ऑपरेशन सिंदूर: महिला पायलट ने उड़ाया था लश्कर का आतंकी ठिकाना, मुरीदके पर Su-30MKI से किया था हमला

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की महिला फाइटर पायलटों ने लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय को निशाना बनाया था. डिस्कवरी चैनल की डॉक्यूमेंट्री में उनकी भूमिका सामने आई है, जिन्होंने Su-30MKI और राफेल विमान उड़ाए.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना की कार्रवाई से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है. लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके स्थित मुख्यालय पर हमला करने वाले भारतीय वायुसेना के स्ट्राइक पैकेज में एक महिला फाइटर पायलट भी शामिल थीं. यह वही ठिकाना था जिसे भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल हाफिज सईद के नेतृत्व वाले आतंकी संगठन का मुख्यालय माना जाता है. उनकी भूमिका अब डिस्कवरी चैनल की डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए सामने आई है, हालांकि सुरक्षा कारणों से उनकी पहचान गुप्त रखी गई है.

मुरीदके स्ट्राइक में शामिल थीं महिला पायलट

द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा सूत्रों ने बताया कि महिला अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर थीं और उस मिशन का हिस्सा थीं, जिसने मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय को निशाना बनाया. रिपोर्ट के मुताबिक, वह Su-30MKI उड़ा रही थीं.  यह दो इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर विमान लंबी दूरी के कई तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है. यह लड़ाकू विमान रैम्पेज और ब्रह्मोस एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल जैसे हथियारों को इस्तेमाल करने में सक्षम है. 

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान करीब 87 घंटे तक चले सैन्य संघर्ष में इन हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि, सूत्रों ने यह बताने से इनकार किया कि मुरिदके पर हमले के लिए इनमें से किस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था. उनका कहना था कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों से जुड़ी जानकारी अभी गोपनीय है.

सिर्फ एक नहीं, कई महिला पायलट थीं मिशन का हिस्सा

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ऑपरेशन सिंदूर में एक से अधिक महिला फाइटर पायलटों ने हिस्सा लिया था.  87 से 88 घंटे चले इस भीषण सैन्य संघर्ष में कुछ महिला पायलटों ने Su-30MKI, जबकि कुछ ने राफेल लड़ाकू विमानों को उड़ाया. कुछ अभियानों में महिला अधिकारी पायलट की भूमिका में थीं, जबकि कुछ मामलों में उन्होंने वेपन सिस्टम ऑपरेटर (WSO) की जिम्मेदारी संभाली.

एक सूत्र ने महिला और पुरुष पायलटों के बीच भूमिका को लेकर कहा, 'एक बार जब वे फाइटर स्ट्रीम में शामिल हो जाते हैं, तो उन्हें सिर्फ फाइटर पायलट के तौर पर देखा जाता है, पुरुष या महिला के रूप में नहीं. दोनों को समान प्रशिक्षण मिलता है और उनकी ऑपरेशनल भूमिकाएं भी समान होती हैं.'

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पहले दिन नौ ठिकानों पर हुआ था हमला

ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ था. 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी. इसके जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसके पहले दिन सेना ने कुल नौ ठिकानों को निशाना बनाया था. 

इनमें से दो महत्वपूर्ण लक्ष्य मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय और बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय थे. इन दोनों ठिकानों पर भारतीय वायुसेना ने कार्रवाई की थी. बाकी सात स्थानों को भारतीय सेना ने लोइटरिंग म्यूनिशन और लंबी दूरी की तोपों के जरिए निशाना बनाया था.

IAF में महिला फाइटर पायलटों की बढ़ती भूमिका

ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायुसेना में महिलाओं की भागीदारी भी साफ की. 2015-16 में महिलाओं को फाइटर एविएशन में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. आज महिला अधिकारी एसयू-30एमकेआई, राफेल, मिग-29 और तेजस जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को ऑपरेट कर रही हैं.

डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री में सैन्य अभियान से जुड़े अधिकारियों के अनुभव भी शामिल हैं. हालांकि मुरिदके मिशन में शामिल पायलटों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उनकी भागीदारी यह दिखाती है कि भारतीय वायुसेना में महिला फाइटर पायलट अब वास्तविक युद्ध अभियानों का भी हिस्सा बन चुकी हैं.

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