ईरान के खार्ग आइलैंड के पास ईरानी तेल टैंकर पर हमला, 4 अमेरिकी मिसाइल दागे गए

ईरानी तेल टैंकर पर अमेरिकी मिसाइलों से हमला होने की खबर सामने आई है. खार्ग आइलैंड के पास हुए इस हमले से ईरान की अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा सकता है.

ईरान के खार्ग आइलैंड के पास ईरानी तेल टैंकर पर अमेरिकी मिसाइलों से हमला किया गया है. यह जानकारी ईरानी मीडिया के जरिए सामने आई है. रिपोर्ट में बताया है कि महत्वपूर्ण खार्ग आइलैंड के पास एक ईरानी तेल टैंकर पर 4 अमेरिकी मिसाइलों से हमला हुआ.यह रिपोर्ट ईरान के स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क (SNN) की उस रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें बताया गया था कि टैंकर पर मिसाइलों से हमला हुआ. शुरुआती जानकारी में यह नहीं बताया गया था कि कितनी मिसाइलों से हमला हुआ है और किसने किया है.


खार्ग आइलैंड ईरान की तेल इंडस्ट्री का एक अहम हब है और देश के लगभग 90% तेल एक्सपोर्ट को हैंडल करता है.इस हमले में अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. ईरान की अधिकांश विदेशी कमाई तेल बेचने से होती है और इस काम में खार्ग द्वीप की अहम भूमिका है. यदि इस द्वीप पर तेल का कामकाज रुके, तो देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है. खार्ग आइलैंड के आसपास समुद्र का पानी काफी गहरा है, जिससे दुनिया के सबसे बड़े सुपर टैंकर (VLCC) आसानी से यहां आकर तेल लोड कर सकते हैं, जो ईरान के मुख्य तट पर संभव नहीं है.


ट्रंप की धमकी के बाद हुआ हमला बढ़ाएगा तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 31 अगस्त को एक सोशल मीडिया पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने एक तरह से ईरान को धमकी दी थी कि अगर ईरान तनाव बढ़ाएगा तो खार्ग द्वीप को ध्वस्त किया जा सकता है. यह एक तरह से उनकी ईरान को चेतावनी थी. इस पोस्ट में ट्रंप ने खार्ग के ध्वस्त होने का एआई वीडियो भी पोस्ट किया था. ट्रंप के इस पोस्ट के जवाब में ईरान ने कहा था कि अगर खार्ग पर हमला हुआ तो ईरान तगड़ा जवाब देगा. इससे यह स्पष्ट है कि मीडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद फिलहाल नहीं दिख रही है.


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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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