108 साल पहले यानी 23 सितंबर 1918 को भारतीय घुड़सवारों ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान Haifa पर कब्जे में अहम भूमिका निभाई थी.
आज यही तारीख Haifa Day के रूप में भारतीय सैन्य इतिहास और भारत-इजरायल की साझा स्मृति में खास जगह रखती है.
मशीनगन के सामने घोड़े और तलवार!
सोचिए—सामने आधुनिक मशीनगन और तोपें हों और आपकी सेना घोड़ों पर सवार होकर आगे बढ़े.
1918 में Haifa के मोर्चे पर कुछ ऐसा ही हुआ.
भारतीय cavalry ने कठिन terrain और भारी दुश्मनी fire के बीच हमला किया.
यही वजह है कि Haifa की लड़ाई military history में एक असाधारण cavalry action के रूप में याद की जाती है.
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Jodhpur, Mysore और Hyderabad के सैनिक
Haifa अभियान में 15th Imperial Service Cavalry Brigade शामिल थी.
इससे जुड़े भारतीय State Forces में:
- Jodhpur Lancers
- Mysore Lancers
- Hyderabad Lancers
शामिल थे.
इन सैनिकों ने British-led Allied campaign के तहत Ottoman Empire के खिलाफ लड़ाई लड़ी.
सिर्फ एक शहर नहीं था Haifa
Haifa की रणनीतिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण थी.
यह Mediterranean coast, Haifa Bay और Mount Carmel के बीच स्थित था.
शहर पर नियंत्रण मिलने का मतलब था कि Allied forces को आगे बढ़ने के लिए एक महत्वपूर्ण port और supply route मिल सकता था.
इसीलिए Haifa पर कब्जा Palestine campaign के अंतिम चरण में महत्वपूर्ण था.
दुश्मन सिर्फ Ottoman सैनिक नहीं थे
Haifa के approaches पर Ottoman forces के साथ German machine-gun positions और Austro-Hungarian artillery भी मौजूद थी.
Mount Carmel का terrain भी cavalry के लिए आसान नहीं था.
भारतीय सैनिकों को पहले कठिन ऊंचाई वाले रास्तों और enemy fire को पार करना पड़ा.
पहले पहाड़ी artillery position को निशाना बनाया गया
Mysore Lancers की एक squadron ने Sherwood Rangers और British artillery के समर्थन से Mount Carmel की तरफ बढ़कर Austro-Hungarian artillery battery पर हमला किया.
ऊंचाई पर मौजूद artillery position को neutralise करना पूरे operation के लिए बेहद महत्वपूर्ण था.
और शुरू हुआ घुड़सवारों का ऐतिहासिक हमला
दूसरी तरफ Jodhpur Lancers ने Haifa की ओर जाने वाले रास्ते को रोक रही enemy positions पर हमला किया.
मशीनगन और artillery fire के बावजूद cavalry आगे बढ़ी.
फिर Jodhpur Lancers ने Haifa की ओर classic mounted charge किया.
Major Dalpat Singh Shekhawat
Haifa की कहानी में एक नाम खास तौर पर याद किया जाता है— Major Dalpat Singh Shekhawat
Jodhpur Lancers के इस अधिकारी ने लड़ाई में नेतृत्व किया और वीरगति पाई.
बाद में उन्हें 'Hero of Haifa' के रूप में याद किया जाने लगा.
क्या यह 'आज के भारत ने Israel को आजाद कराया' था?
नहीं.
यह बात समझना बेहद जरूरी है.
1918 में न आज का भारत स्वतंत्र था और न आधुनिक State of Israel अस्तित्व में था.
भारतीय सैनिक British Empire के सैन्य ढांचे के अंतर्गत लड़ रहे थे.
Jodhpur, Mysore और Hyderabad जैसी princely states की forces British imperial military campaign का हिस्सा थीं.
यही इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण historical paradox है.
क्योंकि सैनिक भारतीय थे
Independent India ने इस कहानी को colonial politics के बजाय भारतीय सैनिकों के साहस, सैन्य कौशल और बलिदान की स्मृति के रूप में अपनाया.
23 सितंबर को Haifa Day के रूप में मनाया जाता है.
2018 में Battle of Haifa की centenary भी आधिकारिक रूप से commemorated की गई थी.
Teen Murti Haifa Chowk
दिल्ली का मशहूर Teen Murti Chowk 2018 में Teen Murti Haifa Chowk के नाम से जाना जाने लगा.
यह नाम उन भारतीय cavalry units की स्मृति से जुड़ा है जिन्होंने Haifa campaign में हिस्सा लिया था.
तीन statues Jodhpur, Mysore और Hyderabad Lancers की भूमिका का प्रतिनिधित्व करती हैं.
इतिहास बना diplomacy का हिस्सा
जनवरी 2018 में Israeli PM Benjamin Netanyahu की भारत यात्रा के दौरान PM Narendra Modi और Netanyahu ने Teen Murti Haifa Chowk पर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी.
इससे Haifa की 100 साल पुरानी military history को भारत-इजरायल diplomatic relationship में एक नया symbolic dimension मिला.
'Memory Diplomacy': एक पुरानी लड़ाई, एक नया रिश्ता
Haifa की लड़ाई 1918 की थी.
भारत और Israel के आधुनिक diplomatic relations उससे बहुत बाद की कहानी हैं.
लेकिन दोनों देशों ने Haifa की स्मृति को अपने shared historical narrative में जगह दी.
इसे Memory Diplomacy कह सकते हैं—यानी पुरानी ऐतिहासिक स्मृतियों को आधुनिक रिश्तों के symbolic bridge के रूप में इस्तेमाल करना.
यह सिर्फ वीरता की कहानी नहीं थी
इन सैनिकों की बहादुरी को याद करते हुए यह भी नहीं भूलना चाहिए कि वे औपनिवेशिक भारत से आए थे.
भारत स्वतंत्र नहीं था.
युद्ध का निर्णय भारतीय जनता की किसी स्वतंत्र सरकार ने नहीं लिया था.
इसलिए Haifa की कहानी में एक साथ दो सच्चाइयां मौजूद हैं—
भारतीय सैनिकों की extraordinary bravery और British Empire की colonial military system.
108 साल बाद Haifa क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि एक ही battle में तीन अलग-अलग कहानियां मिलती हैं—
Military history: घोड़ों पर सवार भारतीय cavalry का असाधारण charge
Colonial history: British Empire के लिए लड़ता हुआ औपनिवेशिक भारत
Modern diplomacy: भारत-इजरायल संबंधों में shared memory का symbolic इस्तेमाल
और शायद इसी वजह से 23 सितंबर का Haifa Day सिर्फ एक युद्ध की तारीख नहीं है.
यह इतिहास के बदलते अर्थों की कहानी है.
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