Nepal Flood Rescue: बाढ़ में फंसे जुड़वां बच्चों के लिए फरिश्ता बनी नेपाल सेना, महिला जवानों ने ममता की थपकी से शांत कराया

नेपाल में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में सेना के जवानों ने इंसानियत की मिसाल प्रस्तुत की. सेना के जवानों ने दो मासूम जुड़वां बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. रेस्क्यू के बाद जब बच्चे अपनी मां के लिए रोने लगे, तो महिला जवानों ने उन्हें गोद में उठाकर थपकी देकर शांत कराया.

नेपाल में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान के दौरान नेपाल सेना के जवानों ने इंसानियत और संवेदनशीलता की मिसाल पेश की. राहत अभियान के दौरान सेना के जवानों ने दो मासूम जुड़वां बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. रेस्क्यू के बाद जब बच्चे अपनी मां के लिए रोने लगे, तो महिला जवानों ने उन्हें अपने सीने से लगाकर ममता और स्नेह के साथ शांत कराया.

ममता की थपकी से शांत हुए मासूम

जुड़वां बच्चों को बचाने के साथ ही जवानों का मानवीय और संवेदनशील चेहरा भी सामने आया. मां से अलग होने के कारण बच्चे लगातार रो रहे थे. ऐसे में महिला जवानों ने उन्हें अपनी गोद में लिया, प्यार से थपकी दी और अपने सीने से लगाकर उन्हें शांत करने की कोशिश की. आपदा के बीच जवानों का यह ममत्व बच्चों के लिए भावनात्मक सहारा बन गया.

जवानों की संवेदनशीलता ने जीता दिल

बाढ़ जैसी मुश्किल परिस्थिति में जहां सेना के जवान लोगों की जान बचाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं, वहीं बच्चों के प्रति उनका स्नेह और अपनापन भी देखने को मिला. जुड़वां बच्चों को संभालती महिला जवानों की तस्वीरें राहत अभियान के मानवीय पक्ष को सामने लाती हैं. इन तस्वीरों में वर्दी के पीछे छिपी इंसानियत और ममता साफ नजर आती है.

राहत अभियान के साथ भावनात्मक सहारा भी

नेपाल के कई बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है. सेना के जवान प्रभावित लोगों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद कर रहे हैं. इस मुश्किल घड़ी में जवान केवल लोगों की जान ही नहीं बचा रहे, बल्कि जरूरतमंदों को भावनात्मक सहारा भी दे रहे हैं. जुड़वां बच्चों को ममता से संभालती महिला जवानों की तस्वीरें इसी संवेदनशीलता और इंसानियत की एक भावुक मिसाल पेश करती हैं.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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