Super Tuesday में अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाइडन ने वामपंथी बनी सैंडर्स को दी पटखनी

तीन नवंबर, 2020 को अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं. इसके लिए वहां की डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गयी है. वजह ये है कि इस पार्टी की ओर से उम्मीदवारी का दावा पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाइडन और वामपंथी बर्नी सैंडर्स कर रहे हैं. टीवी नेटवर्कों के जरिये सुपर ट्यूजडे प्राइमरी के तहत मतदान कराये गये, जिसमें कई प्रांतों में पूर्व उपराष्ट्रपति बाइडन ने सैंडर्स को पटखनी दे दी है.

वाशिंगटन : अमेरिका में नवंबर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती देने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवारी की दौड़ में पूर्व उपराष्ट्रपति एवं मध्यमार्गी जो बाइडन ने सुपर ट्यूसडे (Super Tuesday) प्राइमरी में वामपंथी बर्नी सैंडर्स पर कई जीत दर्ज की है. चौदह प्रांतों में अमेरिकी टीवी नेटवर्कों ने मध्यमार्गी बाइडन के लिए अब तक नौ जीत की संभावना जतायी है. देश के दक्षिणी हिस्से में अफ्रीकी मूल के अमेरिकियों के बीच उनके लिए मजबूत समर्थन नजर आ रहा है.

बाइडन ने टेक्सास में डेमोक्रेटिक प्राइमरी जीत ली है. हालांकि, कैलीफोर्निया का नतीजा आना बाकी है, जहां सैंडर्स को मजबूत समर्थन प्राप्त है. कैलिफोर्निया और माइने में उनके बीच कांटे की टक्कर नजर आ रही है. सैंडर्स को अब तक तीन प्रांतों में जीत मिली है, जिनमें उनका गृह राज्य वेरमोंट और कोलारेडो तथा पश्चिमी प्रांत उताह शामिल हैं. वह मिनिसोटा और ओकलाहामा में हार गये हैं, जहां उन्होंने 2016 में हिलेरी क्लिंटन को हराया था.

सीनेटर एमी क्लोबुचर और इंडियाना के पूर्व मेयर पीट बुटीगीज ने न सिर्फ यह घोषणा की कि वे इस पद के लिए दौड़ से खुद को बाहर कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने तीन नवंबर को होने वाले चुनावों में 77 वर्षीय जो बाइडन की दावेदारी के समर्थन का भी ऐलान किया है. पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति पद की दौड़ से खुद के अलग होने का ऐलान करने वाले पूर्व अमेरिकी सांसद बेटो ओ-रोर्के ने भी बाइडन को समर्थन दिया है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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