Strait Of Hormuz: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रखने के ऐलान के बाद ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने पलटवार किया है. IRGC ने दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के लिए नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं.
सिर्फ ईरान के तय रास्तों से ही गुजरेंगे जहाज
ईरानी सरकारी मीडिया ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग’ (IRIB) की रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC ने साफ कर दिया है कि अब इस समुद्री रास्ते से केवल वही सिविलियन जहाज (व्यापारिक जहाज) निकल पाएंगे, जो ईरान के बताए रास्तों का पालन करेंगे. IRGC ने चार बड़े नियम जारी किए हैं, जिनमें कहा गया है कि किसी भी मिलिट्री जहाज को इस रास्ते से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी.
बिना परमिशन नहीं मिलेगी एंट्री
IRGC ने अपने बयान में जोर देकर कहा है कि इस इलाके में किसी भी तरह की हलचल के लिए ईरान की नेवी से पहले इजाजत लेनी होगी. ईरान की संसद के स्पीकर एमबी गालीबाफ ने ‘एक्स’ पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस रास्ते पर अब पूरी तरह ईरान का कंट्रोल होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना मंजूरी के किसी भी जहाज का आना-जाना मुमकिन नहीं होगा.
ईरान की ’40 दिन के युद्ध’ वाली चेतावनी
यह पूरा विवाद तब बढ़ा जब डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी तब तक नहीं हटेगी, जब तक ईरान के साथ डील 100% पूरी नहीं हो जाती. इसके जवाब में IRGC ने चेतावनी दी है कि फिलहाल दो हफ्ते का जो ‘अस्थायी युद्धविराम’ चल रहा है, अगर उसका उल्लंघन हुआ तो हालात ’40 दिन के युद्ध’ जैसे हो जाएंगे. ऐसी स्थिति में ईरान सभी कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को भी पूरी तरह ठप कर सकता है.
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दुनिया के लिए क्यों जरूरी है यह रास्ता?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक छोटा सा समुद्री रास्ता है. दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है. अगर ईरान यहां सख्ती करता है या रास्ता बंद करता है, तो पूरी दुनिया में एनर्जी सप्लाई और तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है. फिलहाल ईरान ने इसे ‘अस्थायी युद्धविराम’ से जोड़कर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है.
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