जमीन से निकला 1700 साल पुराना खजाना, खुदाई में मिले 141 सोने के सिक्के, एक टुकड़े से शुरू हुई थी जांच

Roman Gold Coins Discovery: लक्जमबर्ग में पुरातत्वविदों को 1700 साल पुराने रोमन सोने के 141 सिक्कों का खजाना मिला है. होल्जथुम गांव के पास मिली इस खोज में दुर्लभ सम्राट यूजीनियस के सिक्के भी शामिल हैं, जो रोमन साम्राज्य के अंतिम दौर की कहानी बयां करते हैं.

Roman Gold Coins Discovery: यूरोप के एक छोटे से देश लक्जमबर्ग के एक शांत ग्रामीण इलाके में जमीन के नीचे छिपा 1700 साल पुराना रहस्य अब इतिहास की नई परतें खोल रहा है. उत्तरी लक्जमबर्ग के होल्जथुम गांव के पास शुरुआत में पुरातत्वविदों को मिट्टी के नीचे धातु का एक छोटा टुकड़ा मिला था. पहली नजर में यह सामान्य वस्तु लग रही थी, लेकिन बाद की जांच में पता चला कि यह एक बहुत बड़े ऐतिहासिक खजाने का हिस्सा है. धीरे-धीरे खुदाई आगे बढ़ी और जमीन के नीचे से रोमन काल के सोने के सिक्कों का एक बड़ा भंडार सामने आया. 

माना जा रहा है कि ये सिक्के करीब 1700 साल से जमीन के भीतर सुरक्षित पड़े थे. होल्जथुम गांव के पास मिले रोमन काल के सोने के सिक्कों के विशाल खजाने ने पुरातत्वविदों को चौंका दिया है. इस खोज को रोमन साम्राज्य के अंतिम दौर की महत्वपूर्ण खोजों में गिना जा रहा है. पुरातत्व विभाग की टीम को खुदाई के दौरान 4.5 ग्राम के कुल 141 रोमन गोल्ड कॉइन यानी ‘सोलिडी’ मिले. ये सिक्के 364 और 408 ईस्वी के बीच ढाले गए थे. इन पर 9 सम्राटों के चित्र अंकित हैं.

ये सिक्के चौथी और पांचवीं शताब्दी के बीच के बताए जा रहे हैं, जब रोमन साम्राज्य का पश्चिमी हिस्सा लगातार कमजोर हो रहा था. सबसे खास बात यह रही कि सिक्के बिखरे हुए नहीं थे, बल्कि एक जगह सुरक्षित तरीके से रखे गए थे. इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि किसी संकट या अस्थिरता के दौर में इन्हें जानबूझकर छिपाया गया होगा.

एक सिक्के से शुरू हुई पूरी जांच

इस ऐतिहासिक खोज की शुरुआत साल 2019 में हुई थी, जब कुछ शौकिया पुरातत्व खोजकर्ताओं को खेत में एक सोने का सिक्का मिला. उस एक सिक्के ने अधिकारियों का ध्यान खींचा और इसके बाद पूरे इलाके में आधिकारिक जांच 2020 में शुरू की गई. अगले चार साल बड़े स्तर पर खुदाई अभियान चलाया गया, जिसमें यह विशाल रोमन खजाना सामने आया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सिक्कों की अनुमानित कीमत लाखों यूरो आंकी गई है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इनकी ऐतिहासिक अहमियत पैसों से कहीं ज्यादा बड़ी है.

कई रोमन सम्राटों के मिले निशान

इन सिक्कों पर अलग-अलग कुल 9 रोमन सम्राटों की तस्वीरें बनी हुई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे उस दौर की राजनीतिक अस्थिरता का अंदाजा मिलता है, जब सत्ता लगातार बदल रही थी और साम्राज्य के भीतर संघर्ष बढ़ रहा था. इतिहासकारों के मुताबिक, उस समय पुराने रोमन साम्राज्य की सीमाएं कमजोर पड़ने लगी थीं और सीमावर्ती इलाकों में असुरक्षा का माहौल था. संभव है कि इसी वजह से इस खजाने को जमीन में छिपा दिया गया हो.

सम्राट यूजीनियस के दुर्लभ सिक्कों ने बढ़ाई अहमियत

खजाने में कुछ ऐसे सिक्के भी मिले हैं, जिन पर रोमन शासक यूजीनियस की तस्वीर बनी हुई है. यूजीनियस का शासन बहुत कम समय तक चला था और उनका दौर राजनीतिक संघर्षों से भरा रहा. माना जाता है कि 390 के दशक में उनका शासन केवल दो वर्षों (392-394 ईस्वी) तक ही टिक पाया था. इसी वजह से उनके नाम वाले सिक्के बेहद दुर्लभ माने जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इतने अच्छे संरक्षण के साथ यूजीनियस के सिक्कों का मिलना इस खोज को और भी महत्वपूर्ण बना देता है.

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कहानी सम्राट यूजीनियस की

यूजीनियस का शासन ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल पाया और उनका दौर राजनीतिक अस्थिरता से भरा रहा. सम्राट वैलेंटिनियन द्वितीय की संदिग्ध मौत के बाद प्रभावशाली सैन्य कमांडर अर्बोगास्ट ने यूजीनियस को पश्चिमी रोमन साम्राज्य की सत्ता सौंप दी थी. सत्ता में आने के बाद यूजीनियस ने पारंपरिक रोमन धार्मिक मान्यताओं और मूर्तिपूजक रीति-रिवाजों को फिर से बढ़ावा देने की कोशिश की. 

इसी वजह से पश्चिमी रोमन साम्राज्य के कुछ प्रभावशाली कुलीन वर्ग का समर्थन भी उन्हें मिला. लेकिन पूर्वी रोमन सम्राट ईसाई थियोडोसियस प्रथम ने उनके शासन को स्वीकार नहीं किया. थियोडोसियस प्रथम ने यूजीनियस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जिसके बाद 394 ईस्वी में फ्रिगिडस का ऐतिहासिक युद्ध हुआ. इस लड़ाई में यूजीनियस की सेना पराजित हो गई और बाद में उन्हें पकड़कर मौत की सजा दे दी गई.

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खजाने के पास मिला रोमन सुरक्षा टॉवर

जिस जगह यह खजाना मिला, उसके पास एक प्राचीन रोमन सुरक्षा टॉवर के अवशेष भी मिले हैं. माना जा रहा है कि यह चौकी रोमन साम्राज्य की उत्तरी सीमा की निगरानी के लिए बनाई गई थी. उस दौर में यह इलाका रोमन प्रांत गैलिया बेल्जिका का हिस्सा था. यह व्यापार, सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक संघर्षों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था. पुरातत्वविदों को इलाके में कुछ कब्रों के अवशेष भी मिले हैं. इससे संकेत मिलता है कि यह केवल सैन्य चौकी नहीं थी, बल्कि यहां एक बस्ती भी मौजूद रही होगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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