Watch Video: मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान में क्यों बनवाई सड़कें? मौत पर क्यों रोने लगे चकवाल के लोग, जानिए पूरा मामला

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान में क्यों बनवाईं सड़कें? सोलर स्ट्रीट लाइट और मस्जिदों में सोलर वॉटर हीटर की सुविधाएं क्यों दीं? उनकी मौत की खबर सुनते ही गाह गांव के लोग क्यों रोने लगे? जानिए पूरा मामला


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल जिले के गाह गांव में हुआ था. विभाजन के समय उनका परिवार भारत आ गया था. प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनके पैतृक गांव के लोगों के बीच उनके प्रति खास लगाव बना रहा.

PM बनने के बाद गाह गांव की बदलने लगी तस्वीर

2004 में मनमोहन सिंह के भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने गाह गांव के विकास को भारत-पाकिस्तान सद्भावना से जोड़ते हुए वहां विकास परियोजनाएं शुरू कराईं. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने गांव तक पक्की सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र समेत कई परियोजनाओं पर काम किया.

गांव में सोलर लाइट से लेकर गर्म पानी तक की सुविधा

रिपोर्टों के मुताबिक भारत की ओर से गाह में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई थीं और उन परिवारों को भी सोलर लाइट उपलब्ध कराई गई थी, जिनके घरों में बिजली की सुविधा नहीं थी. गांव की मस्जिद में पानी गर्म करने के लिए सोलर वॉटर हीटर भी लगाया गया था. बाद की रिपोर्टों में तीन मस्जिदों में गीजर लगाए जाने का भी उल्लेख मिलता है.

मनमोहन सिंह के निधन पर गम में डूब गया गाह

दिसंबर 2024 में मनमोहन सिंह के निधन के बाद गाह गांव में लोगों ने उन्हें याद किया. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक गांव के लोगों ने एक जगह जुटकर उनके निधन पर शोक जताया. उनके बचपन के दोस्त और गांव के लोग उन्हें आज भी ‘मोहना’ और ‘गांव का बेटा’ कहकर याद करते हैं.

क्यों नहीं लौट पाए अपने पैतृक गांव?

मनमोहन सिंह को पाकिस्तान के कई नेताओं ने अपने पैतृक गांव आने का न्योता दिया था, लेकिन वह गाह नहीं जा सके. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, विभाजन की हिंसा में उनके दादा की हत्या हुई थी और उन घटनाओं की यादें उनके लिए बेहद कड़वी थीं. यही वजह बताई जाती है कि प्रधानमंत्री रहते हुए भी वह अपने जन्मस्थान की यात्रा नहीं कर पाए.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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