नेपाल में बाढ़ के बाद हाहाकार: शिविरों में बीमार पड़ रहे बच्चे, पीने के पानी में मिला खतरनाक बैक्टीरिया

नेपाल में 26 अगस्त की भोटेकोशी बाढ़ ने 3,600 से अधिक लोगों को विस्थापित किया है. बाढ़ पीड़ितों के शिविरों में पानी की कमी और साफ-सफाई की दिक्कत से बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं. दूषित पेयजल आपूर्ति से हैजा और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.

Nepal Flood: नेपाल में बीते 26 अगस्त को आई भीषण भोटेकोशी बाढ़ के बाद अब 3,600 से अधिक विस्थापितों पर बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है. बाढ़ प्रभावितों के लिए बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में पानी की भारी किल्लत हो गई है. साफ-सफाई की स्थिति भी ठीक नहीं है. जिस वजह से बच्चे और बुजुर्ग लगातार बीमार पड़ रहे हैं.

द काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, नुवाकोट के पिपलाटार स्थित चंद्रज्योति सेकेंडरी स्कूल में बनाए गए अस्थाई शिविर में रह रहे कई बच्चे वायरल बुखार, उल्टी, सर्दी और दस्त की चपेट में हैं. विस्थापित परिवारों का कहना है कि स्वास्थ्य कैंपों में केवल पैरासिटामोल देकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है, जिससे मरीजों की हालत में सुधार नहीं हो रहा है.

अस्पतालों से टूटा संपर्क

बाढ़ में सड़कें और पुल बह जाने के कारण आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. त्रिशूली अस्पताल के निदेशक डॉ राजेंद्र लामा ने बताया कि मुख्य पुल बहने के कारण महज 5 मिनट की दूरी पर रहने वाले मरीज भी अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. मरीजों को इलाज के लिए निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ रहा है.


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पानी के नमूनों में मिला हानिकारक ई-कोलाई

द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, बाढ़ से क्षेत्र की 55 पेयजल परियोजनाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे करीब 64 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. विदुर नगरपालिका में करीब 30 हजार लोगों को पानी सप्लाई करने वाली मुख्य पाइपलाइन बह चुकी है. नगर पालिका की जांच में पानी के 15 में से 5 नमूनों में 'ई-कोलाई' (E. coli) बैक्टीरिया पाया गया है, जिससे हैजा और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. हालांकि, प्रशासन का दावा है कि स्रोतों में क्लोरीन डालकर पानी को साफ किया जा रहा है.

हजारों बच्चे प्रभावित, मानसिक आघात का खतरा

राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद के अनुसार, शिविरों में 1,233 बच्चे रह रहे हैं, जिनमें से 102 बच्चे ऐसे हैं जिनके माता-पिता या रिश्तेदार लापता हैं. वहीं यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा से करीब 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं.

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और किसी बड़ी महामारी के संकेत नहीं हैं. हालांकि, चिकित्सकों का मानना है कि वायरल बीमारियों के साथ-साथ गंभीर बीमारियों (डायबिटीज, बीपी) के मरीजों की दवाएं छूटने और अपनों को खोने के कारण लोगों में बढ़ा मानसिक तनाव आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती बन सकता है.


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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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