Photo Story: तुर्की में विनाशकारी भूकंप से 35000 से ज्यादा मौत, 2 हजार साल पुराना गैजियांटेप कैसल में भी दरार

तुर्की और सीरिया में भूकंप के झटकों ने भयानक तबाही मचाई है. प्रभावित इलाकों में हर ओर बिल्डिंग के मलबे नजर आ रहे हैं. हजारों इमारत जमींदोज हो गई है. हजारों लोग मलबे के नीचे दबकर अपनी जान गंवा चुके हैं, और यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है.

तुर्की और सीरिया में भूकंप के झटकों ने भयानक तबाही मचाई है. प्रभावित इलाकों में हर ओर बिल्डिंग के मलबे नजर आ रहे हैं. हजारों इमारत जमींदोज हो गई है. हजारों लोग मलबे के नीचे दबकर अपनी जान गंवा चुके हैं, और यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है.

तुर्की में आये विनाशकारी भूकंप से रोमन साम्राज्य का 2000 साल पुराना गैजियांटेप कैसल कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो गया है. कई जगहों पर दरार नजर आने लगी है.

2000 साल पुराना गैजियांटेप कैसल कई जगहों से टूट गया है. इस ऐतिहासिक इमारत की ईंटे कई जगहों से सरक गई है. दीवारों में गड्ढा बन गया है. जिसपर लगे ईंट निकल गई है.

गैजियांटेप कैसल कई जगहों से टूट गया है. इतने बड़े भूकंप के कारण प्रभावित इलाकों की सैकड़ों बिल्डिंग जमींदोज हो गई है. गैजियांटेप कैसल पूरी तरह से तो नहीं गिरा लेकिन कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो गया है.

तुर्की-सीरिया में आए भूकंप में के कारण मरने वालों की संख्या 35 हजार के पार पहुंच गई है.

भूकंप प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है. लेकिन इसके काफी परेशानी आ रही है. मलबा जैसे जैसे हट रहा है उसमे से शव निकल रहे हैं.

तुर्की और सीरिया में भूकंप के कारण सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. शहर के अस्पताल घायलों से पटे पड़े हैं. 35 हजार से ज्यादा लोगों की इस विनाशकारी भूकंप में मौत हो चुकी है. जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है शवों की संख्या में इजाफा हो रहा है.

तुर्की और सीरिय की मुसीबत की इस घड़ी में पूरी दुनिया से मदद आ रही है. भारत समेत दुनिया के कई देशों ने प्रभावित इलाकों में मदद मुहैया करा रहे हैं. खाने पीने के सामान, दवा, मशीन और उपकरण समेत दुनिया के देश अन्य मदद दे रहे हैं.

भारत की ओर से भी तुर्की और सीरिया को हर संभव मदद भेजी जा रही है. विनाशकारी भूकंप के बाद वहां के लोगों को सहायता मुहैया कराने के लिये भारत ऑपरेशन दोस्त के तहत राहत सामग्री भेज रहा है. तुर्की में 7.8 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था.

तुर्की में आया विनाशकारी भूकंप इतना भयानक था कि इसके झटके काहिरा तक महसूस किए थे. 7.8 तीव्रता के इस जलजले का केंद्र तुर्की के दक्षिणपूर्वी प्रांत कहारनमारस में था. बड़ी-बड़ी बिल्डिंग ताश के पत्ते की तरह गिर गए.

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Author: Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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