कड़ाके की ठंड में जर्मनी की राजधानी में बिजली गुल, वामंपथी ग्रुप ‘वोल्केनो’ का दावा; हमने अंधेरे में डाले 45000 घर

Germany capital Berlin Power Outage Volcano Group: जर्मनी की राजधानी बर्लिन में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. इस कड़ाके की ठंड मेंदक्षिण-पश्चिमी हिस्से में हुई एक संदिग्ध आगजनी की घटना ने शहर की बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है. इससे लगभग 45,000 घरों में बिजली गुल हो गई है. इसके लिए प्रशासन ने वामपंथी अतिवादियों को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं जर्मन मीडिया RBB को एक पत्र मिला, जिसमें खुद को ‘वोल्केनो ग्रुप’ बताने वाले संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली.

Germany capital Berlin Power Outage Volcano Group: जर्मनी की राजधानी बर्लिन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में हुई एक संदिग्ध आगजनी की घटना ने शहर की बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है. इस हमले के कारण शनिवार से ही बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे हजारों घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान अंधेरे में चले गए. ग्रिड ऑपरेटर स्ट्रोमनेत्स बर्लिन के अनुसार, हाई-वोल्टेज लाइनों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाए जाने की वजह से शुरुआत में करीब 45,000 घरों की बिजली गुल हुई. इस घटना के बाद स्थानीय मीडिया में “वोल्केनो ग्रुप” नामक एक कार्यकर्ता संगठन का एक पत्र प्रकाशित हुआ, जिसमें हमले की जिम्मेदारी ली गई. ठंड और बर्फबारी के कारण मरम्मत कार्य धीमा पड़ने की आशंका जताई गई है, जिससे कई इलाकों में गुरुवार तक भी बिजली बहाल न हो पाने की संभावना है.

हमले का तरीका और असर

रविवार तक मरम्मत के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी थी और लगभग 35,000 घरों के साथ 1,900 से अधिक व्यवसाय अब भी प्रभावित थे. स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, यह घटना लिच्टरफेल्ड पावर प्लांट के पास टेल्टो कैनाल पर बने एक केबल ब्रिज में आग लगने से हुई. इस आग से न सिर्फ बिजली बल्कि इंटरनेट और हीटिंग सिस्टम भी ठप हो गए. चार जिलों में रहने वाले लोगों को इसका सीधा असर झेलना पड़ा. कई इलाकों में हालात इतने खराब थे कि प्रशासन को प्रभावित नागरिकों के लिए आपातकालीन सहायता केंद्र खोलना पड़ा. ज़ेलेनडॉर्फ जिले के एक स्पोर्ट्स सेंटर को अस्थायी राहत स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. 

जिम्मेदारी लेने वाला पत्र और जांच

घटना के बाद जर्मन मीडिया RBB को एक पत्र मिला, जिसमें खुद को ‘वोल्केनो ग्रुप’ बताने वाले संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली. इस पत्र में दावा किया गया कि कार्रवाई का मकसद जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना था. बर्लिन की आंतरिक मामलों की मंत्री आइरिस स्प्रांगर ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को मिला यह पत्र प्रामाणिक प्रतीत होता है और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है. उन्होंने इस हमले को आम नागरिकों और शहर में आने वाले लोगों के खिलाफ किया गया अमानवीय कृत्य बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और कहा कि मामले की गहन जांच जारी है. हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि पत्र की अंतिम पुष्टि और सभी तथ्यों की जांच अभी पूरी नहीं हुई है.

‘वोल्केनो ग्रुप’ क्या है?

यूरोन्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘वोल्केनो ग्रुप‘ कोई नया नाम नहीं है. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, घरेलू खुफिया विभाग को इस संगठन की गतिविधियों की जानकारी 2011 से है. अलग-अलग वर्षों में इसके कथित हमलों और दावों की जांच होती रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समूह अराजकतावादी और वामपंथी उग्रवादी विचारधारा से जुड़ा हुआ है, जिसकी सोच का केंद्र जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा नीतियों का विरोध रहा है. इस संगठन की संरचना, सदस्य संख्या या नेतृत्व को लेकर कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है. अब तक इसके निशाने पर मुख्य रूप से बिजली के ढांचे, केबल सिस्टम और तकनीकी इंस्टॉलेशन रहे हैं, खासकर बर्लिन और उसके आसपास के इलाकों में.

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हमले

यह पहली बार नहीं है जब बर्लिन में इस तरह की घटना सामने आई हो. पिछले साल सितंबर में ट्रेप्टो-कोपेनिक जिले में एक बिजली के खंभे को नुकसान पहुंचाए जाने से करीब 50,000 घरों और व्यवसायों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी. उस समय लगभग ढाई दिन बाद हालात सामान्य हो पाए थे. इसके अलावा, 2024 में ग्रुएनहाइडे स्थित टेस्ला की गीगाफैक्ट्री की बिजली आपूर्ति पर हुए हमले से भी इसी समूह के जुड़े होने की आशंका जताई गई थी. मौजूदा घटना में भी अधिकारियों को पहले के मामलों से कई समानताएं दिख रही हैं, जिससे संदेह और गहरा गया है. 

कुल मिलाकर स्थिति अच्छी नहीं

हालांकि अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा बिजली कटौती के परिणाम कहीं अधिक गंभीर हैं. लिच्टरफेल्ड जिले में करीब 2,000 घरों में रविवार रात बिजली वापस आ गई. फिलहाल दक्षिण-पश्चिम बर्लिन के कई इलाके अब भी अंधेरे में हैं. कुछ स्थानों पर बिजली आ चुकी है, लेकिन निकोलासे, जेलेनडॉर्फ और वानजे जैसे क्षेत्रों के लोगों को अभी इंतजार करना पड़ सकता है, संभवतः गुरुवार तक बिजली पूरी तरह बहाल होने का इंतजार करना पड़ेगा. प्रशासन और बिजली कंपनियां लगातार मरम्मत में जुटी हैं, जबकि सुरक्षा एजेंसियां इस हमले के पीछे के नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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