नीदरलैंड ने लौटाए 1000 साल पुराने चोल काल के ताम्रपत्र, पीएम मोदी ने कहा भारतीयों के लिए गर्व का पल

Netherlands Returns Chola Plates: औपनिवेशिक काल के दौरान भारत की तमाम विरासत यूरोप के देशों में चली गई थीं. इनमें से कुछ-कुछ समय-समय पर इन देशों द्वारा वापसी की जाती हैं. इसी क्रम में नीदरलैंड ने भारत के चोल काल के ताम्रपत्र लौटाए हैं.

Netherlands Returns Chola Plates: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय अपने पांच देशों के दौरे के दूसरे चरण में नीदरलैंड्स की यात्रा पर हैं. इसी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की विरासत के बारे में एक अहम जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि नीदरलैंड्स के लीडेन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी ने 11वीं सदी की चोल ताम्रपट्टिकाएं भारत सरकार को लौटा दीं. इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी और उनके डच समकक्ष रॉब जेटेन मौजूद रहे.

प्रधानमंत्री मोदी ने इस वापसी को हर भारतीय के लिए गर्व और खुशी का क्षण बताया. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ‘हर भारतीय के लिए यह एक खुशी का पल है! 11वीं सदी की चोल ताम्रपट्टिकाएं नीदरलैंड्स से भारत वापस लाई जा रही हैं. इस समारोह में प्रधानमंत्री मार्क रुट्टे की उपस्थिति में हिस्सा लिया.’ प्रधानमंत्री के साथ फोटो में नीदरलैंड के वर्तमान पीएम रॉब जेटेन मौजूद थे, संभवतः चूक की वजह से जेटेन की जगह रुट्टे का नाम लिख दिया गया.

उन्होंने आगे कहा कि चोल ताम्रपट्टिकाएं 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टिकाओं का संग्रह हैं, जिनमें अधिकांश लेख तमिल भाषा में हैं, जो दुनिया की सबसे सुंदर भाषाओं में से एक है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘ये महान राजेंद्र चोल प्रथम से जुड़ी हैं, जिन्होंने अपने पिता राजा राजराजा प्रथम द्वारा किए गए मौखिक वचन को औपचारिक रूप दिया था. ये पट्टिकाएं चोल साम्राज्य की महानता को भी दर्शाती हैं. भारत में हम सभी चोलों, उनकी संस्कृति और उनकी समुद्री शक्ति पर बेहद गर्व करते हैं.’

उन्होंने नीदरलैंड्स सरकार और विशेष रूप से लीडेन यूनिवर्सिटी का आभार व्यक्त किया, जहां ये ताम्रपट्टिकाएं 19वीं सदी के मध्य से सुरक्षित रखी गई थीं. एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि चोल ताम्रपट्टिकाएं 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की पट्टिकाओं का एक संग्रह हैं, जिन्हें 11वीं शताब्दी ईस्वी में चोल राजाओं द्वारा जारी किया गया था.

इन प्लेटों में किसका जिक्र है?

इन शाही अभिलेखों में तमिलनाडु के नागपट्टिनम स्थित चूलामणिवर्म-विहार नामक बौद्ध विहार को आनैमंगलम गांव दान में देने का औपचारिक उल्लेख है. इन पट्टिकाओं पर तमिल और संस्कृत भाषाओं में लेख अंकित हैं. विज्ञप्ति में कहा गया कि इन चोल ताम्रपट्टिकाओं की वापसी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य कहानी हैं. इनकी स्वदेश वापसी भारत के लोगों के लिए गहरी भावनात्मक महत्व रखती है.

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पीएम मोदी अपने पांच देशों के दौरे पर शुक्रवार को यूएई के बाद नीदरलैंड पहुंचे. इसके बाद पीएम मोदी स्वीडन, नॉर्वे और इटली जाएंगे. 

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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