ईरान के पहलवी राजघराने में यहूदी दामाद, 2500 साल बाद हुआ ऐसा, प्रिंसेस ईमान ने की है जुईश बिजनेसमैन से शादी

Iran Princess Iman Pahlavi married Jewish Man: ईरान में मौजूदा सरकार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में हैं. दिसंबर के अंत में शुरू हुए आर्थिक विरोध प्रदर्शनों पर वे लगातार लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील कर रहे हैं. इस आंदोलन में उनकी बेटियां भी सोशल मीडिया के जरिए सक्रिय हैं. रजा पहलवी की तीन बेटियों में से दूसरी ईमान लाया अपने यहूदी कनेक्शन की वजह से चर्चा में हैं. उन्होंने जून 2025 में प्रिंसेस ईमान पहलवी ने अमेरिकी यहूदी कारोबारी ब्रैडली शेरमैन से विवाह किया. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद निर्वासन में रह रहे पहलवी परिवार में यह पहली पीढ़ीगत शादी थी, जिससे 2500 साल बाद किसी फारसी राजशाही से एक यहूदी परिवार जुड़ा.

Iran Princess Iman Pahlavi married Jewish Man: ईरान में मौजूदा सरकार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं. वे पिछले साल 28 दिसंबर से आर्थिक मुद्दे पर शुरू हुए इस प्रदर्शन पर लगातार ईरानी लोगों से सड़क पर संघर्ष करने की मांग कर रहे हैं. न सिर्फ प्रिंस पहलवी बल्कि उनकी बेटियां भी इस आंदोलन में सोशल मीडिया के जरिए बढ़ चढ़कर भाग ले रही हैं. रजा पहलवी की तीन बेटियां हैं; नूर जहरा (जन्म 3 अप्रैल 1992), ईमान लाया (जन्म 12 सितंबर 1993) और फराह मित्रा (जन्म 17 जनवरी 2004) हैं. ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध में इजरायल सबसे बड़ी कड़ी है. इसी यहूदी देश के खिलाफ ईरान हिजबुल्लाह और हमास जैसे संगठनों को सहायता कर रहा है. ऐसे में प्रिंसेस ईमान पहलवी की शादी ईरान के पहलवी शाही परिवार को एक अलग पहचान दी थी. यह वही शादी थी, जिसके जरिए निर्वासित ईरानी राजघराने में 2500 साल बाद एक यहूदी सदस्य शामिल हुआ.

पिछले साल, जून 2025 में प्रिंसेस ईमान पहलवी ने अमेरिकी यहूदी कारोबारी ब्रैडली शेरमैन से पेरिस, फ्रांस में विवाह किया था. यह शादी इसलिए भी ऐतिहासिक मानी गई, क्योंकि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद निर्वासन में रह रहे पहलवी परिवार में यह पहली पीढ़ीगत शादी थी और पहली बार किसी यहूदी परिवार का सदस्य इस वंश से जुड़ा. इस घटना पर जुईश न्यूज वेबसाइट ने कहा कि किसी फारसी राजशाही परिवार में यहूदी सदस्य का आने की घटना 2500 साल बाद हुई है. यह एस्थर की पुस्तक मेगिला (The Megillah Book of Esther) में वर्णित पुरीम की कथा फारसी साम्राज्य में बसे यहूदियों के चमत्कारी बचाव की कहानी है. इस कहानी के बारे में हम आपको आगे बताएंगे, पहले प्रिंसेस और उनके यहूदी पति के बारे में जान लेते हैं.

ईरानी राजघराने में यहूदी दामाद

31 वर्षीय प्रिंसेस की मुलाकात एरिजोना से ताल्लुक रखने वाले यहूदी कारोबारी शेरमैन से आपसी दोस्तों के जरिए हुई थी और उनकी सगाई की खबर 2023 में सामने आई थी. शिकागो में जन्मे ब्रैडली शेरमैन पेशे से बिजनेस डेवलपमेंट एक्सपर्ट हैं और अमेरिकी टेक सेक्टर से जुड़े रहे हैं. वहीं, ईमान पहलवी न्यूयॉर्क में अमेरिकन एक्सप्रेस में काम करती हैं और सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखती हैं. दोनों की मुलाकात 2017 में हुई थी और बाद में अमेरिका में ही उन्होंने जीवन बसाया. हांलाकि अब ईकान जरूर इस सत्ता के बदलाव में भागीदार बन रही हैं. अपने इंस्टाग्राम पोस्ट्स के माध्यम से वे लोगों को ईरान में चल रहे आंदोलन के बारे में लोगों को जागरूक कर रही हैं. 

आज जब ईरान में आर्थिक संकट और राजनीतिक दमन के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं, रजा पहलवी खुद को एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं. ऐसे समय में उनकी बेटी की यह शादी और यहूदी दामाद का पहलवी परिवार में शामिल होना, मौजूदा इस्लामिक रिपब्लिक की विचारधारा के बिल्कुल उलट प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है. रजा पहलवी के ऑफिस की ओर से इसकी फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की गई थी. 

पहलवी परिवार का इजरायल के प्रति खुला समर्थन

पहलवी परिवार इजरायल के प्रति खुले समर्थन के लिए जाना जाता है, जबकि तेहरान की मौजूदा सरकार का रुख इसके ठीक विपरीत है. ऐसे में ईमान पहलवी और ब्रैडली शेरमैन की शादी अब सिर्फ एक शाही समारोह नहीं, बल्कि ईरान के भविष्य को लेकर चल रही राजनीतिक बहस में एक सांकेतिक घटना के तौर पर भी देखी गई थी. माना जा रहा है कि यह विवाह किसी धार्मिक रस्म के तहत नहीं हुआ ऐसा कोई संकेत नहीं है कि प्रिंसेस ईमान यहूदी धर्म अपनाएंगी. हालांकि पेरिस में हुए समारोह के दौरान पारंपरिक यहूदी ‘चेयर डांस’ किए जाने की खबर जरूर सामने आई थी.

पहलवी वंश ने 1925 से 1979 तक ईरान पर शासन किया था, जिसे बाद में खुमैनीवादी इस्लामी क्रांति के दौरान सत्ता से बेदखल कर दिया गया. इसके बाद शाही परिवार अमेरिका में निर्वासन में चला गया, जहां प्रिंसेस ईमान का जन्म हुआ और वहीं उनका पालन-पोषण हुआ. शादी समारोह में पूरे पहलवी परिवार ने शिरकत की, जिनमें ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी की पत्नी और महारानी फराह भी शामिल थीं.

2500 साल पहले की वो कहानी, जब फारसी राजघराने में पहुंची थी यहूदी महिला

एस्थर की पुस्तक को हिब्रू में मेगिलात एस्थर कहा जाता है, जिसका मतलब होता है “एस्थर की स्क्रॉल”. यह हिब्रू बाइबिल के तीसरे हिस्से, केतुविम (लेख) की एक महत्वपूर्ण किताब है. यह पाँच खास ग्रंथों में से एक है, जिन्हें मेगिलॉट कहा जाता है. बाद में इसे ईसाई धर्म के ओल्ड टेस्टामेंट में भी इसे शामिल किया गया. इस पुस्तक में एक यहूदी महिला की कहानी बताई गई है, जिसका असली नाम हदास्सा था और जिसे बाद में एस्थर के नाम से जाना गया. वह फारस (ईरान) में रहती थी और आगे चलकर फारस की रानी बनती है. एस्थर अपनी समझदारी और साहस से अपने लोगों पर आने वाले बड़े खतरे को टाल देती है और यहूदियों के नरसंहार को रोकने में सफल होती है. यह कहानी साहस, बुद्धिमानी और सही समय पर सही कदम उठाने का संदेश देती है. जुईश न्यूज ने इस शादी पर इसी घटना को बहुत महत्ता दी है. तो इस कहानी में क्या है?

एस्थर की पुस्तक मेगिला में पुरीम की कथा कही गई है. उस समय फारस के राजा अहश्वेरोश ने अपनी पत्नी रानी वश्ती को अवज्ञा के कारण पद से हटा दिया और एक यहूदी अनाथ युवती एस्थर को नई रानी बनाया, जिसने अपनी पहचान गुप्त रखी. इसी दरबार में प्रधानमंत्री हामान सत्ता के नशे में चूर था और तब क्रोधित हो उठा, जब एस्थर के चचेरे भाई मोर्दखै ने उसके सामने झुकने से इनकार कर दिया. बदले की भावना में हामान ने राजा को बहला-फुसलाकर पूरे साम्राज्य के यहूदियों के संहार का फरमान जारी करवा दिया और ‘पुरीम’ यानी चिट्ठी डालकर नरसंहार के लिए अदार महीने की 13 तारीख तय की.

एस्थर के साहस ने बचाई यहूदियों की जान

नाजुक घड़ी में मोर्दखै ने एस्थर को साहस दिखाने के लिए प्रेरित किया. अपने प्राणों को जोखिम में डालते हुए एस्थर राजा के सामने गईं और न सिर्फ हामान की साजिश का पर्दाफाश किया, बल्कि अपनी यहूदी पहचान भी उजागर कर दी. सच सामने आते ही क्रोधित राजा ने उसी फांसी के फंदे पर हामान को लटकाने का आदेश दिया, जो उसने मोर्दखै के लिए बनवाया था. इसके बाद यहूदियों को आत्मरक्षा की अनुमति मिली और जिस दिन उनके विनाश की योजना थी, उसी दिन वे विजयी हुए. यही मुक्ति की स्मृति पुरीम पर्व के रूप में मनाई जाती है. यह उत्सव, आनंद, उपहारों का आदान-प्रदान, दान और मेगिला (एस्तेर की पुस्तक) के पाठ के साथ मनाया जाता है, जो ईश्वर की अदृश्य कृपा और साहस की विजय का प्रतीक है.

ये भी पढ़ें:-

मम्मी की वजह गणित से डर जाती हैं लड़कियां, ऋषि सुनक की संस्था के सर्वे का दावा; इससे पैदा होती है जेंडर इनइक्वालिटी

ट्रंप ने खुद को बताया वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति, मादुरो को अरेस्ट करने के बाद क्या है उनका इरादा?

ईरान के विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या 500 के पार, तेहरान की अमेरिका-इजरायल को धमकी, क्या तैयारी कर रहे ट्रंप-नेतन्याहू?

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >