Bangladesh Hindus : Awami League ने कहा- बांग्लादेश में हिंदू और मुस्लिमों के बीच बढ़ेगी दूरी

Bangladesh Hindus : बांग्लादेश में 49 शिक्षकों को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा. हालांकि, 19 शिक्षकों को फिर से बहाल कर दिया गया है.

Bangladesh Hindus : बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. इसकी वजह है वहां के अल्पसंख्यकों पर हो रहा अत्याचार. दरअसल, एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें कहा गया है कि देश में राजनीतिक अराजकता के बाद अल्पसंख्यक समुदायों के दर्जनों शिक्षकों को शिक्षा संस्थानों में अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया. पिछले महीने शेख हसीना को सत्ता से हटाया गया जिसके बाद से देश का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है.

हिंदुओं पर हमले को लेकर क्या कहा बांग्लादेश छात्र ओइक्या परिषद ने ?

‘द डेली स्टार’ ने इस संबंध में खबर प्रकाशित की है जिसके अनुसार, बांग्लादेश छात्र ओइक्या परिषद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और इस बाबत जानकारी दी. संगठन के समन्वयक साजिब सरकार ने कहा कि शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के गिरने के बाद से धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक हिंसा का शिकार हो रहे हैं. हिंसा में हिंदुओं पर हमले, लूटपाट, महिलाओं पर हमले शामिल हैं. मंदिरों में तोड़फोड़, घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर आगजनी की गई. हिंदुओं की हत्याएं भी कर दी गई. देशभर में अल्पसंख्यक शिक्षकों को शारीरिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ा है. इस वजह से 49 शिक्षकों को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा. हालांकि, 19 शिक्षकों को फिर से बहाल कर दिया गया है.

Awami League ने क्या दी प्रतिक्रिया?

Awami League ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा- एक महीने से भी कम समय में शिक्षा संस्थानों में अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षकों की बड़े पैमाने पर छंटनी की गई. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. इससे दोनों सुमदाय के बीच दूरियां बढ़ेंगी. बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित कम से कम 49 शिक्षकों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया.

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लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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