पाकिस्तान के स्वतंत्र मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालिया प्रदर्शनों से निपटने के तरीके पर गंभीर चिंता जताई है. आयोग ने अधिकारियों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करके प्रोटेस्ट को कुचलने का आरोप लगाया है. साथ ही हाल में हुए चुनावों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए हैं.
राजनीतिक और सामाजिक नाराजगी बनी विरोध की वजह
शनिवार को जारी अपनी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में HRCP ने कहा कि PoK में हुआ विरोध अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक समस्याएं हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थाओं पर घटता भरोसा और शासन से जुड़ी नाकामियां भी लोगों की नाराजगी की बड़ी वजह रही हैं. आयोग ने कहा कि राज्य की टकराव वाली कार्रवाई ने हालात को और पोलराइजेशन कर दिया है.
मौत और गंभीर चोटों की निष्पक्ष जांच की मांग
HRCP ने जून से अब तक हुई मौतों और गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. आयोग का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग और सरकार की प्रतिक्रिया ने जनता के भरोसे को और कमजोर किया है.
PoK चुनावों की विश्वसनीयता पर भी उठे सवाल
PoK की तथाकथित विधानसभा की 45 सीटों के लिए चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरणों में कराए गए. हालांकि, चुनाव ऐसे समय में हुए जब इलाके में महीनों से विरोध प्रदर्शन चल रहे थे. इन प्रदर्शनों का नेतृत्व अब प्रतिबंधित किए जा चुके ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े आंदोलनकारियों ने किया था.
12 शरणार्थी सीटों को लेकर विवाद
JAAC ने विधानसभा में मौजूद 12 शरणार्थी सीटों का विरोध किया था. संगठन का आरोप रहा है कि पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान इन सीटों का इस्तेमाल PoK में सरकार बनाने और अपनी पसंद का प्रधानमंत्री स्थापित करने के लिए राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने में करता है.
भारी सुरक्षा और संचार बंदी से चुनाव पर सवाल
HRCP ने कहा कि चुनाव के दौरान भारी सुरक्षा बलों की तैनाती, लंबे समय तक संचार सेवाओं पर रोक, प्रमुख राजनीतिक ताकतों का बहिष्कार और तीन चरणों में मतदान जैसी परिस्थितियों ने चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. इसके अलावा 7 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान स्थगित किया गया, जिससे चुनाव को लेकर संदेह और गहरा गया.
HRCP ने चेताया- टकराव बढ़ाने से भरोसा और टूटेगा
मानवाधिकार आयोग ने कहा कि सरकार को प्रदर्शन और राजनीतिक असहमति को केवल बल प्रयोग के जरिए नियंत्रित करने के बजाय लोगों की वास्तविक शिकायतों का समाधान करना चाहिए. HRCP के मुताबिक, पारदर्शी जांच और जवाबदेही के बिना PoK में संस्थाओं के प्रति जनता का भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा.
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