पाकिस्तान-ब्रिटेन के बीच बढ़ रहीं सैन्य नजदीकियां, रावलपिंडी पहुंचे ब्रिटिश सेना चीफ, कौन सी खिचड़ी पका रहे मुनीर?

Pakistan Britain Army relations: इन दिनों पाकिस्तान अपने पड़ोसियों के साथ संघर्ष से परेशान है. भारत और अफगानिस्तान से उसे करारी शिकस्त मिल रही है. इसी बीच वह ब्रिटेन से अपनी सैन्य नजदीकी बढ़ाता दिख रहा है. ब्रिटिश सेना के चीफ जनरल रोलैंड विन्सेंट वॉकर ने रावलपिंडी के जनरल हेडक्वार्टर्स में पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर से मुलाकात की. यह दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बीते कुछ समय में मुलाकातों के क्रम में नया अपडेट है.

Pakistan Britain Army relations: ब्रिटिश सेना के प्रमुख अधिकारी इन दिनों पाकिस्तान के दौरे पर हैं. दोनों देशों के बीच इन दिनों सैन्य स्तर पर काफी नजदीकियां बढ़ रही हैं. ब्रिटिश सेना प्रमुख जनरल रोलैंड विन्सेंट वॉकर ने रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से मुलाकात की. दोनों अधिकारियों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की. जनरल रोलैंड विन्सेंट वॉकर और आसिम मुनीर के बीच गुरुवार को रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान के जनरल हेडक्वार्टर्स (GHQ) में मुलाकात हुई. इस दौरान दोनों अधिकारियों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की.

पाकिस्तान सेना द्वारा जारी बयान के अनुसार, बैठक में दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े मुद्दों, क्षेत्रीय सुरक्षा और यूके और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विचार किया. जनरल वॉकर ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तानी सेना की उपलब्धियों की भी सराहना की. दोनों सेनाध्यक्षों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया. GHQ पहुंचने पर, जनरल वॉकर ने यादगार-ए-शुहदा पर पुष्पचक्र अर्पित किया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. दोनों देशों के सैन्य अधिकारी नियमित रूप से एक-दूसरे से संवाद करते रहते हैं.

पाकिस्तान और ब्रिटेन के बीच बढ़ रहीं नजदीकियां

यह मुलाकात पश्चिमी देशों और इस्लामाबाद के बीच संबंधों में बढ़ते सामंजस्य का संकेत देती है. जनरल मुनीर ने इससे पहले फरवरी में ब्रिटेन की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान जनरल वॉकर ब्रिटेन के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ एडमिरल टोनी राडाकिन तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोनाथन पॉवेल से मुलाकात की थी. फरवरी में ब्रिटेन की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान मुनीर ने रॉयल मिलिट्री एकेडमी, सैंडहर्स्ट में आयोजित 7वें रीजनल स्टेबिलाइजेशन कॉन्फ्रेंस में मुख्य भाषण दिया था.

वहीं मई 2024 में तत्कालीन CGS जनरल सर पैट्रिक सैंडर्स ने भी पाकिस्तान का दौरा किया था, जहां उन्होंने जनरल मुनीर से मुलाकात की थी. इस दौरान जनरल वॉकर भी CGS-डिजिग्नेट के रूप में मौजूद थे. जनरल सैंडर्स ने इस दौरान नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी, इस्लामाबाद में आयोजित छठे पाकिस्तान-यूके रीजनल स्टेबिलाइजेशन कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित किया था. जनरल मुनीर और जनरल सैंडर्स की इससे पहले मई 2023 में रावलपिंडी में भी मुलाकात हुई थी, जब जनरल सैंडर्स ने पाकिस्तान का दौरा किया था.

पाकिस्तान के चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी, जनरल साहिर शामशाद मिर्जा ने भी पिछले वर्ष अपने ब्रिटेन दौरे के दौरान वरिष्ठ ब्रिटिश रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की थी. यह बैठक दोनों देशों के बीच जारी रणनीतिक संवाद का हिस्सा थी. पाकिस्तान और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग में पाकिस्तानी अधिकारियों का रॉयल मिलिट्री एकेडमी सैंडहर्स्ट और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में प्रशिक्षण शामिल है. इसके अलावा, पाकिस्तान सेना की टीमें नियमित रूप से ब्रिटेन की ‘कैम्ब्रियन पेट्रोल’ प्रतियोगिता में भी भाग लेती हैं.

संघर्ष से हलकान है पाकिस्तान

पाकिस्तान इन दिनों अपने पड़ोसी देशों के साथ संघर्ष की स्थिति में है. जब 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी, जिसे भारत ने निर्मम आतंकी हमला बताया और ऑपरेशन सिंदूर लांच किया, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और 100 से अधिक आतंकियों का सफाया किया गया. वहीं अफगानिस्तान के साथ भी पाकिस्तान युद्ध जैसे हालात में है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हुए हालिया संघर्ष में भी काफी अफगान नागरिकों और पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की सूचना आई है. हालांकि दोनों देश इन दिनों शांति वार्ता के लिए तुर्की में हैं. दो दौर की वार्ता विफल होने के बाद तीसरी बार 6 नवंबर को पड़ोसी देशों के बीच चर्चा चल रही है. इसी बीच डूरंड लाइन पर एकबार फिर से संघर्ष बढ़ गया है. 

अमेरिका के भी नजदीक हो रहा पाकिस्तान

ब्रिटिश सेना प्रमुख की यह यात्रा अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों के बीच भी हो रही है. आसिम मुनीर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सराहा था क्योंकि उन्होंने भारत के साथ संघर्षविराम कराने के उनके बिना सबूत वाले दावे का समर्थन किया था. दोनों देशों के बीच 10 मई को संघर्षविराम पर सहमति बनी, जिसका श्रेय डोनाल्ड ट्रंप बार-बार खुद को देते रहे हैं. हालांकि भारत ने बार-बार कहा कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं हुई, लेकिन पाकिस्तान ने तुरंत ट्रंप को श्रेय दिया और अमेरिका की कृपा पाने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित भी किया.

खुद को बेच रहा पाकिस्तान?

डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान के साथ बढ़ते संबंध चौंकाने वाले हैं, क्योंकि उन्होंने पहले पाकिस्तान को आतंकवादियों का अड्डा और अमेरिका को धोखा देने वाला देश कहा था. हालांकि भारत के हमले के बाद परिस्थितयां बदल गई हैं. पाकिस्तान चीन के साए से दूर होने की कोशिश कर रहा है. उसने अपने संबंध सुधारने के लिए अमेरिका का रुख किया. इसके बाद अमेरिका और पाकिस्तान ने एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत पाकिस्तान के तेल भंडारों को अमेरिकी निवेश के लिए खोला जाएगा और इस्लामाबाद के लिए टैरिफ घटाए जाएंगे. वहीं आसिम मुनीर ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान डोनाल्ड ट्रंप को बलूचिस्तान में रेयर अर्थ मैटेरियल निकालने का ऑफर दिया था. इसी सेशन में पाकिस्तान ने अमेरिका को पासनी में एक बंदरगाह बनाने का भी मौका देने का वादा किया है.

ये भी पढ़ें:-

इजरायल ने इजिप्ट बॉर्डर पर छेड़ा वॉर, सेना, शिन बेट और पुलिस मिलकर करेंगे कार्रवाई, अब किसके खात्मे के पीछे पड़े यहूदी?

ट्रंप के सामने बेहोश हो गया उनका गेस्ट, रोकनी पड़ी प्रेस कांफ्रेंस, व्हाइट हाउस में बार-बार क्यों हो रहा ऐसा?

पाकिस्तान पर भड़का रूस, विरोधी लेख और प्रोपेगेंडा फैलाने का लगाया आरोप, पाकिस्तानी जनता से की खास अपील

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >