ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए चीन और पाकिस्तान ने 5 सूत्री शांति योजना का प्रस्ताव दिया

Iran War : पश्चिम एशिया में तनाव के लगातार बढ़ने और अशांति का कोई समाधान नहीं निकलते देख चीन और पाकिस्तान के नेताओं ने 5 सूत्री शांति प्रस्ताव पेश किया है, ताकि वैश्विक शांति को बनाया जा सके.

Iran War : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को कम करने के लिए चीन और पाकिस्तान ने 5 सूत्री शांति प्रस्ताव रखा, ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके. इन प्रस्तावों में होर्मुज स्ट्रेस से जहाजों के सुरक्षित आवागमन की मांग भी शामिल है.पीटीआई न्यूज एजेंसी से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह शांति प्रस्ताव चीन और पाकिस्तान के बीच हुई बातचीत के बाद प्रस्तुत किया गया.

यथाशीघ्र शांति वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव

चीन और पाकिस्तान के शांति प्रस्ताव में अविलंब शत्रुता समाप्त करने, यथाशीघ्र शांति वार्ता शुरू करने, गैर-सैन्य लक्ष्यों की सुरक्षा और नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी शामिल है.दोनों देशों के नेताओं की वार्ता के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट अपने निकटवर्ती जलक्षेत्र के साथ, माल और ऊर्जा के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, इसे बाधित किया जाना उचित नहीं है.ईरान वर्तमान में खाड़ी से जलडमरूमध्य पार करने वाले तेल के जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित कर रहा है.


चीन ने किया सैन्य अभियान रोकने का आह्वान

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से, चीन सभी देशों से सैन्य अभियान तुरंत रोकने का आह्वान किया है. चीन होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने का भी आह्वान कर रहा है, क्योंकि इसके बंद होने से तेल आपूर्ति में दिक्कत हो रही है. ईरान पर हुए हमलों की निंदा करते हुए, चीन 14-15 मई को होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा की तैयारी भी कर रहा है, जिस दौरान दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिये जाने की उम्मीदें बहुत अधिक हैं.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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