ईरान युद्ध: पहले 48 घंटे में US ने दागे 560 करोड़ के गोला-बारूद, अब खड़ी हुई मुश्किल

Iran War: ईरान के ऊपर अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को हमला किया. इस दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और तमाम शीर्ष सैन्य लीडर मारे गए. अमेरिका ने पहले दो दिनों में ही भयानक और महंगे हथियारों का इस्तेमाल किया, जिसकी कीमत 560 करोड़ है.

Iran War: युद्ध खर्चीला होता है. भारत पाकिस्तान के बीच 2025 में चार दिन (87 घंटे) के छोटे से संघर्ष में प्रति घंटा 100 करोड़ का नुकसान हुआ. यह तो दोनों देशों के बीच खर्च हुआ. वहीं, अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमला कर दिया. मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया में खाड़ी के 17 देश) इस युद्ध में जहां ईरान ‘बर्बाद’ हो रहा है, तो अमेरिका का खजाना इसमें ‘पानी की तरह बह’ रहा है. वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के शुरुआती 48 घंटों के दौरान, अमेरिका ने करीब 560 करोड़ डॉलर के हथियारों का इस्तेमाल किया. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इस सप्ताह ही कांग्रेस को अतिरिक्त रक्षा बजट (सप्लीमेंटल डिफेंस बजट) का प्रस्ताव भेज सकता है, जो दसियों अरब डॉलर तक हो सकता है, ताकि सैन्य अभियान जारी रहे.

वॉशिंगटन पोस्ट ने तीन अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना ने सैकड़ों सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया है. इनमें एयर डिफेंस इंटरसेप्टर और टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें शामिल हैं. मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (यूएस सेंटकॉम) के अनुसार, ईरान में अब तक 5,000 से अधिक ठिकानों पर हमला किया जा चुका है और इसके लिए 2,000 से अधिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया है.

कोरिया से हथियार शिफ्ट कर रहा अमेरिका

अमेरिकी सेना अपने हथियार भंडार को तेजी से इस्तेमाल करते हुए दुनिया के अन्य हिस्सों से भी सैन्य संसाधन हटा रही है. पेंटागन दक्षिण कोरिया से टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) प्रणाली के कुछ हिस्सों को मध्य पूर्व भेज रहा है. इसके अलावा, अमेरिकी सेना पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों को भी इंडो-पैसिफिक (दक्षिण पूर्व एशिया और चीन-जापान का क्षेत्र) और अन्य क्षेत्रों से हटाकर ईरान के ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल कर रही है.

तेहरान में तेल डिपो पर हमले के बाद काला हुआ आसमान. फोटो- एक्स.

इतना खर्च होने से अमेरिका में चिंता

इस अभियान से पहले जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी दी थी कि ईरान के साथ लंबा युद्ध अमेरिकी सटीक हथियारों के भंडार को खत्म कर सकता है. ये भंडार पहले ही रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन को वर्षों तक दी गई मदद और अन्य देशों में चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियानों के कारण काफी कम हो चुके हैं. हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने इस चेतावनी को कम महत्व दिया था, उनके अनुसार, ईरान युद्ध अमेरिकी सेना की तैयारी (military readiness) को तेजी से कमजोर नहीं कर रहा है. लेकिन, इस युद्ध के पहले दो दिनों में 5.6 अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद खर्च होने से कैपिटल हिल में कुछ नेताओं में चिंता भी बढ़ी है. 

अमेरिका के तीन एफ-15 गिरे

कुवैत में एक मित्र-बलों की गलती (फ्रेंडली फायर) की घटना में अमेरिका के तीन एफ-15 लड़ाकू विमान भी गिर गए. मार्क कैंसियन के अनुसार, प्रत्येक विमान की कीमत करीब 100 मिलियन डॉलर यानी लगभग 10 करोड़ डॉलर है. इस युद्ध में अब तक सात अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है. इनमें से छह सैनिक कुवैत में ईरान के ड्रोन हमले में मारे गए, जबकि एक अन्य सैनिक की मौत सऊदी अरब में हुए हमले में हुई. 

ये भी पढ़ें:- अमेरिकी एक्सपर्ट ने खोली ट्रंप की पोल! ईरान में 150+ लड़कियों की मौत US मिसाइल से ही हुई

ईरान के सटीक हमलों से हैरान अमेरिका

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के जवाबी हमलों की तकनीकी क्षमता ने उन्हें हैरान किया है. ईरान कई बार अमेरिका और इजरायल की वायु रक्षा प्रणालियों- रडार और कमांड-एंड-कंट्रोल ढांचे को निशाना बनाने में सफल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार रूस भी ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा है, जिससे अमेरिकी बलों के खिलाफ उसके हमलों की सटीकता बढ़ी है.

यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह युद्ध कितने समय तक चल सकता है. पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यह अभियान एक महीने से ज्यादा भी चल सकता है. हालांकि, सोमवार को उन्होंने सीबीएस न्यूज से कहा कि यह अभियान ‘लगभग पूरी तरह समाप्ति की ओर’ है, क्योंकि ईरान को भारी सैन्य नुकसान हुआ है.

अमेरिकी हमले के बाद ईरान. फोटो- पीटीआई.

सस्ते हथियारों की ओर रुख करेगा अमेरिका

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने पिछले हफ्ते कहा था कि शुरुआती चरण में सटीक निशाना लगाने वाले महंगे हथियारों (precision munitions) का इस्तेमाल किया गया था. लेकिन अब अमेरिकी और इजरायली सेनाएं ईरान के अंदर आगे बढ़ते हुए अधिक मात्रा में उपलब्ध लेजर-निर्देशित बमों का इस्तेमाल करेंगी, क्योंकि उन्होंने ईरान के ऊपर हवाई प्रभुत्व स्थापित कर लिया है.

ये भी पढ़ें:- रमजान में अली खामेनेई की ‘शहादत’ और मुजतबा की ‘ताजपोशी’, क्या नया सुप्रीम लीडर बदलेगा ईरान?

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में अमेरिकी हथियार भंडार पर नजर रखने वाले विश्लेषक मार्क कैंसियन ने कहा कि महंगे लंबी दूरी के हथियारों की जगह सस्ते हथियारों का इस्तेमाल शुरू होने से हर हमले की लागत काफी कम हो जाएगी. जहां पहले हर हमले पर लाखों डॉलर खर्च होते थे, वहीं अब कुछ मामलों में यह लागत एक लाख डॉलर से भी कम हो सकती है.

ईरान को फिर ट्रंप की धमकी

इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल के परिवहन को बाधित करने की कोशिश करता है, तो उसे भारी सैन्य जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. ट्रंप ने कहा कि अगर इस अहम समुद्री मार्ग को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया पहले की किसी भी कार्रवाई से कहीं अधिक तीव्र होगी.

ये भी पढ़ें:- जान बचाने के लिए होटल से भागीं 5 ईरानी खिलाड़ी, ऑस्ट्रेलिया में मिली पनाह, जानें पूरा मामला

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >