नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ के पीड़ितों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाना अब भारी पड़ सकता है. पीड़ितों के खिलाफ गाली, अपमानजनक और मजाक उड़ाने वालों पर सरकार ने सख्त कार्रवाई का फैसला किया है. द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, नेपाल के साइबर ब्यूरो ने ऐसे सोशल मीडिया यूजर्स की पहचान और जांच के लिए 10 सदस्यीय टीम बनाई है. कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 1 लाख नेपाली रुपये तक का जुर्माना, 5 साल तक की जेल या दोनों सजा हो सकती है, जबकि दोबारा अपराध करने वालों के लिए और कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है.
लापता परिजनों की तलाश में सोशल मीडिया पर दर्द भरी पुकार
26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद कई परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में सोशल मीडिया का सहारा ले रहे थे. लोगों ने पोस्ट और वीडियो के जरिए सरकार तथा आम लोगों से मदद की अपील की. लेकिन इन पोस्ट पर कुछ यूजर्स ने बेहद आपत्तिजनक, अपमानजनक और संवेदनहीन टिप्पणियां कर दीं. इसके बाद लोगों ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान इस ओर खींचा.
पीड़ितों का मजाक उड़ाने वालों पर कार्रवाई
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने शनिवार को फेसबुक पोस्ट के जरिए ऐसे लोगों को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि आपदा के बाद दर्द झेल रहे लोगों का मजाक उड़ाने या उन्हें और परेशान करने वालों के खिलाफ सरकार कोई नरमी नहीं बरतेगी. प्रधानमंत्री की चेतावनी के तुरंत बाद साइबर ब्यूरो ने मामले की जांच शुरू कर दी.
ऑनलाइन गाली-गलौज पर 5 साल तक की सजा
नेपाल के कानून में ऑनलाइन दुर्व्यवहार के कुछ मामलों में जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है. इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शंस एक्ट, 2008 की धारा 47 के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ऐसी सामग्री प्रकाशित या प्रदर्शित करना प्रतिबंधित है, जो नफरत या दुश्मनी को बढ़ावा देती हो, जातीय या धार्मिक समुदायों के बीच संबंधों को बिगाड़ती हो या किसी व्यक्ति को परेशान, अपमानित करने अथवा अश्लील व्यवहार से जुड़ी हो.
जातीय तनाव भड़काने वाली टिप्पणी पर एक व्यक्ति गिरफ्तार
साइबर ब्यूरो ने भोटेकोशी आपदा के संबंध में जातीय तनाव भड़काने वाली टिप्पणियां करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया है. साइबर ब्यूरो ने शनिवार को काठमांडू में बैतड़ी निवासी बीरेंद्र मदई को गिरफ्तार किया. आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर बाढ़ प्रभावित लोगों की जातीय पहचान को लेकर टिप्पणियां की थीं.
शिकायत न होने पर भी पुलिस कर सकती है कार्रवाई
साइबर ब्यूरो के प्रवक्ता दिलीप कुमार गिरी ने स्पष्ट किया कि पीड़ित की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं होने के बावजूद पुलिस कार्रवाई कर सकती है. यदि पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं तो वह आपत्तिजनक टिप्पणियों के संबंध में सबूत जुटाकर जांच आगे बढ़ा सकती है और कानूनी कार्रवाई कर सकती है.
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