अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुर्की से ब्रिटेन तक की यात्रा को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. तुर्की ईरान से सटा हुआ देश है, जिसके साथ अमेरिका इन दिनों बड़े संघर्ष में उलझा हुआ है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से संभावित हत्या के खतरे को देखते हुए ट्रंप को गुपचुप तरीके से एक छोटे सैन्य विमान में शिफ्ट किया गया था. वहीं, जिस पुराने एयरफोर्स वन में ट्रंप को सवार होते हुए कैमरों ने देखा, उसे उनकी वास्तविक लोकेशन छिपाने के लिए ‘डिकॉय’ यानी भ्रम पैदा करने वाले विमान के तौर पर इस्तेमाल किया गया.
कैमरों के सामने एयरफोर्स वन में सवार हुए ट्रंप
जुलाई 2026 में डोनाल्ड ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अंकारा में थे. मीटिंग के बाद, तुर्की के अंकारा एयरपोर्ट पर ट्रंप की विदाई पूरी तरह सामान्य दिखाई दी. कैमरों ने उन्हें लिमोजिन से उतरकर पुराने नीले-सफेद बोइंग 747 की सीढ़ियां चढ़ते और हाथ हिलाते हुए रिकॉर्ड किया. व्हाइट हाउस ने बताया था कि ट्रंप इसी विमान से तुर्की छोड़ेंगे.
ट्रंप ने खुद भी पुराने एयरफोर्स वन से यात्रा करने की बात कही थी. उन्होंने इसे पुराने दिनों की याद से जोड़ते हुए कहा था कि इससे ब्रिटेन में तैनात अमेरिकी सैनिकों को भी इस ऐतिहासिक विमान को देखने का मौका मिलेगा. लेकिन असल में कहानी कुछ और थी.
कैटरिंग ट्रक के जरिए बदला गया विमान
‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और उनके कुछ सहयोगियों को एयरफोर्स वन से निकालकर एक छोटे C-32A सैन्य विमान में पहुंचाया गया. इसके लिए एयरपोर्ट पर इस्तेमाल होने वाले एक कैटरिंग ट्रक की मदद ली गई.
ट्रंप के एयरफोर्स वन में चढ़ने के बाद ट्रक को विमान के दूसरी तरफ लगाया गया. हाइड्रोलिक सिस्टम की मदद से ट्रक का कंटेनर विमान के दरवाजे तक पहुंचाया गया. इसी रास्ते ट्रंप और उनके सहयोगी बिना मीडिया की नजर में आए बाहर निकले और C-32A तक पहुंचाए गए.
वाशिंगटन पोस्ट ने मीडिया पूल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वह रात 10:56 बजे एयर फोर्स वन से बाहर निकले. मीडिया फुटेज में भी ट्रक को एयरपोर्ट के रनवे पर एक दूसरे विमान की ओर जाते देखा गया. इसके बाद सूट पहने एक व्यक्ति को ट्रक से निकलकर C-32A में सवार होते देखा गया.
असली विमान और ‘डिकॉय’ विमान कुछ मिनटों के अंतर से पहुंचे
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को लेकर C-32A विमान तुर्की से रवाना हुआ, जबकि बड़ा एयरफोर्स वन विमान वहीं मौजूद रहा. दोनों विमान बाद में ब्रिटेन के ट्रांजिट ठिकाने पर कुछ मिनटों के अंतर से पहुंचे.
इस पूरी योजना का मकसद ट्रंप की वास्तविक लोकेशन को कुछ समय तक छिपाकर रखना था. यहां तक कि कुछ पत्रकार और व्हाइट हाउस के कर्मचारी भी बड़े विमान में मौजूद रहे और उन्हें यही लगा कि राष्ट्रपति उसी विमान से यात्रा कर रहे हैं.
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी सी-32 ए में अलग से सवार हुए और उनकी उड़ान को सामान्य दिखाने के लिए बाहरी सीढ़ियों का इस्तेमाल किया. रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि सी-32 ए के लिए कोई फ्लाइट ट्रैकर डेटा नहीं मिल सका, लेकिन यूट्यूब पर पोस्ट किए गए वीडियो में कतर के पूर्व जेट को उतरते हुए दिखाया गया. इसके कुछ घंटों बाद एक सी-32ए और कुछ मिनट बाद एयर फोर्स वन ने भी लैंडिंग की.
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वायु सेना का विमान छलावे के लिए किया गया इस्तेमाल
एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि पिछले 30 वर्षों में कई बार ऐसा हुआ है जब वायु सेना का एक विमान राष्ट्रपति के लिए छलावे के तौर पर इस्तेमाल किया गया, या तो किसी गंभीर खतरे की वजह से या फिर राष्ट्रपति के किसी खतरनाक स्थान पर जाने के कारण. एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी सरकारी अधिकारियों के परिवहन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला नीले और सफेद रंग का सी-32ए, एक संशोधित बोइंग 757, राष्ट्रपति की यात्रा में सहयोग के लिए पुराने एयर फोर्स वन और कतर के पूर्व विमान के साथ तुर्की भेजा गया था.
कतर के दिए नए एयरफोर्स वन पर भी सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कतर की ओर से अमेरिका को दिए गए नए बोइंग 747-8 को लेकर भी सुरक्षा सवाल उठ रहे हैं. ट्रंप इसी विमान को आधिकारिक एयरफोर्स वन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विमान में पुराने एयरफोर्स वन वाली कुछ सुरक्षा प्रणालियां नहीं हैं. ट्रंप ने पहले कहा था कि नए विमान में अतिरिक्त सुरक्षा और तकनीकी बदलाव किए जाएंगे.
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इसकी सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों को खारिज किया है. व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कहा कि नए विमान में राष्ट्रपति और उनके कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उच्च स्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल मौजूद हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप के सामने कई तरह के खतरे हैं और उनकी सुरक्षा के लिए प्रशासन सभी उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल करता है.
पहले भी अपनाई जा चुकी है ऐसी रणनीति
राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए विमान को डिकॉय (नकली जहाज) के तौर पर इस्तेमाल करने की रणनीति बेहद असामान्य है, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है.
‘वॉशिंगटन पोस्ट’ के मुताबिक, 2000 में पाकिस्तान दौरे के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के मामले में भी इसी तरह की रणनीति अपनाई गई थी. कैमरों के सामने एक विमान से उतरने के बावजूद बाद में पता चला था कि क्लिंटन उस अधिक दिखाई देने वाले विमान में सवार नहीं थे.
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