नेपाल में बाढ़ का कहर: 1,341 से शव बरामद, मलबे से पटी चिलिमे सुरंग में जिंदगी की तलाश

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 1344 लोगों की जान जा चुकी है. चिलिमे सुरंग में फंसे लोगों को बचाने के लिए भारत और नेपाल की टीमें मिलकर युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं.

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही की ऐसी तस्वीर छोड़ दी है, जिसे देखकर हर कोई सिहर उठा है. पानी, मलबे और कीचड़ में जिंदगी दफन होती जा रही है और मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है.नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 1,341 से शव बरामद हो चुके है, जबकि 4,044 लोग अब भी लापता हैं. ऐसे में साफ है कि जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है और शव बरामद हो रहे हैं, इस विनाशकारी त्रासदी का असली आंकड़ा और भयावह हो सकता है.

दो लोगों को मलबे और तबाही के बीच से बचाया गया

इस भीषण तबाही के बीच, राहत अभियान में कुछ उम्मीद की किरण भी दिखी है. ऊपरी त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना की एक सुरंग (ऑडिट सुरंग) से एक चीनी नागरिक को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिनके चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी. वहीं नुवाकोट के बेत्रावती इलाके में 64 वर्षीय एक महिला को भी बचा लिया गया, जो इस विनाशकारी घटना से बचकर निकलीं.

भारत-नेपाल का संयुक्त बचाव अभियान

चिलिमे सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए भारत और नेपाल की बचाव टीमें मिलकर युद्धस्तर पर अभियान चला रही हैं. भारतीय दूतावास ने बताया कि संयुक्त टीम तमाम मुश्किलों के बावजूद लगातार काम कर रही है.

चिलिमे सुरंग में फंसे लोगों का बचाव

बचाव अभियान का सबसे मुश्किल मोर्चा चिलिमे सुरंग बनी हुई है. सुरंग के अंदर भारी मात्रा में मलबा, पानी और कीचड़ भर गया है. भारत की बचाव टीम नेपाल सेना के साथ मिलकर सुरंग के अंदर रास्ता बनाने में जुटी है.

सुरंग की छत तक पहुंचा मलबा, भारी मशीनरी ले जाने की तैयारी

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि सुरंग के अंदर कुछ हिस्सों में मलबा, पानी और कीचड़ लगभग छत तक पहुंच गया है. बचाव दल पहले इसे हटाने में जुटा है, ताकि भारी मशीनरी को सुरंग के अंदर ज्यादा गहराई तक ले जाया जा सके और बचाव अभियान को तेज किया जा सके.

दुर्गम इलाका बना सबसे बड़ी रुकावट

चिलिमे सुरंग तक भारी मशीनरी पहुंचाना भी आसान नहीं है. पास के स्याफ्रुबेसी से सुरंग के प्रवेश द्वार तक एक एक्सेस रोड बनाने का काम किया जा रहा है. राजदूत नवीन श्रीवास्तव के मुताबिक, इलाका बेहद दुर्गम है और घाटी संकरी होने के कारण हेलीकॉप्टरों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल संभव नहीं है. सड़क बन जाने के बाद खुदाई करने वाली मशीन को सुरंग तक पहुंचाया जा सकेगा.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

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