क्‍या तानाशाह किम जोंग उन की हो गई मौत? पढ़िए जापानी मीडिया क्या कर रहा दावा

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन को लेकर कई तरह की अटकलें पूरी दुनिया में चल रही हैं. पिछले काफी दिनों से किम जोंग की सेहत को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, मगर अब तक उत्तर कोरिया की ओर से कोई भी स्पष्ट बयान नहीं आया है. उत्‍तर कोरिया ने पूरी तरह से अपने नेता के स्‍वास्‍थ्‍य या उनकी स्थिति के बारे में पूरी तरह से खामोशी ओढ़ रखी है.

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन को लेकर कई तरह की अटकलें पूरी दुनिया में चल रही हैं. पिछले काफी दिनों से किम जोंग की सेहत को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, मगर अब तक उत्तर कोरिया की ओर से कोई भी स्पष्ट बयान नहीं आया है. उत्‍तर कोरिया ने पूरी तरह से अपने नेता के स्‍वास्‍थ्‍य या उनकी स्थिति के बारे में पूरी तरह से खामोशी ओढ़ रखी है. ये भी किसी को पता नहीं है कि किम जोंग उन कहां हैं?

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दरअसल, किम जोंग की खराब सेहत के बारे में सबसे पहले 21 अप्रैल को अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया में अमेरिकी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट आई थी कि दिल की सर्जरी के बाद किम जोंग ‘गंभीर खतरे’ में हो सकते हैं. इसमें कहा गया था किम जोंग-उन ने इस महीने की शुरुआत में दिल की सर्जरी कराई. उसके बाद से उनकी हालत बिगड़ गई. उसके बाद कई रिपोर्ट में कहा गया कि वह ब्रेन डेड की स्थिति में हैं. हालांकि दो दिन बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात पर गुस्सा किया और कहा किम जोंग ठीक हैं.

क्या है दावा

अब अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट ने जापानी मीडिया के हवाले से बताया है कि इलाज में देरी के चलते वो (ब्रेनडेड) कोमा में चले गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके इलाज के लिए पहुंचे चीन के डॉक्टर की टीम ने ये बातें कही है. जापान की मैगजीन शुकान जेनडेई ने चीनी डॉक्टरों के हवाले से लिखा है कि इस महीने की शुरुआत में किम एक गांव के दौरे पर गए थे. वहीं पर छाती के बल वो गिर गए. उनके साथ गए डॉक्टर ने तुरंत उनका कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन (CPR) किया. मेडिकल साइंस की भाषा में आमतौर पर हार्ट अटैक होने पर किसी भी मरीज का सीपीआर किया जाता है जिससे कि तुंरत उसकी जान बचाई जा सके.

दावा ये भी किया जा रहा है कि किम जोंग को हार्ट में स्टेन्ट भी लगाने की कोशिश की गई, लेकिन ये ठीक से लग नहीं पाया.हालांकि इस दावे पर उत्‍तर कोरिया समेत किसी भी देश की एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है. उत्‍तर कोरिया की सरकारी न्‍यूज एजेंसी KCNA या किसी अन्‍य ने इस बारे में कुछनहीं कहा है.

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Published by: Utpal kant

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