Israel Lebanon Talk: दशकों के बाद लेबनान (Lebanon) और इजराइल (Israel) मंगलवार को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में सीधी राजनयिक बात करने जा रहे हैं. यह वार्ता दोनों पक्षों के बीच एक महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष के बीच हो रही है, जिसने लेबनान को भारी नुकसान पहुंचा है. इस अहम वार्ता में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, इजराइल के अमेरिका में राजदूत येचिएल लीटर और लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद शामिल हो रहे हैं. साल 1993 के बाद यानी 33 सालों के बाद पहली बार है जब दोनों देश सीधे आमने-सामने बातचीत करेंगे.
हिजबुल्लाह ने कहा- किसी भी समझौते का नहीं करेंगे पालन
इस शांति वार्ता का हिजबुल्लाह (Hezbollah) पूरजोर विरोध कर रहा है. उसने साफ कर दिया है कि वह किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा. उसका कोई प्रतिनिधि वार्ता में शामिल भी नहीं होगा. संगठन की राजनीतिक परिषद के एक उच्च पदस्थ सदस्य वाफिक सफा ने न्यूज एजेंसी एपी को बताया कि वह वार्ता में हुए किसी भी समझौते का पालन नहीं करेगा.
इजराइल-लेबनान वार्ता का क्यों विरोध कर रहा हिजबुल्लाह?
हिजबुल्ला इस तरह की सीधी वार्ता को लेकर संशय में हैं. उसका मानना है कि लेबनान सरकार के पास बातचीत का कोई ठोस आधार नहीं है. हिजबुल्लाह ने जोर देते हुए कहा कि उसे ईरान का समर्थन करना चाहिए, जो हिजबुल्ला का प्रमुख सहयोगी और संरक्षक है. हिजबुल्ला के महासचिव नइम कासिम ने एक भड़काऊ भाषण देते हुए लेबनान से वार्ता रद्द करने का आह्वान किया है. जबकि, लेबनान सरकार को उम्मीद है कि वार्ता से लड़ाई खत्म होने का रास्ता निकलेगा.
दक्षिण लेबनान पर जारी है इजराइल का अटैक
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में होने जा रही शांति बैठक से इतर इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अपना हमला जारी रखा है. इजराइल का कहना है कि हिजबुल्लाह पर हमले का मकसद इजराइल से लगती लेबनान की सीमा से लेकर उत्तर में लगभग 30 किलोमीटर दूर लिटानी नदी तक एक सुरक्षा क्षेत्र बनाना है.
हिजबुल्लाह भी कर रहा है हमला
हिजबुल्ला नवंबर 2024 में खत्म हुए इजराइल के साथ अपने पिछले युद्ध में काफी कमजोर हो गया था. फिर भी हर दिन उत्तरी इजराइल और लेबनान के अंदर मौजूद इजराइली सैनिकों पर ड्रोन, रॉकेट और तोप से हमले करता रहता है.
इजराइल-हिजबुल्लाह जंग में जा चुकी है हजारों जानें
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार लेबनान में इजराइली हमलों में कम से कम 2,089 लोग मारे गए हैं, जिनमें 252 महिलाएं, 166 बच्चे और 88 चिकित्साकर्मी शामिल हैं. इजराइल के हमले में 6,762 अन्य घायल हुए हैं. 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं.
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