Israel Iran War: रिटायर्ड अमेरिकी कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने टकर कार्लसन के साथ एक इंटरव्यू में चेतावनी दी है कि ईरान के साथ लगातार सैन्य उलझाव अमेरिका के लिए घातक साबित हो सकते हैं. मैकग्रेगर के अनुसार, अगर यह तनाव और बढ़ा, तो इसके नतीजे बेहद गंभीर होंगे. उन्होंने दावा किया कि इससे तेल की कीमतें 300 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं और दुनिया भर के शेयर बाजारों में 60 से 80 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है. मैकग्रेगर ने कहा कि इससे होने वाला नुकसान इतना बड़ा होगा कि उससे उबरना लगभग नामुमकिन होगा.
‘मोदी बन सकते हैं शांति के मेडिएटर’
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए मैकग्रेगर ने सुझाव दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के इजराइल और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं. साथ ही चीन के साथ भी उनके रिश्ते तर्कसंगत हैं. भारत एक तटस्थ राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, जिसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है. अमेरिका को इसे एक समस्या नहीं, बल्कि समाधान के रूप में देखना चाहिए. मैकग्रेगर का मानना है कि ट्रंप को मोदी से संपर्क कर इस युद्ध को समाप्त करने का रास्ता तलाशना चाहिए.
ट्रंप की दो टूक- ‘ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म कर दिया’
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पिछले 11 दिनों के सैन्य ऑपरेशनों ने ईरान की कमर तोड़ दी है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को लगभग नष्ट कर दिया है. ट्रंप के मुताबिक:
- ईरान की वायु सेना और रडार सिस्टम को मात्र 3 घंटे में बेअसर कर दिया गया.
- ईरान की मिसाइल क्षमता में 90% और ड्रोन क्षमता में 85% की कमी आई है.
- ईरान की नौसेना के 58 जहाजों को तबाह कर दिया गया है.
ट्रंप ने यह भी याद दिलाया कि उनके कार्यकाल के दौरान ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के जरिए ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म किया गया था. उन्होंने कहा कि हम हर दो साल में वापस नहीं आना चाहते, इस बार हमें इसे पूरी तरह खत्म करना होगा.
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कीमतों को काबू करने के लिए बड़ा फैसला
युद्ध के कारण ऊर्जा बाजारों पर पड़ रहे असर को देखते हुए ट्रंप ने एक और बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के साथ मिलकर दुनिया भर के देशों ने अपने राष्ट्रीय पेट्रोलियम रिजर्व से 40 करोड़ बैरल तेल रिलीज करने पर सहमति जताई है. ट्रंप ने कहा कि इस कदम का मकसद वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को स्थिर रखना और तेल की बढ़ती कीमतों को कम करना है.
उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी प्राथमिकता अमेरिकी नागरिकों के हितों की रक्षा करना है, न कि किसी खास प्रभावशाली वर्ग की. नोट: यह विश्लेषण @FracturedLight0 द्वारा X पर साझा किए गए वीडियो क्लिप और ट्रंप के हालिया बयानों पर आधारित है.
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