कार्नी के भाषण से तमतमाए ट्रंप, कनाडा को भेजे गाजा के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का न्यौता वापस लिया

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को गाजा के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्यौता वापस ले लिया है. यह फैसला कनाडा के पीएम माइक कार्नी के जोशीले भाषण, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया कार्रवाइयों पर निशाना साधा था, के बाद लिया गया है.

अमेरिका-कनाडा रिश्तों में तकरार और बढ़ गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा का शांति बोर्ड में शामिल होने का न्योता वापस ले लिया. राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुक्रवार को कनाडा को दिए गए “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होने के निमंत्रण को रद्द कर दिया. उन्होंने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक छोटे से संदेश के जरिए दी. ट्रम्प ने फिर कहा कि यह बोर्ड दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा और खास नेताओं का समूह बनने वाला है.

अपने संदेश में उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को संबोधित करते हुए लिखा कि कनाडा को अब इस बोर्ड में शामिल नहीं किया जाएगा. उन्होंने इसे बहुत प्रतिष्ठित मंच बताया और औपचारिक अंदाज में धन्यवाद भी कहा. उन्होंने लिखा, ‘डिअर प्राइम मिनिस्टर कार्नी, कृपया इस पत्र को इस बात की सूचना मानें कि बोर्ड ऑफ पीस कनाडा के शामिल होने के संबंध में अपना निमंत्रण वापस ले रहा है. यह नेताओं का वह बोर्ड होगा, जो किसी भी समय गठित हुआ सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड होगा. इस विषय पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद!’

गाजा से जुड़ी योजना भी शामिल

गाजा बोर्ड ऑफ पीस का गठन पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने की 20-सूत्रीय शांति योजना के दूसरे चरण का हिस्सा है. इसका उद्देश्य गाजा पट्टी में स्थिरता को बढ़ावा देना और युद्ध के बाद रिकंस्ट्रक्शन की निगरानी करना है. ट्रम्प ने यह विचार पिछले साल गाजा युद्ध रोकने की अपनी योजना के तहत रखा था, लेकिन अब इसे दुनिया के दूसरे संघर्षों तक बढ़ाया जा रहा है.

इस बोर्ड में शामिल होने के लिए, स्थाई सदस्यों को 1 अरब डॉलर का भुगतान करना होगा. इसी पैसे का इस्तेमाल गाजा के रिकंस्ट्रक्शन में किया जाएगा. वहीं, गैर स्थाई देशों को इसमें तीन साल की सदस्यता मिलेगी. अमेरिकी राष्ट्रपति इस बोर्ड के चेयरमैन रहेंगे. इसके आर्टिकल 3.2 में ही इसका जिक्र किया गया है. ट्रंप यूएन से अलग हटकर दुनिया में शांति लाने का अपने तरह का नया प्रयास कर रहे हैं.

 कनाडा ने कहा था कि वह इस बोर्ड में शामिल होगा, लेकिन वह पैसा नहीं देगा. वहीं भारत ने अभी तक इस मामले पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है. अधिकारियों के मुताबिक लगभग 35 देश इस पहल में शामिल होने को तैयार हो गए हैं, जबकि करीब 60 देशों को न्योता भेजा गया था. ट्रम्प ने यह भी इशारा किया कि यह नया मंच भविष्य में संयुक्त राष्ट्र जैसी भूमिका भी निभा सकता है. 

कनाडा पर ट्रम्प की नाराजगी

निमंत्रण वापस लेने से पहले ट्रम्प ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर तीखी टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि कनाडा को अमेरिका का ज्यादा आभारी होना चाहिए. ट्रम्प का कहना था कि कनाडा को अमेरिका से बहुत फायदे मिलते हैं, लेकिन वह इसकी कद्र नहीं करता. उन्होंने यहां तक कह दिया कि उनकी प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल सुरक्षा योजना से कनाडा को भी सुरक्षा मिलेगी. उन्होंने कार्नी को सीधे संदेश देते हुए कहा कि कनाडा की सुरक्षा में अमेरिका की बड़ी भूमिका है और यह बात याद रखनी चाहिए.

ट्रंप यह गोल्डन डोम ग्रीनलैंड में लगाना चाहते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति की इस योजना का यूरोपीय देशों के साथ कनाडा ने भी विरोध किया था. इसके जवाब में बीते सप्ताह ट्रंप ने अमेरिका का एक नया मैप जारी किया था, जिसमें वेनेजुएला, ग्रीनलैंड और कनाडा को यूएस का हिस्सा दिखाया था. इससे पहले ट्रंप  कनाडा को अमेरिका का 51वां स्टेट भी कहते रहे हैं. लेकिन ट्रंप की यह नाराजगी कार्नी के WEF में दिए गए भाषण के बाद आई है. 

कार्नी ने क्या कहा था?

मार्क कार्नी ने WEF में अपने भाषण में कहा था कि दुनिया अब पहले जैसी स्थिर नहीं रही. उन्होंने कहा कि बड़े देशों के बीच मुकाबला बढ़ रहा है और नियमों पर चलने वाली पुरानी व्यवस्था कमजोर पड़ रही है. उन्होंने व्यापार, वित्त और सप्लाई चेन को हथियार बनाने के खिलाफ आगाह किया.. इसे अमेरिका की नीतियों, खासकर टैरिफ और ग्रीनलैंड को लेकर रुख से जोड़कर देखा गया. 

WEF में अपने संबोधन में कार्नी ने टैरिफ के जरिए दबाव बनाने का विरोध दोहराया और देशों से संप्रभुता, स्थिरता और समृद्धि की रक्षा के लिए फिर से बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की अपील की. उन्होंने कहा कि स्थिर और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का दौर अब एक कठोर भू-राजनीतिक वास्तविकता में बदल चुका है, जहां महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है.

साफ है कि इन बयानों के बाद दोनों नेताओं के बीच तनाव बढ़ा और उसी के बाद ट्रम्प ने कनाडा को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से बाहर रखने का फैसला कर लिया.

ट्रंप ने दावोस में की बोर्ड ऑफ पीस की शुरुआत

यह फैसला ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही ट्रम्प ने स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की बैठक के दौरान इस “बोर्ड ऑफ पीस” की आधिकारिक शुरुआत की थी. उन्होंने कहा था कि यह पहल दुनिया भर के झगड़े खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम होगी. ट्रम्प ने उस कार्यक्रम में कहा था, ‘दुनिया में शांति आने वाली है और हम सब इसमें बड़ी भूमिका निभाएंगे.’

उन्होंने यह भी दावा किया कि एक साल पहले दुनिया बहुत तनाव में थी, लेकिन अब हालात सुधर रहे हैं और कई बड़े खतरे कम हो रहे हैं. ट्रम्प ने कहा कि उनकी सरकार इस समय आठ अलग-अलग संघर्षों को सुलझाने में लगी है. उन्होंने यह भी कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने की दिशा में भी प्रगति हो रही है.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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