान किया था जो वह ‘तोशाखाना’ से घर ले गए थे, लेकिन ज्यादातर सामान जो उन्होंने सरकारी खजाने से लिया था, बिना भुगतान किए ऐसा किया गया था. जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, हलफनामें में यह आरोप लगाया गया था कि खान ने अपने द्वारा लिए गए उपहारों का खुलासा नहीं किया और अपने बयानों में जानकारी छुपाई.

15 लाख 40 रुपये में बेची तीन घड़ियां

मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी अधिकारियों द्वारा प्राप्त उपहारों की तुरंत सूचना दी जानी चाहिए, ताकि उनके मूल्य का आकलन किया जा सके. मूल्यांकन किए जाने के बाद ही प्राप्तकर्ता उपहार ले सकता है, यदि वह इसे रखना चाहता है, एक विशिष्ट राशि जमा करने के बाद। ये उपहार या तो तोशाखाना में जमा रहते हैं या नीलाम किए जा सकते हैं और इसके माध्यम से अर्जित धन को राष्ट्रीय खजाने में जमा किया जाना है. मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, पिछले महीने पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री ने सरकारी खजाने से तीन महंगी घड़ियां एक स्थानीय घड़ी डीलर को सामूहिक रूप से 15 लाख 40 हजार पाकिस्तानी रुपये (पीकेआर) से अधिक की बेचीं.

इमरान खान ने सबसे पहले बेच डाली घड़ियां

द न्यूज इंटरनेशनल अखबार ने बताया कि इमरान खान ने कथित तौर पर विदेशी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा उन्हें उपहार में दी गई इन गहना-श्रेणी की घड़ियों से लाखों रुपये कमाए. रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 1.10 करोड़ पाकिस्तानी रुपये से अधिक मूल्य की सबसे महंगी घड़ी को इमरान खान द्वारा उसके मूल्य के 20 प्रतिशत पर रखा गया था. उस समय उनकी पीटीआई सरकार ने नियमों में संशोधन किया और उपहार प्रतिधारण मूल्य को उसके मूल मूल्य के 50 प्रतिशत पर तय किया. पाकिस्तान दैनिक ने दस्तावेजों और बिक्री रसीदों का हवाला देते हुए कहा कि पीटीआई प्रमुख ने पहले घड़ियां बेचीं और फिर प्रत्येक का 20 प्रतिशत सरकारी खजाने में जमा किया. इसमें कहा गया है कि लाखों रुपये के इन उपहारों को तोशाखाना में कभी जमा नहीं किया गया.

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दुबई में बेचा तोशखाने का उपहार

इस साल अप्रैल में पीएम शहबाज शरीफ ने अपने पूर्ववर्ती इमरान खान पर दुबई में 14 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के तोशाखाना उपहार बेचने का आरोप लगाया था. शहबाज ने कहा था कि इमरान खान ने दुबई में 14 करोड़ पाकिस्तानी रुपये में ये उपहार बेचे. उन्होंने कहा कि महंगे उपहारों में हीरे के आभूषण सेट, कंगन और कलाई घड़ी शामिल हैं. शहबाज का रहस्योद्घाटन इस्लामाबाद हाईकोर्ट में दायर तोशाखाना के विवरण की मांग वाली एक याचिका के संबंध में एक सवाल के जवाब में आया, जिस पर तत्कालीन पीएम इमरान खान ने टिप्पणी की थी कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 के अनुसार विवरण का खुलासा नहीं किया जा सकता है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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