सऊदी सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, जजान रिफाइनरी में आग लगी थी, लेकिन उसे बाद में बुझा दिया गया. घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. अधिकारियों ने मामले को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी है. हालांकि, मंत्रालय ने आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं की.
हूतियों का दावा- ड्रोन से बनाया गया निशाना
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दावा किया कि संगठन ने जज़ान रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाया है. हूती इससे पहले भी जजान में अरामको की सुविधाओं पर हमले कर चुके हैं. जजान रिफाइनरी दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब में स्थित है और इसकी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन है.
हूतियों ने इससे पहले लाल सागर के किनारे स्थित यानबू को भी निशाना बनाया था. इसके अलावा संगठन ने यमन के लाल सागर स्थित बंदरगाह शहर मोखा पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले करने की जानकारी दी. हूती सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, मोखा बंदरगाह पर हुए हमले में सात लोगों की मौत हुई है.
बाब-अल-मंदेब पर बढ़ा खतरा
यमन के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि हमले से बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है. यह बंदरगाह स्थानीय लोगों के लिए जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ लाल सागर में व्यापार और समुद्री गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण है. मोखा बंदरगाह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाके में है. यह बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के पास है. यह जलमार्ग दक्षिणी लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है.
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अगर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवाजाही बाधित होती है, तो सऊदी अरब के लिए समुद्र के रास्ते तेल और अन्य सामान के परिवहन पर गंभीर असर पड़ सकता है. खास तौर पर यह उसके लिए रणनीतिक चुनौती होगी, क्योंकि ऐसे हालात में सऊदी अरब के पास होर्मुज स्ट्रेट के विकल्प सीमित हो जाएंगे.
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान का नया रक्षा समझौता
जजान रिफाइनरी पर हमले से ठीक दो दिन पहले सऊदी अरब ने तुर्की और पाकिस्तान के साथ एक नाटो स्टाइल का रक्षा समझौता किया था. हमले के बाद यह अहम सवाल है कि सऊदी अरब अगर कोई सैन्य कदम उठाता है तो नए रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका क्या होगी? पाकिस्तान की सेना, वायुसेना, प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई. तुर्की सरकार ने भी हमले के बाद संभावित प्रतिक्रिया या रक्षा समझौते के तहत अपनी भूमिका को लेकर तत्काल कोई बयान जारी नहीं किया.
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तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने समझौते की घोषणा के समय स्पष्ट किया था कि यह किसी खास देश, खासकर ईरान, के खिलाफ नहीं है. उनके अनुसार इसका उद्देश्य तीनों देशों की सुरक्षा को मजबूत करना है. उन्होंने यह भी कहा था कि यदि किसी सदस्य देश पर हमला होता है, तो तीनों देश आपसी बातचीत के जरिए तय करेंगे कि किस तरह और कितनी सैन्य या अन्य सहायता दी जानी चाहिए.
हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ नाकाबंदी की घोषणा की थी
हूतियों ने पिछले महीने लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की थी. संगठन ने इसके पीछे सऊदी अरब द्वारा हूतियों पर कथित घेराबंदी को कारण बताया था. हालांकि, सऊदी अरब इन आरोपों को खारिज करता है. लाल सागर में हूतियों के लगातार हमलों ने पहले से ही वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है. लाल सागर में हूतियों के हमलों ने वैश्विक बाजारों के लिए तेल और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति को और जटिल बना दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है.
