ट्रंप का पाॅजिटिव रिस्पांस, अब यूरेनियम पर नहीं टैरिफ और प्रतिबंधों में राहत पर होगी बात

Donald Trump : ईरान युद्ध में दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान की ओर बातचीत का हाथ बढ़ाया है. उन्होंने एक पाॅजिटिव माहौल बनाने के लिए सोशल मीडिया में पोस्ट लिखा है और दोस्ती की उम्मीद जताई है. उनके पोस्ट से यह उम्मीद जग रही है कि अमेरिका क्षेत्र में शांति स्थापित करने का इच्छुक है.

Donald Trump : अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा के बाद स्थायी शांति के लिए प्रयास तेज हो गए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीतिक पहल करते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखा है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि दोनों देश अब परमाणु कार्यक्रम, टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दों पर साथ मिलकर काम करेंगे.

यूरेनियम की गुणवत्ता बढ़ाने पर नहीं उसे हटाने पर होगी बात

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान में यूरेनियम को जमा कर उसकी गुणवत्ता बढ़ाने पर काम ना हो, बल्कि उसका प्रयोग बंद करवाया जाएगा. उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका और ईरान मिलकर पहले से जमा यूरेनियम को जमीन के नीचे से निकालकर हटाने की दिशा में काम करेंगे.उन्होंने कहा -अब यूरेनियम को जमा नहीं किया जाएगा.


टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों को खत्म करने पर होगी बात

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत को लेकर बातचीत जारी है. उन्होंने कहा कि कई मुद्दों पर पहले ही सहमति बन चुकी है. इसे और भी बेहतर बनाया जाएगा, ताकि दोनों देश आराम से साथ काम कर सकें. यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम लागू हुआ है. इस सीजफायर को क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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