भारत और मॉरीशस ने अपने पुराने रिश्तों को ऊर्जा क्षेत्र में नई मजबूती दी है. दोनों देशों ने तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग के लिए एक अहम समझौता किया है. इंडियन ऑयल और मॉरीशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (एसटीसी) के बीच पांच साल का करार हुआ है, जिससे मॉरीशस को पेट्रोलियम उत्पादों की नियमित और सुनिश्चित आपूर्ति मिलती रहेगी. लेकिन भारत से लगभग 5000 किमी दूर बसा यह छोटा सा अफ्रीकी देश हमारे लिए इतना अहम क्यों है?
तेल-गैस सहयोग पर हुआ समझौता
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया, मॉरीशस के वाणिज्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री जॉन माइकल त्जून साओ युंग सिक युएन के साथ सरकार-से-सरकार स्तर के तेल एवं गैस सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए. इसके साथ ही इंडियनऑयल और मॉरीशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के बीच पेट्रोलियम उत्पादों की सुनिश्चित आपूर्ति के लिए पांच साल का समझौता भी हुआ.
पेट्रोल, डीजल से लेकर एटीएफ तक की सप्लाई
पांच साल के करार के तहत इंडियन ऑयल मॉरीशस को पेट्रोल, डीजल, मरीन गैस ऑयल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) उपलब्ध कराएगा. इससे मॉरीशस को लंबे समय तक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ कीमतों में ज्यादा स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी. पुरी के मुताबिक, यह समझौता मॉरीशस की परिवहन व्यवस्था, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को भी समर्थन देगा. उन्होंने इसे भारत-मॉरीशस के पुराने और भरोसेमंद संबंधों में एक नया मील का पत्थर बताया.
2001 से जारी है ऊर्जा साझेदारी
पुरी ने कहा कि भारत और मॉरीशस की ऊर्जा साझेदारी नई नहीं है. 2001 में इंडियनऑयल ने इंडियनऑयल मॉरीशस लिमिटेड के जरिए मॉरीशस को सेवाएं देना शुरू किया था. उन्होंने कहा कि नया समझौता ऊर्जा क्षेत्र में भारत की विश्वसनीयता और एक भरोसेमंद साझेदार के तौर पर उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
पुरी और मंत्री जॉन माइकल के बीच भारत की ऊर्जा मजबूती और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई. पुरी ने कहा, 'हमने भारत की ऊर्जा मजबूती पर चर्चा की, जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भू-राजनीतिक चुनौतियों के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आए व्यवधानों के बावजूद नागरिकों को सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद की है.'
दक्षिण एशिया के बाहर भारत का पहला ‘व्हाइट ऑयल’ समझौता
दोनों पक्षों ने ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत करने के तरीकों पर भी विचार किया. पुरी ने कहा, 'इंडियन ऑयल और एसटीसी मॉरीशस के बीच व्हाइट ऑयल के लिए सप्लाई परचेज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर दक्षिण एशिया के बाहर भारत का इस तरह का पहला समझौता है. यह हमारी द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.'
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भारत-मॉरीशस संबंध: इतिहास से रणनीतिक साझेदारी तक
भारत और मॉरीशस के रिश्ते केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच हवाई दूरी 5100 से 5800 किमी है, लेकिन ऐतिहासिक विरासत, भारतीय मूल की आबादी, सांस्कृतिक जुड़ाव, लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक हितों और हिंद महासागर की साझा रणनीतिक प्राथमिकताओं ने दोनों देशों के बीच एक मजबूत और बहुआयामी साझेदारी को जन्म दिया है.
ऐतिहासिक और जनसंपर्क का आधार
भारत और मॉरीशस के संबंधों की जड़ें 19वीं सदी तक जाती हैं. 1834 में दास प्रथा खत्म होने के बाद बड़ी संख्या में भारतीय श्रमिक मॉरीशस पहुंचे. इसके साथ दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर ऐसा संबंध बना, जो आगे चलकर राजनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों की मजबूत नींव बना. 1968 में मॉरीशस की स्वतंत्रता के बाद भारत ने तत्काल उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए. तब से दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत होते गए हैं.
भारतीय मूल की आबादी और सांस्कृतिक संबंध
मॉरीशस में करीब 70 प्रतिशत आबादी भारतीय मूल की बताई जाती है. यही वजह है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संपर्क बेहद मजबूत है. मॉरीशस में हिंदी और भोजपुरी को बड़ी संख्या में लोग बोलते और समझते हैं. दीपावली और महाशिवरात्रि जैसे भारतीय त्योहार वहां बड़े उत्साह के साथ मनाए जाते हैं. भारत-मॉरीशस के सांस्कृतिक रिश्तों का एक महत्वपूर्ण केंद्र विश्व हिंदी सचिवालय भी है, जिसका मुख्यालय मॉरीशस में स्थित है.
हिंद महासागर में रणनीतिक महत्व
मॉरीशस दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित द्वीपीय देश है और अफ्रीकी महाद्वीप से करीब 2,000 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है. यह रीयूनियन और रॉड्रिग्स के साथ मस्केरेन द्वीप समूह का हिस्सा है. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे हिंद महासागर में बेहद महत्वपूर्ण बनाती है. प्रमुख समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) के आसपास स्थित होने के कारण मॉरीशस समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक आवाजाही के लिहाज से अहम है. भारत के लिए मॉरीशस पश्चिमी हिंद महासागर में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार और प्रवेश द्वार की भूमिका निभाता है.
समुद्री सुरक्षा में सहयोग
भारत और मॉरीशस SAGAR, Vision MAHASAGAR और इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव जैसे ढांचों के माध्यम से समुद्री सहयोग बढ़ा रहे हैं. दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, तटीय निगरानी, समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करना, आतंकवाद से मुकाबला, अवैध मछली पकड़ने पर रोक और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ साझा कार्रवाई की जाती है. भारत मॉरीशस को रक्षा प्रशिक्षण और समुद्री निगरानी क्षमता विकसित करने में भी सहायता देता है.
रक्षा और खुफिया सहयोग
मॉरीशस की सुरक्षा व्यवस्था में भारत की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है. मॉरीशस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के पद पर ऐतिहासिक रूप से भारत के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों, विशेष रूप से आईपीएस, खुफिया एजेंसियों या सैन्य पृष्ठभूमि वाले अधिकारियों की नियुक्ति होती रही है. 1974 में हुए समझौते के बाद विकसित हुई यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच गहरे सुरक्षा और सामरिक सहयोग को दर्शाती है.
चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत के लिए अहम साझेदार
हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी और क्षेत्रीय रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच मॉरीशस भारत के लिए और महत्वपूर्ण हो जाता है. मॉरीशस के साथ मजबूत साझेदारी के जरिए भारत हिंद महासागर में अपनी समुद्री उपस्थिति मजबूत करने और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने में सक्षम होता है. इससे प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को भी मजबूती मिलती है.
भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति में भूमिका
मॉरीशस की भौगोलिक स्थिति भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति के लिए भी उपयोगी है. यह साझेदारी भारत को पश्चिमी हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने और खुद को क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता के रूप में स्थापित करने में मदद करती है. इसके साथ ही, मॉरीशस के साथ करीबी संबंध वैश्विक दक्षिण में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को भी मजबूत करते हैं.
व्यापार और निवेश के रिश्ते
आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों देशों के संबंध लगातार बढ़े हैं. 2021 में लागू भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग और साझेदारी समझौता (CECPA) द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण आधार बना है. यह किसी अफ्रीकी देश के साथ भारत का पहला व्यापार समझौता था. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 2005-06 के बाद से चार गुना से अधिक वृद्धि हुई है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और मॉरीशस का कुल द्विपक्षीय व्यापार करीब 887.25 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया.
मॉरीशस से भारत में निवेश
मॉरीशस लंबे समय से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रमुख स्रोतों में से एक रहा है. दोनों देशों के बीच मजबूत कारोबारी और वित्तीय संपर्क ने इस आर्थिक रिश्ते को और गहरा किया है. इस तरह भारत-मॉरीशस साझेदारी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, वित्तीय सहयोग और व्यापक आर्थिक संबंधों तक फैली हुई है.
भारत के लिए मॉरीशस क्यों महत्वपूर्ण है?
कुल मिलाकर, मॉरीशस भारत के लिए एक ऐसा साझेदार है जहां इतिहास, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक हित एक साथ जुड़ते हैं. एक ओर भारतीय मूल की बड़ी आबादी दोनों देशों को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ती है, वहीं दूसरी ओर मॉरीशस की भौगोलिक स्थिति भारत को पश्चिमी हिंद महासागर में रणनीतिक बढ़त देती है. समुद्री सुरक्षा, चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच शक्ति संतुलन, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा, हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका और वैश्विक दक्षिण में नेतृत्व, इन सभी मोर्चों पर मॉरीशस भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है.
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