26 साल का कार सेल्समैन बना राजकुमार, खुला बेल्जियम के शाही परिवार का पुराना राज

एक कार सेल्समैन की जिंदगी अचानक बेल्जियम के शाही परिवार से जुड़ गई. बेल्जियम के प्रिंस लॉरेंट ने 26 साल के क्लेमेंट वैंडेनकेर्खोव को डीएनए टेस्ट के बाद अपना बेटा स्वीकार किया है.

Car Salesman Prince: बेल्जियम में एक 26 वर्षीय कार सेल्समैन की जिंदगी अचानक ऐसी बदल गई, जिसकी शायद उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी. जिस व्यक्ति को वर्षों तक अपने पिता की पहचान तक नहीं मालूम थी, अब वह आधिकारिक तौर पर देश के शाही परिवार का सदस्य है. डीएनए जांच में रिश्ता साबित होने के बाद प्रिंस लॉरेंट ने उसे अपना बेटा स्वीकार कर लिया है. प्रिंस लॉरेंट बेल्जियम के राजा फिलिप के छोटे भाई हैं.

मां ने 16 साल की उम्र में बताया था पिता का नाम

यह कहानी है क्लेमेंट वांदेनकेर्कहोव की, जिनका जन्म अगस्त 2000 में हुआ था. उनकी मां बेल्जियम की मशहूर सिंगर वेंडी वैन वांटेन हैं. उनका असली नाम आइरिस वांदेनकेर्कहोव है. क्लेमेंट को बचपन में यह नहीं पता था कि उनके जैविक पिता कौन हैं. यह राज तब खुला, जब वह 16 साल के हुए. उनकी मां ने उन्हें बताया कि उनके पिता कोई और नहीं, बल्कि प्रिंस लॉरेंट हैं.

आइरिस और प्रिंस लॉरेंट की मुलाकात 1990 के दशक में पेरिस में आयोजित एक फैशन शो के दौरान हुई थी. इसके बाद दोनों के बीच संबंध बने थे. हालांकि, दोनों का रिश्ता परवान नहीं चढ़ सका, कहा जाता है कि प्रिंस लॉरेंट के पिता और पूर्व राजा किंग अल्बर्ट द्वितीय इस रिश्ते के खिलाफ थे. बाद में प्रिंस लॉरेंट ने प्रिंसेस क्लेयर से 2003 में शादी कर ली. 

बेल्जियम के शाही परिवार को कवर करने वाले पत्रकार ने प्रिंस लॉरेंट और सिंगर वेंडी वैन वांटेन की पुरानी फोटो शेयर की है. देखें-

किंग अल्बर्ट के फैसले ने खोला क्लेमेंट का रास्ता

16 साल जिंदगी में क्लेमेंट अपने पिता की पहचान से अनजान रहे, लेकिन अपने पिता से मुलाकात का रास्ता भी खुद किंग अल्बर्ट द्वितीय के एक फैसले ने किया. दरअसल जब 1999 में खुद किंग अल्बर्ट द्वितीय की निजी जिंदगी से जुड़ा एक पुराना मामला सार्वजनिक हुआ.  

उनके विवाहेतर संबंध और उससे जन्मी बेटी का मामला सामने आया. हालांकि डेल्फिन बोएल को अपने पिता की पहचान के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. 2013 में अल्बर्ट द्वितीय के सिंहासन छोड़ने के बाद उन्होंने इस मामले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाया. आखिरकार 2020 में किंग अल्बर्ट द्वितीय ने डेल्फिन बोएल को अपनी जैविक बेटी स्वीकार कर लिया. उस समय डेल्फिन 58 साल की थीं. इसके बाद उन्हें राजकुमारी का दर्जा भी मिला.

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दस साल बाद बेटे ने खुद प्रिंस लॉरेंट से संपर्क किया

मां से मिली जानकारी और अल्बर्ट के फैसले के बाद क्लेमेंट ने करीब एक दशक बाद खुद प्रिंस लॉरेंट से संपर्क करने का फैसला किया. उन्होंने प्रिंस को बताया कि जिसके बाद लॉरेंट ने डीएनए जांच कराने पर सहमति जताई. जांच ने उस रिश्ते पर मुहर लगा दी, यानी डीएनए टेस्ट में 99.5 प्रतिशत पुष्टि हुई कि प्रिंस लॉरेंट ही उनके जैविक पिता हैं.

क्लेमेंट ने बेल्जियम के न्यूज चैनल VTM से बात करते हुए उस दिन को भी याद किया, जब दोनों अस्पताल में डीएनए टेस्ट के लिए गए थे. उनके मुताबिक, लॉरेंट ने माहौल को सहज बनाने की कोशिश की और खुद पहले टेस्ट कराने की पेशकश की. हालांकि, इस रिश्ते को आधिकारिक रूप मिलने में कुछ और समय लगा.

क्लेमेंट वैंडेनकेर्खोव और प्रिंस लॉरेंट. फोटो- एक्स.

करीब छह महीने पहले चुपचाप हुई कानूनी मान्यता

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब छह महीने पहले एक बेहद निजी टाउन हॉल समारोह में क्लेमेंट को बेल्जियम के सिटिजन रजिस्टर में प्रिंस लॉरेंट के बेटे के रूप में दर्ज किया गया. यह समारोह काफी शांत तरीके से हुआ और इसकी जानकारी सार्वजनिक होने में भी कई महीने लग गए.

इस कानूनी मान्यता के साथ क्लेमेंट को प्रिंस लॉरेंट की निजी संपत्ति में वही उत्तराधिकार अधिकार मिल गए हैं, जो उनके पिता के अन्य तीन बच्चों को प्राप्त हैं. प्रिंस लॉरेंट के ये तीन बच्चे हैं. 20 वर्षीय प्रिंसेस लुईस, 20 वर्षीय प्रिंस निकोलस और 19 वर्षीय प्रिंस आयमेरिक. ये तीनों लॉरेंट और उनकी पत्नी प्रिंसेस क्लेयर के बच्चे हैं.

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शाही परिवार का हिस्सा, लेकिन राजघराने वाली सारी सुविधाएं नहीं

क्लेमेंट का शाही परिवार से जुड़ना निश्चित रूप से उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें बेल्जियम के वरिष्ठ राजघराने के सदस्यों जैसी सभी सुविधाएं मिलेंगी. उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाला कोई शाही भत्ता नहीं मिलेगा. उनसे आधिकारिक शाही कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की अपेक्षा भी नहीं होगी. 

इतना ही नहीं, उन्हें बेल्जियम की राजगद्दी पर कोई अधिकार भी नहीं मिलेगा. यानी कानूनी तौर पर वह प्रिंस लॉरेंट के बेटे हैं और उनके निजी धन में उत्तराधिकार का अधिकार रखते हैं, लेकिन उन्हें राजशाही की संवैधानिक भूमिका नहीं मिलेगी.

पिता का शाही उपनाम अपना सकते हैं, लेकिन क्लेमेंट ने किया इनकार

क्लेमेंट के सामने एक और विकल्प है. वह अपने पिता का राजवंशीय उपनाम सैक्स-कोबर्ग अपना सकते हैं. लेकिन उन्होंने संकेत दिया है कि ऐसा करने की उनकी फिलहाल कोई खास इच्छा नहीं है. बेल्जियम के दैनिक अखबार हेत नीउव्सब्लाद से बातचीत में क्लेमेंट ने कहा, 'मुझे वैंडेनकर्खोव नाम पर गर्व है.'

उन्होंने इसकी वजह भी बताई. उनका कहना था कि इस नाम को छोड़ना उन्हें ऐसा महसूस कराएगा, जैसे वह अपनी मां के उन संघर्षों और त्याग से मुंह मोड़ रहे हों, जो उन्होंने उन्हें पालने के दौरान किए. हालांकि, 2020 में जब अल्बर्ट द्वितीय ने डेल्फीन बोल को अपनी बेटी के रूप में स्वीकार किया और राजकुमारी का दर्जा दिया गया तो उन्होंने डेल्फीन डी सैक्स-कोबर्ग नाम अपनाया.

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