बांग्लादेश: 24 घंटे में दो हिंदुओं की गोली मारकर हत्या, एक विधवा का बलात्कार कर मारने की कोशिश, यूनुस महकमा मौन

Bangladesh Violence on Hindus: बांग्लादेश में सोमवार को दो हिंदुओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई और एक विधवा से बलात्कार के बाद मारने की कोशिश की गई. यह इस देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के क्रम में तेजी से बढ़ोतरी को दर्शा रही है. वहीं हमलों के बाद यूनुस प्रशासन की चुप्पी इस हिंसा में आग में घी की तरह काम कर रही है.

Bangladesh Violence on Hindus: बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के भयावह दौर में प्रवेश कर गया है. बीते 24 घंटे में इस देश में दो हिंदुओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि एक महिला के साथ बलात्कार जैसी दरिंदगी की गई. यह बीते एक महीने के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ की जा रही हिंसा में बेतहाशा वृद्धि को दर्शाती है और बांग्लादेश में फेल हो चुकी कानून व्यवस्था की कहानी कह रही है. सोमवार को दो हिंदुओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई. यह बीते तीन सप्ताह में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की पांचवीं घटना है. बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव प्रस्तावित हैं और लगातार हो रही इन घटनाओं ने आम चुनाव से पहले देश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

सोमवार शाम को मोनिरामपुर में 45 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. बताया गया है कि जेस्सोर जिले के मोनिरामपुर उपजिला में दोपहर के समय अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी. घटना के पीछे की वजह अब तक साफ नहीं हो पाई है. पुलिस की ओर से न तो किसी गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है और न ही संभावित कारणों पर कोई आधिकारिक बयान आया है. यह वारदात सोमवार, 5 जनवरी को कपालिया बाजार में हुई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम लगभग 5:45 बजे अज्ञात हमलावरों ने राणा प्रताप बैरागी पर अचानक गोलियां चला दीं. गोली लगते ही उनकी मौके पर ही मौत हो गई. बताया गया है कि राणा प्रताप बाजार में अपने रोजमर्रा के काम से आए हुए थे, तभी उन पर यह हमला किया गया.

राणा प्रताप एक आइस फैक्ट्री के मालिक थे और नराइल जिले से प्रकाशित दैनिक अखबार ‘बीडी खबर’ के कार्यकारी संपादक भी थे. स्थानीय निवासियों के मुताबिक, मोटरसाइकिल सवार कुछ लोग फैक्ट्री पहुंचे, राणा प्रताप को बाहर बुलाया और एक गली में ले जाकर उनसे बहस की. इसके बाद उनके सिर में कई गोलियां मारी गईं और गला रेतकर हमलावर फरार हो गए. पुलिस ने घटनास्थल से सात खाली कारतूस बरामद किए हैं. अधिकारियों ने पुष्टि की है कि राणा प्रताप के सिर में तीन गोलियां लगी थीं. इन दोहरी हत्याओं के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत फैल गई है.

रात में एक और हत्या

इस घटना के बाद सोमवार (5 जनवरी) रात करीब 10 बजे नरसिंगदी जिले के पलाश उपजिला स्थित चोरसिंदूर बाजार में किराना दुकान चलाने वाले 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि उर्फ मोनी चक्रवर्ती पर अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया. हमले में गंभीर रूप से घायल मणि को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला अचानक किया गया और हमलावर मौके से फरार हो गए. राजधानी ढाका के नजदीक हुई इस वारदात ने लोगों को और अधिक चौंका दिया है. स्थानीय लोगों का दावा है कि हमलावर कट्टरपंथी थे और मणि को केवल हिंदू होने के कारण निशाना बनाया गया.

विधवा से पैसे मांगे, बलात्कार, मारने की कोशिश

बांग्लादेश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं. कालीगंज क्षेत्र में एक 40 वर्षीय हिंदू विधवा महिला के साथ दो आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया और इसके बाद उसे पेड़ से बांधकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया. आरोपियों ने महिला के बाल काट दिए और पूरी दरिंदगी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. पीड़िता की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, उसने शाहीन और उसके भाई से दो कट्ठे जमीन और एक दो-मंजिला मकान खरीदा था, जिसके बदले उसने 20 लाख टका चुकाए थे. कुछ समय बाद दोनों ने उस पर अतिरिक्त पैसों की मांग शुरू कर दी और जब महिला ने इस अवैध वसूली का विरोध किया, तो उसे धमकियां दी जाने लगीं.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार शाम शाहीन अपने सहयोगी हसन के साथ जबरन महिला के घर में घुसा और उसके साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद आरोपियों ने उससे 50 हजार टका, यानी करीब 37 हजार रुपये की मांग की. बताया गया है कि उस समय पीड़िता के घर कुछ मेहमान भी मौजूद थे, जिनके साथ भी मारपीट की गई. शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब महिला ने मदद के लिए चिल्लाने की कोशिश की तो उसे पेड़ से बांध दिया गया और इस अमानवीय कृत्य का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला को तब तक पीटा गया जब तक वह बेहोश नहीं हो गई. बाद में स्थानीय लोगों ने उसे छुड़ाकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शुरुआत में पीड़िता ने दुष्कर्म की बात नहीं बताई थी, लेकिन मेडिकल जांच में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई. होश में आने के बाद महिला ने कालीगंज थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने बयान दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया है.

हसीना सरकार गिरने के बाद बढ़ी हिंसा

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. कट्टरपंथी तत्वों के निशाने पर आए इस समुदाय को हाल के दिनों में गंभीर हिंसा का सामना करना पड़ा है. हिंसा की यह श्रृंखला दिसंबर 2025 में कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद शुरू हुई. इसके बाद भारत-विरोधी प्रदर्शनों ने धीरे-धीरे सांप्रदायिक रूप ले लिया और हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जाने लगा. लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई ओइक्य परिषद के प्रवक्ता काजोल देबनाथ के अनुसार, केवल दिसंबर महीने में ही हिंदू समुदाय पर सात हमले दर्ज किए गए, जिनमें पांच लोगों की जान गई. उन्होंने आरोप लगाया कि कट्टरपंथी संगठन अल्पसंख्यकों को डराने और चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले 18 दिनों में ही 6 हिंदुओं की मौत की खबरें सामने आई हैं. 

पिछले 18 दिनों में हुई प्रमुख हत्याएं

  • 18 दिसंबर 2025: मैमनसिंह में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर और जिंदा जलाकर हत्या, ईशनिंदा के आरोप लगाए गए.
  • 24 दिसंबर 2025: राजबारी में अमृत मंडल की उगाही के आरोप में भीड़ द्वारा हत्या.
  • 29-30 दिसंबर 2025: गारमेंट फैक्ट्री में ड्यूटी के दौरान बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या.
  • 31 दिसंबर 2025: शरियतपुर में खोकन चंद्र दास पर चाकू से हमला, पेट्रोल डालकर जलाया गया; 3 जनवरी 2026 को अस्पताल में मौत.
  • 5 जनवरी 2026: जशोर में राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या.
  • 5 जनवरी 2026: नरसिंगदी में शरत चक्रवर्ती मणि की धारदार हथियारों से हत्या.

यूनुस प्रशासन मौन

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और अल्पसंख्यक समुदाय पर बढ़ते हमलों की आलोचना की है. भारत ने भी बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है. हालांकि, अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली प्रशासन पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित न कर पाने के आरोप लग रहे हैं. कुछ रिपोर्ट्स इन हमलों को धार्मिक कट्टरता से प्रेरित बता रही हैं, जबकि सरकार कई मामलों को आपराधिक या व्यक्तिगत विवाद करार दे रही है. वह इन घटनाओं को सांप्रदायिक हिंसा मानने से इनकार कर रही है और इन्हें सामान्य आपराधिक मामले बता रही है.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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