Putin Offers Trump: द हिल की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन ने करीब 970 पाउंड (440.9 किलोग्राम) यूरेनियम को अपने कब्जे में लेने की बात कही है. ट्रंप ने इस बातचीत का जिक्र करते हुए ओवल ऑफिस में पत्रकारों को बताया कि पुतिन भी नहीं चाहते कि ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार हो.
ट्रंप ने पुतिन के प्रस्ताव पर क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन के इस ऑफर को फिलहाल तवज्जो नहीं दी है. ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति से कहा कि उनकी प्राथमिकता अभी ईरान के बजाय यूक्रेन युद्ध को खत्म करना है. ट्रंप बोले कि मैंने पुतिन से कहा कि मैं चाहूंगा कि आप यूक्रेन की जंग खत्म करने में मदद करें, वह मेरे लिए ज्यादा जरूरी है. ट्रंप ने पुतिन से यूक्रेन में थोड़े समय के लिए सीजफायर” करने की भी मांग की है. हालांकि, ट्रंप ने यह भी माना कि ईरान और यूक्रेन के हालात एक ही टाइमलाइन पर चल रहे हैं.
ईरान की आर्थिक घेराबंदी और ‘ब्लॉकहेड’ की रणनीति
एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने बताया कि वह ईरान पर बमबारी करने से बेहतर ‘ब्लॉकहेड’ (नाकेबंदी) को मानते हैं. अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में ईरान से जुड़े जहाजों को रोकना शुरू कर दिया है. ट्रंप का कहना है कि इस आर्थिक दबाव की वजह से ईरान की हालत खराब है और उन्हें हार माननी ही होगी. ट्रंप ने साफ किया कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तें नहीं मानता, तब तक यह पाबंदियां जारी रहेंगी, हालांकि सैन्य विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है.
ईरान के पास कितना ‘न्यूक्लियर कचरा’ मौजूद है?
ट्रंप ईरान के यूरेनियम स्टॉक को न्यूक्लियर कचरा (परमाणु कचरा) कहते हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 8 सालों में ईरान के पास 22,000 पाउंड (लगभग 11 टन) संवर्धित यूरेनियम जमा हो गया है. न्यूक्लियर ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से बताया कि इस स्टॉक का बड़ा हिस्सा ईरान के इस्फहान न्यूक्लियर परिसर में हो सकता है, जिस पर पिछले साल जून में हमला भी हुआ था. हालांकि, वहां एजेंसी की सील सुरक्षित है या नहीं, इसकी जांच अभी बाकी है.
क्यों डरी हुई है दुनिया?
यूरेनियम का इस्तेमाल बिजली बनाने और बम बनाने, दोनों में होता है. IAEA के आंकड़ों के अनुसार, ईरान ने अपने यूरेनियम को 60% तक संवर्धित (Enrich) कर लिया है. न्यूक्लियर बम बनाने के लिए 90% शुद्धता की जरूरत होती है और 60% से 90% तक पहुंचना तकनीकी रूप से बहुत आसान और कम समय का काम है. साल 2015 में ओबामा सरकार के समय हुए समझौते में ईरान पर 3.67% की सीमा लगाई गई थी, लेकिन 2018 में ट्रंप के समझौते से हटने के बाद ईरान ने इस सीमा को तोड़ दिया.
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2025 के बाद कैसे बिगड़े हालात?
IAEA के मुताबिक, साल 2025 में ट्रंप की दोबारा सत्ता में वापसी के बाद ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की रफ्तार सबसे तेज कर दी है. जून 2025 में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों तक चले युद्ध के बाद ईरान ने अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों (IAEA) का सहयोग करना बंद कर दिया था. अब दुनिया को सिर्फ सैटेलाइट के जरिए ही ईरान की न्यूक्लियर गतिविधियों पर नजर रखनी पड़ रही है. इस बीच रूस के सलाहकार यूरी उशाकोव ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान की जमीन पर कोई सैन्य ऑपरेशन हुआ, तो इसके नतीजे बहुत खतरनाक होंगे.
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