Iran War: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में ‘जल्द ही जीत’ की संभावना व्यक्त की. इसके जवाब में ईरान के दो नेताओं ने कड़ी बयानबाजी की है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को दावा किया कि परमाणु हथियारों ईरान के प्रस्ताव को खुद अमेरिका ने खारिज कर दिया, क्योंकि वह उसके तकनीकी पहलुओं को समझ नहीं पाया. वहीं डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की बिजली संयंत्रों पर हमले वाली टिप्पणी पर अली लारिजानी ने करारा पलटवार किया.
अराघची ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि तेहरान ने ऐसा तंत्र प्रस्तावित किया था, जिससे यह तय किया जा सकता था कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा, लेकिन अमेरिकी वार्ताकारों ने इसे तकनीकी जटिलताओं का हवाला देते हुए स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि तथ्यात्मक समझ बेहद जरूरी होती है.
तेल की कीमतों पर भी अमेरिका को घेरा
अराघची ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी से अमेरिका को आर्थिक लाभ होने का दावा गलत है. उनके मुताबिक ऊर्जा कीमतों और टैरिफ में बढ़ोतरी का फायदा आम अमेरिकी नागरिकों को नहीं बल्कि बड़ी कंपनियों को मिलता है, जबकि इसका बोझ आम परिवारों पर पड़ता है.
ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव
ईरान के वरिष्ठ नेताओं की कड़ी चेतावनियों के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव और बढ़ गया है. ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी ने अमेरिका की झट-पट सैन्य जीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया.
लारिजानी ने कहा कि युद्ध शुरू करना आसान होता है, लेकिन इसे सोशल मीडिया पर कुछ ट्वीट करके नहीं जीता जा सकता. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक अमेरिका अपनी गंभीर रणनीतिक गलती पर पछतावा नहीं करता, उसका भुगतान नही करता, तब तक ईरान पीछे हटने वाला नहीं है.
बिजली ढांचे पर हमले की धमकी पर चेतावनी
लारिजानी ने एक अन्य पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कथित बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका एक घंटे के भीतर ईरान की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह नष्ट कर सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा कदम उठाया गया तो पूरे क्षेत्र में बड़े स्तर पर असर पड़ सकता है. लारिजानी के मुताबिक अगर ईरान की बिजली क्षमता पर हमला हुआ तो आधे घंटे से भी कम समय में पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब सकता है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.
उन्होंने कहा, ‘ट्रंप ने कहा है कि हम एक घंटे में ईरान की बिजली क्षमता को खत्म कर सकते हैं, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया. अगर वे ऐसा करते हैं, तो आधे घंटे से भी कम समय में पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाएगा और यह अंधेरा सुरक्षित जगह तलाशते अमेरिकी सैनिकों का शिकार करने का अवसर देगा.’
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तेल संकट से उबरने के लिए रूसी तेल से हटा बैन
ईरान, अमेरिका के घातक हमलो के बावजूद जवाबी कार्रवाई कर रहा है. ईरान में 28 फरवरी के बाद से अब तक 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन ईरान ने झुकने से इनकार कर दिया है. अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेताओं की मौत हो गई. इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ही चोक कर दिया. इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा हो गया है. इस स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होता है.
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इसके मद्देनजर अब अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूसी तेल से प्रतिबंध हटा दिया है. इस छूट से दुनिया भर में करीब 30 स्थानों पर फंसे लगभग 124–125 मिलियन बैरल रूसी तेल तक पहुंच संभव हो सकती है. इससे खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण पैदा हुई तात्कालिक आपूर्ति कमी को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है. अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध के कारण इस पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन चरमराती वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था को संभालने के लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा है.
