Nepal Flood: नेपाल में एक हफ्ते बाद भी नहीं टला बाढ़ का खतरा, तिब्बत में 21 की मौत, 541 लोग लापता

नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही मचाई है. सुरंगों, नदी घाटियों और मलबे में खोज अभियान जारी है. भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की टीमें बचाव कार्य में मदद कर रही हैं. वहीं तिब्बत में बाढ़ का खतरा बना हुआ है. हिमालयी नदियों और संवेदनशील इलाकों पर भारत-नेपाल में निगरानी बढ़ाई गई है.

Nepal Flood: भोटे कोशी नदी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है. आपदा के एक सप्ताह बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है. नेपाल लाइव के मुताबिक तिब्बत में 21 लोगों की मौत हुई है, जबकि 541 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. प्रभावित क्षेत्र को जोड़ने वाली अहम सड़क को दोबारा खोल दिया गया है.

सुरंगों और मलबे में जारी है तलाश

बचावकर्मी मुश्किल परिस्थितियों के बीच लापता लोगों को खोजने में जुटे हैं. नदी घाटियों, सुरंगों और मलबे से भरे इलाकों में दिन-रात अभियान चलाया जा रहा है. नेपाल सरकार अब राहत और बचाव के साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण की तैयारियों पर भी ध्यान दे रही है. अभियान में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों और हेलीकॉप्टरों को लगाया गया है.

भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की टीमें भी मदद में जुटीं

नेपाल में जारी राहत अभियान में भारत समेत कई देशों की विशेषज्ञ टीमें मदद कर रही हैं. भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की टीमें खास तौर पर बिजली परियोजनाओं से जुड़ी सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के अभियान में सहयोग कर रही हैं. नेपाल सरकार के सामने अब बड़ी चुनौती दुर्गम पहाड़ी इलाकों तक राहत और बचाव दलों को पहुंचाने की है.

हिमालयी नदियों पर क्यों है सबसे ज्यादा नजर?

नेपाल और तिब्बत में आई इस आपदा के बाद हिमालयी नदियों के जलस्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है. विशेषज्ञों के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश, भूस्खलन, ग्लेशियर टूटने और मलबा जमा होने से नदी का प्रवाह अचानक बदल सकता है. भोटे कोशी और त्रिशूली जैसी नदियों में पानी बढ़ने से निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है.

बारिश और पहाड़ी मलबे से बढ़ सकता है खतरा

हिमालयी क्षेत्र में खतरा सिर्फ नदी में पानी बढ़ने तक सीमित नहीं है. भूस्खलन के कारण नदियों का रास्ता बंद हो सकता है और इसके बाद अचानक पानी का दबाव बढ़ने से फ्लैश फ्लड की स्थिति पैदा हो सकती है. फ्लैश फ्लड का मतलब है अचानक आने वाली भयानक बाढ़, जब नदी का पानी तेजी से बढ़कर सब कुछ बहा ले जाता है. ग्लेशियर टूटने या पहाड़ी झीलों के अचानक फटने जैसी घटनाएं भी बड़े इलाके में तबाही मचा सकती हैं. पहाड़ी झीलों के फटने से भी भारी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर बहकर तबाही मचा सकता है.

भारत-नेपाल के बीच पहले से है बाढ़ निगरानी तंत्र

नेपाल की नदियों में आने वाली बाढ़ का असर सीमा के दूसरी तरफ भी पड़ सकता है. इसी वजह से भारत और नेपाल के बीच साझा नदियों को लेकर बाढ़ प्रबंधन और पूर्वानुमान से जुड़े कई संस्थागत तंत्र काम करते हैं. दोनों देशों के बीच जलस्तर, मौसम और बाढ़ के संभावित खतरे से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान पर जोर दिया जाता है.

भारत के लिए क्यों अहम है नेपाल की स्थिति?

नेपाल के पहाड़ी इलाकों में होने वाली भारी बारिश और अचानक बढ़ने वाला नदी प्रवाह निचले क्षेत्रों के लिए चिंता का कारण बन सकता है. खासकर हिमालय से निकलने वाली नदियों में जलस्तर तेजी से बढ़ने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है. ऐसे में नेपाल से मिलने वाले मौसम और नदी जलस्तर के इनपुट पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी है.

एक हफ्ते बाद भी पूरी तरह नहीं टला खतरा

नेपाल में बाढ़ की भयावहता का असर एक सप्ताह बाद भी दिखाई दे रहा है. हजारों लोगों के लापता होने की रिपोर्ट के बीच राहत और खोज अभियान लगातार जारी है. बारिश का मौसम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए नदी प्रणालियों और पहाड़ी इलाकों पर निगरानी बनाए रखना चुनौती बना हुआ है.

हिमालय से लेकर नदी घाटियों तक हाई अलर्ट

नेपाल सरकार के सामने इस समय राहत और बचाव के साथ भविष्य के खतरे से निपटने की भी चुनौती है. बाढ़, भूस्खलन और अचानक बदलते नदी प्रवाह ने साफ कर दिया है कि हिमालयी क्षेत्र में मजबूत चेतावनी प्रणाली और बेहतर आपदा प्रबंधन बेहद जरूरी है. फिलहाल नेपाल और तिब्बत के प्रभावित इलाकों में राहत अभियान जारी है और खतरे को देखते हुए नदी घाटियों तथा संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है.

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By सत्येन्द्र गिरि

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पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

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