अफ्रीकी देशों में इबोला का कहर, WHO ने हेल्थ इमरजेंसी घोषित की

Ebola Virus : अफ्रीका के कुछ देशों में हाल में इबोला वायरस के कुछ मामले सामने आए हैं, जिसके बाद से विश्व स्वास्थ्य संगठन और अफ्रीकी देशों की सरकारें अलर्ट पर हैं.

Ebola Virus : विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय मानते हुए रविवार को हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी.

यह निर्णय इबोला के कारण 88 लोगों की मौत होने और 300 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज होने के बाद लिया गया है.विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि बंडीबुग्यो वायरस से फैले ये प्रकोप कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी की श्रेणी में नहीं आते हैं. हालांकि, संगठन ने देशों को अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बंद नहीं करने की सलाह भी दी.

क्या है इबोला वायरल?

इबोला वायरस एक खतरनाक और जानलेवा वायरस है. इसका संक्रमण इंसानों और कुछ जानवरों (खासकर बंदर, चमगादड़) में फैलता है. इसकी मृत्यु दर बहुत ज्यादा हो सकती है. इस वजह से इसे बहुत खतरनाक माना जाता है. पहली बार 1976 में यह वायरस अफ्रीका के कांगो क्षेत्र में पाया गया था. इबोला वायरस, कोरोना वायरस की तरह हवा से नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीना, लार, उल्टी से फैलता है. संक्रमित व्यक्ति या जानवर के संपर्क में आने से यह वायरस अटैक करता है.संक्रमण फैलने से तेज बुखार, सिरदर्द और कमजोरी होती है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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