5 साल में पांचवां पीएम! कीर स्टार्मर जल्द दे सकते हैं इस्तीफा; ‘किंग ऑफ नॉर्थ’ बनेंगे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री?

ब्रिटेन की राजनीति में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. वर्तमान प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सोमवार को अपने इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं. एंडी बर्नहम की बायलेक्शन जीत ने कीर स्टार्मर के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ के नाम से मशहूर बर्नहैम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में उभर रहे हैं.

Keir Starmer Andy Burnham Britain PM: ब्रिटेन की राजनीति में एक बायलेक्शन ने बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. लेबर पार्टी के नेता एंडी बर्नहैम की जीत ने न सिर्फ उन्हें संसद तक पहुंचा दिया है, बल्कि अब प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व को भी चुनौती मिलने की संभावना बढ़ गई है. माना जा रहा है कि यह जीत ब्रिटेन की राजनीति की दिशा बदलने वाली साबित हो सकती है. एंडी बर्नहैम को उनके समर्थक प्यार से ‘किंग ऑफ नॉर्थ’ कहते हैं. उनकी यह जीत सिर्फ एक सांसद के चुने जाने तक सीमित नहीं है. यह लेबर पार्टी के भविष्य, कीर स्टार्मर के नेतृत्व और 2029 में होने वाले आम चुनाव की रणनीति से जुड़ी हुई मानी जा रही है.

कौन हैं एंडी बर्नहैम और क्यों बढ़ा उनका कद?

सांसद बनने से पहले 56 वर्षीय एंडी बर्नहैम ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर थे. मेयर के तौर पर उनके काम ने लेबर पार्टी के कई समर्थकों को उस दौर में भरोसा दिया, जब ब्रिटेन में लंबे समय तक कंजर्वेटिव पार्टी की सरकार रही और कीर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर भी पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा था.

उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड की राजनीति में मजबूत पकड़ के कारण बर्नहैम को कई लोग प्यार से ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ यानी उत्तर का राजा कहते हैं. ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ नाम को लोकप्रिय टीवी सीरीज गेम ऑफ थ्रोन्स के ‘किंग इन द नॉर्थ’ किरदार से भी जोड़कर देखा जाता है, जहां यह उत्तर के शासक के लिए इस्तेमाल होता था. 

द कन्वर्सेशन की रिपोर्ट के मुताबिकस, बर्नहैम लंबे समय से लेबर पार्टी के नेतृत्व के संभावित दावेदारों में शामिल रहे हैं. खुद कीर स्टार्मर भी उनकी लोकप्रियता से वाकिफ थे. इसी वजह से स्टार्मर ने मार्च में उन्हें एक बायलेक्शन लड़ने से रोक दिया था.

लेकिन मई में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में लेबर पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे. इसी बीच बर्नहैम के समर्थकों ने रणनीति बनाई और मैनचेस्टर के पास मेकरफील्ड सीट से मौजूदा लेबर सांसद के हटने के बाद बर्नहैम के चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हुआ. बायलेक्शन जीतने के बाद अब वह संसद पहुंच चुके हैं और इससे उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए नेतृत्व चुनौती देने का मौका मिल गया है.

कीर स्टार्मर दे सकते हैं इस्तीफा!

ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार द ऑब्जर्वर ने लेबर पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि स्टार्मर के लिए अब पद पर बने रहना मुश्किल होता जा रहा है. बताया जा रहा है कि पिछले कई महीनों से पार्टी के अंदर ही उनके नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ रहा था, शुक्रवार को उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी एंडी बर्नहैम की जीत ने और बढ़ा दिया है. 

रिपोर्ट के अनुसार, कीर स्टार्मर इस समय अपने आधिकारिक ग्रामीण आवास चेकर्स में हैं, जहां वह अपनी पत्नी के साथ अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा कर रहे हैं. लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि सोमवार तक यह साफ हो सकता है कि स्टार्मर अपने पद पर बने रहेंगे या कोई बड़ा फैसला लेंगे. 

बताया जा रहा है कि स्टार्मर ने कैबिनेट मंत्रियों, राजनीतिक सलाहकारों, पार्टी के आर्थिक सहयोगियों और ट्रेड यूनियन नेताओं से बातचीत के बाद यह महसूस किया है कि प्रधानमंत्री पद पर बने रहना अब उनके लिए आसान नहीं है.

कैबिनेट से हाल ही में हुए इस्तीफे

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार से हाल के दिनों में कई बड़े इस्तीफे हुए हैं, जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं. इनमें 12 मई 2026  को आवास मंत्री मियाट्टा फाहनबुले और 14 मई 2026 को स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग के इस्तीफे शामिल हैं. 

इसके अलावा 11 जून 2026 को ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने सैन्य बजट और रक्षा खर्च को लेकर सरकार से मतभेद के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे के कुछ ही समय बाद सशस्त्र बल मंत्री अल कार्न्स ने भी रक्षा निवेश योजना को लेकर असहमति जताते हुए पद छोड़ दिया.

एंडी बर्नहैम की इस जीत के बाद उनके लिए पार्टी के अंदर, स्टार्मर के खिलाफ औपचारिक नेतृत्व चुनौती पेश करने का रास्ता आसान हो गया है. हालांकि, बर्नहैम ने अभी तक सीधे तौर पर स्टार्मर को चुनौती नहीं दी है.

बर्नहैम की पहली ताकत: ‘उम्मीद’ की राजनीति

एंडी बर्नहैम ने अपनी जीत के भाषण में सबसे ज्यादा जोर ‘उम्मीद’ शब्द पर दिया. इसका पहला मतलब उन लोगों से जुड़ा है, जो मानते हैं कि ब्रिटेन की मुख्यधारा की पार्टियों ने छोटे शहरों और आम लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज किया है. 2010 के बाद ब्रिटेन में लागू की गई आर्थिक कटौती (ऑस्टेरिटी) नीतियों का असर खासकर उत्तरी इंग्लैंड के छोटे शहरों पर पड़ा. मेकरफील्ड जैसे इलाकों में रहने वाले लोगों को लगा कि उनकी आवाज सत्ता तक नहीं पहुंच रही. 

बर्नहैम की दूसरी ताकत: स्थानीय मुद्दों पर फोकस

बर्नहैम की राजनीति का बड़ा आधार ‘स्थानीयता’ है. वह लंदन और बाकी इंग्लैंड के बीच बढ़ती आर्थिक दूरी को खत्म करने की बात करते हैं. खासकर उत्तरी इंग्लैंड और तटीय इलाकों के छोटे शहरों को लेकर उनका जोर ज्यादा है.

कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, उन्होंने उत्तरी इंग्लैंड के छोटे शहरों को आर्थिक पैकेज न दिए जाने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की खुलकर आलोचना की थी. इस दौरान उन्होंने ‘लंदन-केंद्रित’ नीतियों के खिलाफ उत्तर के लोगों के हितों का डटकर बचाव किया, जिससे वह पूरे उत्तर में एक नायक के रूप में उभरे.

बर्नहैम की जीत से लेबर पार्टी के उन कार्यकर्ताओं को भी उम्मीद मिली है, जो दक्षिणपंथी लोकप्रियतावादी पार्टी रिफॉर्म यूके और उसके नेता नाइजेल फराज के बढ़ते प्रभाव से चिंतित हैं. बर्नहैम नाइजेल फराज को ही हराकर संसद में पहुंचे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2029 के आम चुनाव में उत्तरी इंग्लैंड में लेबर और रिफॉर्म यूके के बीच मुकाबला बेहद अहम होगा.

तेजी से गिरी स्टार्मर की लोकप्रियता

कीर स्टार्मर ने साल 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी और भारी बहुमत के साथ सत्ता में आए थे. स्टार्मर ने बदलाव का वादा किया था, जो 2024 के चुनाव में लेबर पार्टी का मुख्य नारा भी था.  

लेकिन सत्ता संभालने के कुछ ही समय बाद उनकी लोकप्रियता में बड़ी गिरावट देखने को मिली. आलोचकों का मानना है कि सरकार की ‘मिशन आधारित राजनीति’ आम लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव महसूस नहीं करा पाई.

सरकार से जुड़े विवादों, नीतियों में बदलाव और कई फैसलों को लेकर आलोचनाओं के कारण मतदाताओं के बीच यह धारणा बनी कि स्टार्मर अपने उन वादों को पूरा करने में सफल नहीं रहे, जिनमें उन्होंने लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की बात कही थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबर पार्टी के 100 से अधिक निर्वाचित सांसद सार्वजनिक रूप से स्टार्मर के इस्तीफे या उनके हटने की समयसीमा तय करने की मांग कर चुके हैं.

रिफॉर्म यूके को रोकने की रणनीति स्टार्मर से अलग

बर्नहैम का तरीका कीर स्टार्मर से अलग है. बर्नहैम का मानना है कि ‘रिफॉर्म यूके’ पार्टी को हराने के लिए उसकी नीतियों और भाषा की नकल करना सही रास्ता नहीं है. उनका जोर स्थानीय स्तर पर काम करने और लोगों की रोजमर्रा की समस्याएं हल करने पर है. मैनचेस्टर में परिवहन व्यवस्था को एकीकृत करने का उनका मॉडल इसी सोच का उदाहरण माना जाता है.

इसी वजह से कुछ लोग उनके राजनीतिक मॉडल को ‘मैनचेस्टरिज्म’ भी कहते हैं. 2017 से ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के रूप में, उन्होंने वहां लंदन की तर्ज पर ‘बी नेटवर्क’ नामक एकीकृत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली (बस और ट्राम) लागू की. उनका यह काम काफी सफल रहा और उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर भारी लोकप्रियता मिली. हालांकि, आलोचक यह भी कहते हैं कि मैनचेस्टर जैसे शहर को चलाना और पूरे ब्रिटेन की सरकार चलाना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं.

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क्या स्टार्मर के लिए बढ़ी मुश्किल?

मेकरफील्ड से जीत के बाद उन्होंने कहा कि यह सीट वेस्टमिंस्टर पहुंचने का सिर्फ एक रास्ता नहीं होगी, बल्कि ब्रिटिश राजनीति के लिए एक दिशा तय करने वाली जगह बनेगी. बर्नहैम ने अपने जीत भाषण में सीधे तौर पर स्टार्मर पर हमला नहीं किया, लेकिन उन्होंने देश के लिए एक नए रास्ते की बात कही. उनके समर्थकों ने स्टार्मर से सम्मानजनक तरीके से पद छोड़कर सत्ता सौंपने की अपील की है.

कीर स्टार्मर के पास अब सबसे बड़ा तर्क यही है कि बदलाव लाने में समय लगता है और उनकी सरकार को मौका दिया जाना चाहिए. लेकिन आज की राजनीति में समय सबसे बड़ी चुनौती है. बर्नहैम के समर्थक चाहते हैं कि इस जीत से मिली राजनीतिक ऊर्जा का इस्तेमाल जल्द किया जाए. 

संभावना जताई जा रही है कि जुलाई के अंत में संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले ही नेतृत्व चुनौती की तैयारी तेज हो सकती है. अगर नेतृत्व चुनौती होती है, तो ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ एंडी बर्नहैम डाउनिंग स्ट्रीट की दौड़ में सबसे मजबूत नामों में शामिल हो सकते हैं.

ब्रिटेन ने 6 साल में देखे पांच प्रधानमंत्री 

अगर स्टार्मर इस्तीफा देते हैं या उन्हें पद छोड़ना पड़ता है, तो ब्रिटेन को पिछले 6 साल में अपना छठवां प्रधानमंत्री मिल सकता है. ब्रिटेन में पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता लगातार बढ़ी है. बोरिस जॉनसन (2019-2022), लिज ट्रस (2022) और ऋषि सुनक (2022-2024) के बाद जुलाई 2024 में कीर स्टार्मर प्रधानमंत्री बने थे. 

अब एंडी बर्नहैम की एंट्री ने एक बार फिर ब्रिटेन की सत्ता की दौड़ को दिलचस्प बना दिया है. सार्वजनिक सेवाओं की समस्याओं और अवैध प्रवासन जैसे मुद्दों से जूझ रहे ब्रिटेन के इतिहास में यह पिछले 200 वर्षों में सबसे कम समय में सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री बदलने वाली स्थिति बन सकती है.

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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