श्रीलंका के आर्थिक संकट का आकलन करेगा भारत, विदेश सचिव के नेतृत्व में कोलंबो पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

श्रीलंका के ऐतिहासिक आर्थिक संकट का आकलन करने के लिए विदेश सचिव विनय क्वात्रा के नेतृत्व में भारत सरकार के चार वरिष्ठ अधिकारी गुरुवार को कोलंबो पहुंच गए हैं. यहां पर वे आर्थिक संकट से आकलन करने के लिए श्रीलंका के टॉप नेतृत्व से मुलाकात करेंगे.

कोलंबो : श्रीलंका अब तक के सबसे बड़े ऐतिहासिक आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है. महंगाई अपने चरम पर है और श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार में भी भारी कमी आ गई है. कोरोना महामारी की शुरुआत से ही उसका पर्यटन उद्योग ठप हो जाने की वजह से उसके सामने डॉलर संकट पैदा हो गया, जिसकी वजह से उसका विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. स्थिति यह कि श्रीलंका के पास जरूरी वस्तुओं के आयात तक के लिए भी विदेशी मुद्रा नहीं बची हुई है. उसे भारत की ओर से खाद्य और पेट्रोलियम पदार्थ के साथ ही आर्थिक मदद पहुंचाई जा रही है. अब भारत ने श्रीलंका के इस ऐतिहासिक आर्थिक संकट के आकलन करने का फैसला किया है. इसके लिए विदेश सचिव विनय क्वात्रा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल श्रीलंका की राजधानी कोलंबो पहुंच गया है.

श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व से करेंगे मुलाकात

मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीलंका के ऐतिहासिक आर्थिक संकट का आकलन करने के लिए विदेश सचिव विनय क्वात्रा के नेतृत्व में भारत सरकार के चार वरिष्ठ अधिकारी गुरुवार को कोलंबो पहुंच गए हैं. यहां पर वे आर्थिक संकट से आकलन करने के लिए श्रीलंका के टॉप नेतृत्व से मुलाकात करेंगे. भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों ने कहा कि विदेश सचिव क्वात्रा ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जिसमें मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ वी अनंत नागेश्वरन, आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ और विदेश मामलों के अतिरिक्त सचिव कार्तिक पांडेय शामिल हैं.

वित्तीय सहायता की जरूरत का आकलन करेगा भारत

अपनी यात्रा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल श्रीलंका की वित्तीय स्थिति का आकलन करने और यह समझने की कोशिश करेगा कि क्या इस देश को वित्तीय सहायता की एक और किस्त देने की जरूरत है. प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के साथ बातचीत करेगा. श्रीलंका 1948 में अपनी आजादी के बाद से सबसे भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जिसके चलते वहां भोजन, दवा, रसोई गैस और ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत हो गई है. श्रीलंका का कुल विदेशी कर्ज 51 अरब डॉलर है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह यात्रा 20 जून को नई दिल्ली में श्रीलंकाई दूत मिलिंडा मोरागोडा की विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठकों के बाद तय हुई.

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श्रीलंका में चरम पर है महंगाई

बता दें कि श्रीलंका में महंगाई अपने चरम पर है. ऐतिहासिक आर्थिक संकट की वजह से वहां के आम अवाम को खाद्य और पेट्रोलियम पदार्थ, दवा, रसोई गैस, आवश्यक ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत है. श्रीलंका में यह आर्थिक संकट उसके विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आने के कारण पैदा हुई है. इसके साथ ही, इस आर्थिक संकट के पीछे राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की कमजोर आर्थिक नीतियों को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. उनकी नीतियों और महंगाई के खिलाफ श्रीलंका में पिछले कई महीनों से उग्र प्रदर्शन भी जारी है.

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