मैं चाहे जो करूं, मेरी मर्जी… डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- मुझे इंटरनेशनल लॉ की जरूरत नहीं, ऐसा क्यों बोले डॉन?

Donald Trump doesn’t need International Law: दूसरे देशों को धमकी और उन्हें कब्जाने जैसी प्रत्यक्ष कार्रवाई करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें केवल एक ही आदमी रोक सकता है और वह खुद डोनाल्ड ट्रंप हैं. उनकी नैतिकता और दिमाग ही उन्हें रोक सकता है.

Donald Trump doesn’t need International Law: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी तक पूरी दुनिया पर टैरिफ लगाकर देशों के लिए मुसीबत ढा रहे थे. अब वे देशों पर हमला करने की भी बात करने लगे हैं. उन्होंने वेनेजुएला पर ऐक्शन करके इसकी एक बानगी दिखा भी दी है. अमेरिकी सेना निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को रात के अंधेरे में उनके बिस्तर से ही उठा लाई. इसके बाद तो उनका और भी धमकाने वाला रूप सामने आने लगा है. उन्होंने ईरान को धमकी थी, ग्रीनलैंड को तो पहले ही कब्जाने की चाल चली थी, अब कोलंबिया और मैक्सिको को भी तगड़ी वार्निंग दी है. ऐसे कदम सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही उठा सकते हैं. अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने वैश्विक राजनीति को झकझोर कर रख दिया है और अब उन्होंने यह संदेश भी साफ कर दिया है कि उन्हें इंटरनेशनल कानूनों की परवाह नहीं है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में नाटो, ग्रीनलैंड, चीन, ताइवान, यूरोप सभी बात की. उन्होंने नाटो और ग्रीनलैंड पर “मालिकाना हक (ownership)” पर जोर दिया गया. साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जब तक वह राष्ट्रपति हैं, चीन ताइवान के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएगा. इसी दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून को दरकिनार करते हुए बयान दिए. 

जब न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनसे पूछा कि क्या उनकी वैश्विक ताकत की कोई सीमा है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि केवल उनका अपना दिमाग ही उन्हें रोक सकता है. उन्होंने कहा,‘हाँ, एक चीज है- मेरी अपनी नैतिकता. मेरा अपना दिमाग. यही एकमात्र चीज है जो मुझे रोक सकती है. मुझे अंतरराष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं है.’ हालाँकि उन्होंने यह भी जोर दिया कि वे लोगों को नुकसान पहुँचाने नहीं जा रहे हैं.

जब उनसे आगे पूछा गया कि क्या उनके प्रशासन को अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना चाहिए, तो ट्रंप ने कहा, “मैं करता हूँ.” अखबार के मुताबिक, ट्रंप ने साफ किया कि ऐसे मामलों में अमेरिका पर कौन-सी पाबंदियाँ लागू होंगी, इसका फैसला वही करेंगे. उन्होंने कहा, “यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी अंतरराष्ट्रीय कानून की परिभाषा क्या है.” 

मेरे रहते चीन ताइवान नहीं लेगा- ट्रंप

चीन और ताइवान के मुद्दे पर, जब उनसे कहा गया कि शी जिनपिंग ताइवान को चीन के लिए एक अलगाववादी खतरे के रूप में देखते हैं, तो ट्रंप ने कहा, “यह उन पर निर्भर करता है कि वह क्या करने जा रहे हैं. लेकिन, आप जानते हैं, मैंने उनसे यह बात साफ तौर पर कही है कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो मैं बहुत नाखुश होऊँगा और मुझे नहीं लगता कि वह ऐसा करेंगे. मुझे उम्मीद है कि वह ऐसा नहीं करेंगे.” चीन और ताइवान के बीच हालिया घटनाक्रम और ताइवान की नाकेबंदी के खतरे पर ट्रंप ने कहा कि जब तक वह राष्ट्रपति हैं, चीनी राष्ट्रपति ऐसे कदम नहीं उठाएँगे. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि हमारे बाद जब कोई दूसरा राष्ट्रपति आए तो वह ऐसा करें, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि उनके राष्ट्रपति रहते हुए वह ऐसा करेंगे.

नाटो या ग्रीनलैंड ट्रंप की प्राथमिकता क्या?

वहीं जब ट्रंप से पूछा गया कि उनकी प्राथमिकता क्या है? नाटो को बचाए रखना या ग्रीनलैंड हासिल करना, तो ट्रंप ने सीधे जवाब देने से इनकार कर दिया, लेकिन यह स्वीकार किया कि “यह एक विकल्प हो सकता है.” उन्होंने कहा, “मालिकाना हक बहुत महत्वपूर्ण है.” जब उनसे पूछा गया कि उन्हें उस क्षेत्र पर कब्जा क्यों चाहिए? तो ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि सफलता के लिए यह मनोवैज्ञानिक रूप से जरूरी है. मेरा मानना है कि मालिकाना हक आपको ऐसी चीजें और ऐसे तत्व देता है जो आप किसी लीज, समझौते या संधि से हासिल नहीं कर सकते. सिर्फ दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से जो नहीं मिलता, वह मालिकाना हक से मिलता है.”

यूरोप को फिर लगाई लताड़

हाल के दिनों में यूरोप कुछ मुद्दों पर अमेरिका से अलग रुख अपना रहा है. यूक्रेन पीस प्लान और ग्रीनलैंड के मुद्दे पर उसने अलग राय व्यक्त की है. यूरोप के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि हम हमेशा यूरोप के साथ अच्छे संबंध रखेंगे, लेकिन मैं चाहता हूँ कि वे सुधरें. मैं ही वह व्यक्ति हूँ जिसने उन्हें नाटो में अपने जीडीपी का ज़्यादा हिस्सा खर्च करने के लिए मजबूर किया. लेकिन अगर आप नाटो को देखें, तो मैं आपको बता सकता हूँ कि रूस किसी और देश को लेकर उतना चिंतित नहीं है जितना हमारे बारे में है. मैं यूरोप के प्रति बहुत वफादार रहा हूँ. मैंने अच्छा काम किया है. अगर मैं न होता, तो रूस अब तक पूरे यूक्रेन पर कब्जा कर चुका होता.”

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अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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