37.5 अरब डॉलर स्वाहा, 18 सैनिक ढेर... फिर भी ट्रंप को ईरान संघर्ष लगता है मामूली बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष की गंभीरता को खारिज करते हुए इसे एक मामूली बात बताया है. उन्होंने देश के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के उस बयान से सहमति जताई, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी इस गतिरोध को युद्ध मानने से इनकार कर दिया था.

ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैं समझ सकता हूं कि वेंस क्या कह रहे हैं. मैं इसे युद्ध के बजाय एक सैन्य संघर्ष कहूंगा, क्योंकि हमारे लिए यह एक मामूली बात है. यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है."

ईरान पर अमेरिकी हमले अब रुक-रुककर हो रहे : ट्रंप

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पर अमेरिकी हमले अब सीमित और रुक-रुककर हो रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य पूरा हो चुका है और अब ईरान के पास परमाणु हथियार हासिल करने की गुंजाइश नहीं बची है.

37.5 अरब डॉलर खर्च, 18 सैनिकों की मौत

ट्रंप भले ही इस सैन्य कार्रवाई का बचाव कर रहे हों, लेकिन आंकड़ों के मुताबिक छह महीने से जारी इस संघर्ष से अमेरिकी खजाने पर भारी असर पड़ा है. इस युद्ध पर अब तक अमेरिकी करदाताओं के 37.5 अरब डॉलर (3.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक) खर्च हो चुके हैं. इसके अलावा 18 अमेरिकी सैन्यकर्मी अपनी जान गंवा चुके हैं.

वियतनाम युद्ध के आंकड़ों का दिया हवाला

पत्रकारों ने जब 18 सैनिकों की मौत को लेकर ट्रंप के तर्क पर सवाल उठाया, तो उन्होंने मौतों की संख्या को कम बताने के लिए वियतनाम युद्ध की तुलना की. ट्रंप ने कहा, "हमने इस कार्रवाई में 18 लोगों को खोया है, जबकि वियतनाम युद्ध में हमने एक लाख लोगों को खोया था." हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives) के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि वियतनाम युद्ध में 58,220 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी.

कुवैत पर हमला और चुनावी समीकरण

उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने भी व्हाइट हाउस में कहा था कि क्षेत्र में फिलहाल ज्यादा गोलीबारी नहीं हो रही है, इसलिए इसे युद्ध नहीं कहा जा सकता. वेंस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने हाल ही में अमेरिकी हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देश कुवैत पर पलटवार किया है.


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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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