Middle East Crisis: चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग ने कहा कि मिडिल ईस्ट और खाड़ी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए. चीन ने कहा कि सभी देशों के लोगों, संस्थानों और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा तय की जानी चाहिए. शी जिनपिंग ने क्षेत्र में साझा, व्यापक और टिकाऊ सुरक्षा ढांचा बनाने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि लंबे समय तक शांति बनी रहे. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन जरूरी है, ताकि दुनिया अराजकता की ओर न बढ़े. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच चीन की ओर से यह रिएक्शन आया है. चीन पहले भी हिंसा खत्म करने और बातचीत से समाधान की अपील करता रहा है.
ड्रैगन ने मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करने के लिए 4-पॉइंट पीस प्लान पेश किया है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ एक बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की है. चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार (14 अप्रैल) को बताया कि यह प्रस्ताव शांतिपूर्ण, सह-अस्तित्व और संप्रभुता के सिद्धांतों पर आधारित है. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता के लिए चार प्रस्ताव रखे हैं, जिससे मिडिला ईस्ट में संघर्ष कम करने और लंबे समय तक शांति स्थापित करने में मदद मिल सकती है. चीन के चार प्रस्ताव में…
- युद्धविराम और हिंसा रोकने पर जोर
- सभी पक्षों के बीच बातचीत और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता
- मानवीय सहायता को बिना किसी बाधा के प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की अपील.
- क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर बल
चीन ने दिया मजबूत रिश्तों पर जोर
चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग ने कहा कि मिडिल ईस्ट के खाड़ी देश चीन के करीबी पड़ोसी हैं, इसलिए उनसे दूरी नहीं बनाई जा सकती. उन्होंने कहा कि इन देशों के साथ रिश्ते मजबूत करना, उनका समर्थन करना और मिलकर एक ऐसा सुरक्षा ढांचा बनाना जरूरी है जो सहयोग पर आधारित और लंबे समय तक टिकने वाला हो.
शी ने सभी देशों से संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों और सिद्धांतों का पालन करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि हर देश को अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए. साथ ही दुनिया की व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में ही मजबूत रहनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि देशों को विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहिए, तभी स्थिरता और शांति कायम रह सकती है.
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