Nepal Chinese Camera India Border: नेपाल की बालेन शाह सरकार एक ओर भारत से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही है. सत्तारूढ़ पार्टी के चीफ रबी लामिछाने की सफल यात्रा के बाद विदेश मंत्री शिशिर खनाल का दिल्ली दौरा हो रहा है. वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड में भारतीय सीमा से सटे बॉर्डर इलाकों में चीन में बने थर्मल सर्विलांस कैमरे लगा रहा है. दावा किया जा रहा है कि ये उपकरण दिन और रात दोनों समय दूर तक गतिविधियों पर नजर रखने में सक्षम हैं. लेकिन चीन में बने इन उपकरणों से भारत की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.
एक राष्ट्रीय मीडिया संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल द्वारा लगाए जा रहे इन थर्मल कैमरों से की जाने वाली निगरानी नेटवर्क को संचालित करने के लिए चीनी कम्यूनिकेशन और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया जा सकता है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इनकी पहुंच भारतीय क्षेत्र के भीतर करीब 10 किलोमीटर तक हो सकती है.
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अगर संवेदनशील सूचनाएं चीनी सर्वरों तक पहुंचती हैं तो इससे भारत की सीमा सुरक्षा पर गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं. हालांकि, इन कैमरों की वास्तविक क्षमता और इनके संचालन तंत्र को लेकर अभी तक भारत या नेपाल की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
2016 से शुरू हुई थी तकनीकी सहयोग की प्रक्रिया
नेपाल और चीन के बीच सीमा निगरानी से जुड़ी तकनीकी साझेदारी की नींव वर्ष 2016 में रखी गई थी. दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को लेकर समझौते हुए थे. इसके बाद वर्ष 2019 में निगरानी प्रणाली से जुड़े सर्वेक्षणों और तकनीकी अध्ययनों के लिए वित्तीय मंजूरी दी गई. इसी दौरान झूलाघाट समेत कई सीमावर्ती स्थानों का सर्वे किया गया, जहां बाद में निगरानी उपकरण लगाने की योजना बनाई गई.
इसके बाद नेपाल ने भारत से लगने वाली अपनी सीमा पर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने शुरू किए. हाल के वर्षों में सीमा क्षेत्र में नए बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) बनाए गए और आधुनिक निगरानी उपकरणों की तैनाती की प्रक्रिया तेज हुई. अब इसी कड़ी में चीन में बने नाइट विजन थर्मल कैमरे लगाए जा रहे हैं.
किन क्षेत्रों से गुजरती है भारत-नेपाल सीमा?
उत्तराखंड में भारत और नेपाल के बीच लगभग 275 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है. इस सीमा की सुरक्षा भारत की ओर से सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और नेपाल की ओर से आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) संभालती है. भारत में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के झूलाघाट और धारचूला, चंपावत तथा ऊधमसिंह नगर जैसे इलाके इस सीमा क्षेत्र का हिस्सा हैं और निगरानी व्यवस्था की पहुंच में बताए जा रहे हैं.
दूसरी ओर नेपाल में दार्चुला, बैतड़ी, डडेलधुरा और कंचनपुर जिले इस सीमा से जुड़े हुए हैं. सीमा का यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां लोगों और सामान की आवाजाही के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी गतिविधियां भी लगातार होती रहती हैं.
कालापानी विवाद के बाद तेज हुआ सीमा ढांचे का विस्तार
विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2020 में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर भारत-नेपाल के बीच उत्पन्न विवाद के बाद नेपाल ने सीमा क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया.
रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल ने छांगरू क्षेत्र के पास सशस्त्र पुलिस बल की एक बटालियन का मुख्यालय स्थापित किया. इसके अलावा 15 से अधिक सीमा चौकियां विकसित की गईं और कई चौकियों को आधुनिक निगरानी तकनीकों से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई. इन्हीं परियोजनाओं के तहत थर्मल कैमरों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणालियों की तैनाती को आगे बढ़ाया गया.
भारत ने भी बढ़ाई निगरानी
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी सीमा पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया है. इसके तहत प्रमुख सीमा पार बिंदुओं पर डिजिटल रिकॉर्डिंग सिस्टम लगाए गए हैं. सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त गश्त बढ़ाई गई है. झूलाघाट और धारचूला जैसे प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर आधुनिक स्क्रीनिंग उपकरण भी तैनात किए गए हैं.
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सीमा पार गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और तकनीकी संसाधनों का उपयोग बढ़ा रही हैं. अब सीमा पार करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है. वैध पहचान पत्र दिखाने और आवश्यक स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी किए बिना किसी को भी सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है. इसके साथ ही एसएसबी और स्थानीय पुलिस ने संवेदनशील इलाकों तथा झूलापुलों पर चौबीसों घंटे गश्त बढ़ा दी है.
बॉर्डर संबंधी बयानबाजी ने बढ़ाई भारत की चिंता
पिछले कई सालों में नेपाल की राजनीति में भी सीमा संबंधी मुद्दों को लेकर बयानबाजी देखने को मिली है. पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली हों या नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह. लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा का मुद्दा आए दिन उठता रहता है. हालांकि, बालेन के एक हालिया बयान ने तो और विवाद खड़ा कर दिया.
बालेन शाह ने सार्वजनिक रूप से कहा कि नेपाल ने कुछ भारतीय क्षेत्रों पर कब्जा कर रखा है. इस पर उनका भारी विरोध हुआ, तो नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सफाई जारी की और कहा कि वह बॉर्डर पिलर न होने की वजह से होने वाले समस्या की बात कर रहे थे. नेपाल का पीएम बनने से पहले वह काठमांडू के मेयर थे. अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपने ऑफिस में हिमाचल के कांगड़ा और पश्चिम बंगाल के भी कुछ इलाकों को अपने ‘ग्रेटर नेपाल वाले मैप’ में शामिल किया था.
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रिश्ते सुधारने की कोशिश जारी
हालांकि, बालेन शाह के भारत के इलाके पर कब्जे वाले बयान के अगले ही दिन उनकी पार्टी के चीफ रबी लामिछाने भारत आए. यह उनका आधिकारिक दौरा नहीं था. वह भारतीय जनता पार्टी के बुलावे पर भारत आए थे. उन्होंने भाजपा के मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर से भी मुलाकात की.
इसके तुरंत बाद नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल भी भारत आए. खबर लिखे जाने तक वह भारत में ही हैं. उन्होंने भारत के साथ कई महत्वपूर्ण समझौते किए हैं. इसमें दोनों देशों के बीच डिजिटल पेमेंट सिस्टम को सुधारने, हेल्थ सेक्टर, लोगों के बीच कनेक्टिविटी और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी कई समझौते हुए हैं.
उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत सिर्फ नक्शे पर खींची गई राजनीतिक रेखाओं से जुड़े पड़ोसी नहीं हैं. हम एक ही नदियों, एक ही पहाड़ों और एक ही प्राचीन ज्ञान की संतान हैं. लेकिन इन बयानों और समझौतों के बावजूद नेपाल द्वारा सीमा पर चीन निर्मित थर्मल सर्विलांस कैमरे लगाना और इसके लिए चीनी संचार और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर इस्तेमाल करने की संभावना दोनों देशों के बीच आने वाले दिनों में खटास पैदा कर सकती है.
