Israel Turkey Syria Tension: इजरायल और तुर्की के बीच तनाव अब सीरिया में सैन्य मौजूदगी को लेकर नए टकराव में बदलता दिख रहा है. इजरायल का आरोप है कि तुर्की सीरिया में अपनी सैन्य ताकत और प्रभाव बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर रहा था, जिसे उसने अपनी सुरक्षा के लिए ‘रेड लाइन’ माना. अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर ने द जेरूसलम पोस्ट से बातचीत में कहा कि इजरायल को स्पष्ट खुफिया जानकारी मिली थी कि तुर्की सीरिया में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ाने वाला है.
लीटर ने कहा, 'हम तुर्की या सीरिया के साथ तनाव या युद्ध नहीं चाहते. लेकिन एक रेड लाइन पार हुई है.' उनके मुताबिक, संबंधित पक्षों को पहले ही खुफिया जानकारी दे दी गई थी और तुर्की को यह भी स्पष्ट कर दिया गया था कि उसका कदम पहले से बनी सहमति का उल्लंघन होगा.
चेतावनी के बाद एयरबेस पर हमला
इसी के बाद इजरायल ने मंगलवार को अलेप्पो के पास अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हमला किया. सीरियाई अधिकारियों के मुताबिक, एयरबेस पर कम से कम आठ हमले हुए. बाद में सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी बुधवार को कहा, 'इजरायल ने संदेश स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा मत करो.'
लीटर ने दावा किया कि तुर्की की कथित गतिविधियों को लेकर पहले चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया. इसके बाद इजरायल ने सैन्य कार्रवाई का फैसला किया.
सीरिया में ‘फ्रीज’ समझौते का क्या है मामला?
लीटर के मुताबिक, बाइडन प्रशासन के दौरान इजरायल और सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के प्रशासन के बीच सीरिया की मौजूदा स्थिति को ‘फ्रीज’ करने की समझ बनी थी. यानी कोई पक्ष सैन्य स्थिति में बड़ा एकतरफा बदलाव नहीं करेगा.
जनवरी 2026 में पेरिस में हुई बैठक में इस समझ को फिर दोहराया गया. इसमें सीरियाई विदेश मंत्री असाद अल-शैबानी, अमेरिकी सीरिया दूत टॉम बैरक, येचिएल लीटर, तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद प्रमुख गिल रीच और इजरायली प्रधानमंत्री के सैन्य सचिव रोमन गोफमैन शामिल थे. गोफमैन अब मोसाद प्रमुख हैं. लीटर ने कहा, 'फ्रीज का मतलब है कि जैसे तुर्क आगे नहीं बढ़ते, वैसे ही हम भी आगे नहीं बढ़ते और वे हमें पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं करते.'
ये भी पढ़ें:- ऑपरेशन सिंदूर: महिला पायलट ने उड़ाया था लश्कर का आतंकी ठिकाना, मुरीदके पर Su-30MKI से किया था हमला
तुर्की पर बढ़ते प्रभाव का आरोप
लीटर ने दावा किया कि इजरायल सीरिया में केवल 78 वर्ग मील के सुरक्षा क्षेत्र में मौजूद है, जबकि तुर्की पिछले वर्षों में उत्तरी सीरिया में करीब 3,500 वर्ग मील तक अपना प्रभाव बढ़ा चुका है. उनके अनुसार यह सीरिया के करीब 5 प्रतिशत क्षेत्र के बराबर है. उन्होंने इसे तुर्की का 'धीरे-धीरे हो रहा कब्जा' बताया.
सीरिया से बातचीत के लिए तैयार इजरायल
तनाव के बावजूद लीटर ने कहा कि इजरायल सीरिया के साथ सीधी बातचीत दोबारा शुरू करने को तैयार है. उन्होंने कहा, 'हम सीरियाई लोगों के साथ पहले हुई आमने-सामने की बातचीत को जारी रखना चाहते हैं.'
इजरायली राजदूत ने बातचीत में यह भी कहा कि सीरिया खुद इजरायल के साथ टकराव नहीं चाहता. लीटर के मुताबिक, इसी वजह से इजरायल तुर्की को भी सीरिया में ऐसा कोई कदम नहीं उठाने की चेतावनी दे रहा है, जिससे क्षेत्र में नया संघर्ष पैदा हो. उन्होंने दावा किया कि ऐसा लगता है कि तुर्की की प्रस्तावित गतिविधि सीरियाई नेतृत्व पर थोपी गई थी.
तुर्की और सीरिया के बयानों में भी अंतर
लीटर ने हमले के बाद तुर्की और सीरिया की ओर से सामने आए बयानों में अंतर का भी जिक्र किया. उनके अनुसार, सीरिया के विदेश मंत्री असाद अल-शैबानी ने माना था कि हमले से कुछ दिन पहले तुर्की का एक प्रतिनिधिमंडल सीरिया आया था. वहीं तुर्की ने ऐसी किसी यात्रा से इनकार किया.
तुर्की के साथ भी सामान्य रिश्ते चाहता है इजरायल
लीटर ने यह भी कहा कि इजरायल तुर्की से बातचीत के खिलाफ नहीं है, लेकिन राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और विदेश मंत्री हाकान फिदान के इजरायल विरोधी बयानों पर उसने आपत्ति जताई. फिदान के उस बयान का भी उन्होंने जिक्र किया, जिसमें इजरायल को 'मानवता पर एक दाग' कहा गया था. लीटर ने तुर्की पर हमास नेताओं की मेजबानी और हमास तथा हिजबुल्लाह को धन देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, 'मौजूदा परिस्थितियों में तुर्की क्षेत्र को शांत करने वाली ताकत नहीं हो सकता.'
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि इजरायल और तुर्की के रिश्ते फिर कई दशक पहले जैसे हो जाएं. तब इजरायल क्षेत्र में तुर्की के प्रभाव को स्वीकार करने के लिए तैयार था, लेकिन आतंकवादी संगठनों को तुर्की की कथित फंडिंग के कारण उसका क्षेत्रीय प्रभाव का बढ़ना इजरायल को तार्किक नहीं लग रहा.
सीरिया अब तुर्की और इजरायल के बढ़ते प्रभाव के बीच भी टकराव की नई रेखा खिंच रही है. इजरायल जहां मौजूदा सैन्य स्थिति को बनाए रखने पर जोर दे रहा है, वहीं वह तुर्की की बढ़ती मौजूदगी को अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती मान रहा है. हालांकि, इजरायल ने सीरिया और तुर्की दोनों के साथ बातचीत का विकल्प खुला रखने की बात भी कही है.
ये भी पढ़ें:- पोलैंड बोला: आतंकी चाहे जहां छिपे हों, भारत को पीछा करने का हक, ऑपरेशन सिंदूर और 1971 की जंग में हमने साथ दिया
