Bangladesh Mobile Tower Off : 10 बाढ़ प्रभावित जिलों में मोबाइल टावर नहीं कर रहे काम

Bangladesh Mobile Tower Off : बांग्लादेश के 10 बाढ़ प्रभावित जिलों में लगभग 11% मोबाइल टावर काम नहीं कर रहे हैं. जानें क्या है स्थिति

Bangladesh Mobile Tower Off : बांग्लादेश बाढ़ से तबाह है. यहां के 10 बाढ़ प्रभावित जिलों में लगभग 11% मोबाइल टावर काम नहीं कर रहे हैं. केवल फेनी जिले में 92% टावर काम नहीं कर रहे हैं. ऐसा बिजली की परेशानी और टावर क्षेत्रों के जलमग्न होने के कारण है, इन इलाकों में नेटवर्क कनेक्टिविटी को बहाल करना असंभव हो गया है. dhakatribune.com ने इस खबर को प्रकाशित की है.

शुक्रवार को दोपहर 3 बजे तक बांग्लादेश दूरसंचार विनियामक आयोग (बीटीआरसी) की ओर से जो डाटा जारी किया गया है उसके अनुसार, फेनी, नोआखली, लक्ष्मीपुर, कोमिला, ब्राह्मणबारिया, चटगांव, खगराचारी, हबीगंज, मौलवीबाजार और सिलहट जिलों में 13,240 टावरों में से 1,461 टावर बंद हो चुके हैं. खासकर, फेनी में 91.9% टावर सेवा से बाहर हैं. नोआखली में 21% से अधिक, खगराचारी में 15% से अधिक और कोमिला में लगभग 14% टावर सेवा ठप है.

बांग्लादेश में मोबाइल टावर की कनेक्टिविटी कब बहाल होगी?

बीटीआरसी की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल टावर की कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए सेना की सहायता ली जा रही है. हालांकि, जब तक पानी कम नहीं हो जाता, तब तक जलमग्न क्षेत्रों में बहाली का काम शुरू होने के आसार नहीं हैं. फेनी में स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है. इसके अलावा, सिलहट और मौलवीबाजार में बाढ़ की स्थिति और खराब होने से संचार बहाली में और बाधा आ सकती है.

बांग्लादेश के कितने जिले बाढ़ प्रभावित हैं?

आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गई कि वर्तमान में 11 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, जिससे लगभग 4.5 मिलियन लोग प्रभावित हुए हैं. लगभग 887,629 घर जलमग्न हो गए हैं. भारी बारिश और ऊपर की ओर पानी के बहाव ने इन जिलों के कई इलाके जलमग्न हो चुके हैं.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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