नेपाल में चुनाव से पहले फिर उठी राजशाही की मांग, किंग को वापस लाने के लिए सड़कों पर उतरे लोग

Nepal Massive Pro-Monarchy Rally: नेपाल में रविवार को अपदस्थ शाही परिवार के समर्थक बड़ी संख्या में काठमांडू में एकत्र हुए और राजशाही की बहाली की मांग को लेकर रैली निकाली. यह सितंबर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के समर्थकों की पहली बड़ी सार्वजनिक रैली थी. सितंबर में जेन जी युवाओं के आंदोलन के बाद बनी अंतरिम सरकार ने मार्च में नए संसदीय चुनाव कराने की घोषणा की थी.

Nepal Massive Pro-Monarchy Rally: एक ओर ईरान में विरोध प्रदर्शन पूरे उफान पर है, जहां रजा पहलवी को लाने की मांग उठ रही है. वहीं भारत के पड़ोस में भी एक बार फिर से राजशाही वापस लेने की मांग उठने लगी है. नेपाल एक बार फिर अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर मंथन के दौर से गुजर रहा है. लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच राजशाही की वापसी की मांग ने राजधानी काठमांडू की सड़कों पर नई बहस छेड़ दी है. मार्च में प्रस्तावित संसदीय चुनावों से पहले यह मुद्दा फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है.

रविवार को नेपाल के अपदस्थ शाही परिवार के समर्थक बड़ी संख्या में काठमांडू में एकत्र हुए और राजशाही की बहाली की मांग को लेकर रैली निकाली. यह सितंबर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के समर्थकों की पहली बड़ी सार्वजनिक रैली थी. सितंबर में जेन जी युवाओं के आंदोलन के बाद बनी अंतरिम सरकार ने मार्च में नए संसदीय चुनाव कराने की घोषणा की थी. रैली में शामिल लोग शाह वंश के संस्थापक, 18वीं सदी के राजा पृथ्वी नारायण शाह की प्रतिमा के पास जुटे और “राजा को वापस लाओ” जैसे नारे लगाए. 

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें इस रैली के आयोजन का दावा किया जा रहा है. हालांकि, प्रभात खबर इसकी सत्यता को पुष्ट नहीं करता. इसमें एक भारी भीड़ शोर मचाते हुए नारेबाजी करती हुई अपनी मांग रख रही है. देखें-

ईरान और नेपाल का अपदस्थ राजतंत्र

उल्लेखनीय है कि शाह वंश के अंतिम राजा ज्ञानेंद्र को 2008 में सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था, जिसके बाद नेपाल एक गणराज्य बना. ठीक वैसे ही जैसे ईरान में 1979 में खोमैनियों ने आंदोलन करके मोहम्मद रजा पहलवी को सत्ता से बेदखल किया था. हालांकि ईरान और नेपाल के आंदोलन में एक स्पष्ट अंतर है, ईरान के आंदोनल ने देश को इस्लामिक रिपब्लिक बनाया, जबकि नेपाल को एक कथित हिंदू राष्ट्र से एक पंथनिरपेक्ष राष्ट्र. हालांकि जेन-जी आंदोलन के बाद, यह नई संवैधानिक व्यवस्था भी नेपाल के नहीं बचा सकी. अब चुनाव की प्रतीक्षा की जा रही है, जिसमें सभी सत्ता से बाहर किए गए दल एकजुट होकर लड़ रहे हैं.

पिछले वर्षों में हिंसक रही है ऐसी रैली

रविवार को राजा पृथ्वी नारायण शाह की जयंती भी थी. बीते वर्षों में इसी मौके पर निकाली गई कई रैलियां हिंसक हुई हैं और पुलिस से झड़पों में जानें भी गई हैं. हालांकि इस बार रैली शांतिपूर्ण रही और दंगा-रोधी पुलिस ने पूरे कार्यक्रम पर कड़ी नजर बनाए रखी. फर्स्ट पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल सम्राट थापा ने कहा कि मौजूदा हालात में देश के लिए राजशाही ही एकमात्र समाधान है. उनके मुताबिक, जेन ज़ेड आंदोलन के बाद नेपाल जिस दिशा में बढ़ा है, उसे संभालने के लिए राजशाही की बहाली जरूरी हो गई है.

आने वाले चुनावों में राजशाही भी एक पक्ष

नेपाल में शाही परिवार को आज भी एक वर्ग का समर्थन हासिल है. वर्तमान में देश की अंतरिम सरकार की कमान पहली महिला प्रधानमंत्री और सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज सुशीला कार्की के हाथों में है. उन्होंने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खराब शासन के खिलाफ हुए युवाओं के आंदोलन के बाद सत्ता संभाली थी. हालांकि, भ्रष्टाचार मामलों में धीमी कार्रवाई को लेकर उनकी सरकार आलोचनाओं के घेरे में भी है.

नेपाल के जेन-जी आंदोलन के कथित सूत्रधारों में से एक काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह भी अपनी भूमिका को बड़ा करने के लिए आगे बढ़ते दिख रहे हैं. उन्होंने रवि लामिछाने की पार्टी से गठबंधन कर खुद को पीएम कैंडिडेट घोषित कर दिया है. बालेन रैपर से राजनेता बने हैं, उनकी आक्रामक छवि लोगों को काफी पसंद आई थी. आंदोलन के बाद कार्यवाहक पीएम बनने के लिए उनका नाम आगे बढ़ा था, हालांकि सुशीला कार्की के नाम पर मुहर लगी. 

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By Anant narayan shukla

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अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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